कानपुर: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कानपुर (Kanpur) शहर से एक बेहद चौंकाने वाला स्वास्थ्य मामला सामने आया है, जिसने टैटू बनवाने के शौकीनों की चिंता बढ़ा दी है. कानपुर की रहने वाली एक 32 वर्षीय महिला दिल्ली के एक पार्लर में टैटू बनवाने के कुछ हफ्तों बाद एचआईवी (HIV) पॉजिटिव पाई गई है. गणेश शंकर विद्यार्थी स्मारक (Ganesh Shankar Vidyarthi Memorial) (GSVM) मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों का शुरुआती तौर पर मानना है कि महिला के शरीर में यह खतरनाक वायरस टैटू (Tattoo) बनाते समय इस्तेमाल की गई दूषित या गैर-स्टरलाइज्ड सुई के जरिए फैला है. यह भी पढ़ें: खत्म होगी HIV महामारी! अब सिर्फ 3500 रुपये में मिलेगी 23 लाख की दवा, भारतीय कंपनियां बनाएंगी सस्ता इंजेक्शन
ऐसे हुआ मामले का खुलासा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित महिला करीब दो हफ्ते पहले टैटू बनवाने के बाद जननांग में गंभीर संक्रमण (Genital Infection) की समस्या लेकर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग (Dermatology) विभाग में पहुंची थी. महिला की नाजुक स्थिति और लक्षणों की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तुरंत एचआईवी और हेपेटाइटिस-बी जैसे ब्लड-बॉर्न (रक्त के जरिए फैलने वाले) रोगों की नैदानिक जांच कराने की सलाह दी.
जब जांच रिपोर्ट आई तो सभी हैरान रह गए। महिला की हेपेटाइटिस-बी रिपोर्ट तो नेगेटिव रही, लेकिन उसमें एचआईवी (HIV) संक्रमण की पुष्टि हुई.
डॉक्टरों की जांच और एआरटी इलाज शुरू
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्वेतांक ने बताया कि प्राथमिक जांच के निष्कर्ष मजबूती से इस ओर इशारा करते हैं कि संक्रमण का मुख्य कारण दूषित टैटू सुई हो सकती है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संक्रमण के सटीक स्रोत की पूरी तरह से पुष्टि करने के लिए विस्तृत जांच जारी है.
पीड़ित महिला को तत्काल एक सरकारी अस्पताल के एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) सेंटर में पंजीकृत किया गया है, जहां उसका मुफ्त इलाज शुरू हो चुका है. डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि यद्यपि जीवनभर चलने वाली दवाओं से एचआईवी को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है, लेकिन इसका कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है.
अस्वच्छ पार्लरों और रंगीन स्याही को लेकर स्वास्थ्य चेतावनी
इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टरों ने आम जनता के लिए कड़ी चेतावनी जारी की है. विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग किसी भी अनधिकृत, अस्वच्छ या सस्ते पार्लरों में टैटू बनवाने से बचें.
डॉ. श्वेतांक ने बताया कि दूषित सुइयों के प्रयोग से न केवल एचआईवी, बल्कि हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसे जानलेवा रक्त संक्रमणों का सीधा खतरा रहता है. इसके अलावा, घटिया क्वालिटी की टैटू इंक (स्याही) से त्वचा पर गंभीर एलर्जिक रिएक्शन, लाल चकत्ते और ग्रेन्युलोमा (Granulomas) जैसी बीमारियां हो सकती हैं. विशेष रूप से लाल और हरे रंग के पिगमेंट से त्वचा रोगों का जोखिम सबसे अधिक होता है.
टैटू बनवाते समय इन सावधानियों का रखें ध्यान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि टैटू बनवाने से पहले स्वच्छता और सुरक्षा प्रोटोकॉल की जांच करना बेहद जरूरी है:
- नई सुई का इस्तेमाल: हमेशा अपनी आंखों के सामने सील-पैक नई सुई को मशीन में लगवाएं.
- प्रमाणित पार्लर: केवल लाइसेंस प्राप्त और हाइजीन मानकों का कड़ाई से पालन करने वाले स्टूडियो में ही जाएं.
- मेले व सड़क किनारे बचें: मेलों या अस्थायी स्टॉलों पर इस्तेमाल होने वाले उपकरणों से संक्रमण फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है.













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