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योगी सरकार गौ सेवा के लिए वसूलेगी ‘गौ कल्याण सेस’, आवारा पशुओं के लिए बनेंगे आश्रय स्थल

गायों के आश्रय स्थलों के वित्तीय प्रबंधन के लिए एक्साइज विभाग शराब पर दो प्रतिशत 'गौ कल्याण सेस' लगाएगा

योगी सरकार गौ सेवा के लिए वसूलेगी ‘गौ कल्याण सेस’, आवारा पशुओं के लिए बनेंगे आश्रय स्थल
सीएम योगी आदित्यनाथ (Photo credit: PTI)

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की योगी सरकार (Yogi Government) ने गौ सेवा (Gau Sewa) को लेकर एक अहम फैसला किया है. सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई  कैबिनेट की बैठक में पांच प्रस्तावों पर मुहर लगी. इसमें सबसे अहम फैसला यह है कि गायों के आश्रय स्थलों के वित्तीय प्रबंधन के लिए एक्साइज विभाग (Excise Department) शराब पर दो प्रतिशत 'गौ कल्याण सेस' (Gau Kalyan Cess) लगाएगा. सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के मुताबिक, आवारा गौवंश की समस्या के समाधान के लिए कदम उठाया गया है. हर जिले में ग्रामीण क्षेत्रों और नगरीय क्षेत्र में न्यूनतम 1000 निराश्रित पशुओं के लिए आश्रय स्थल बनेंगे. इसके लिए मनरेगा के माध्यम से ग्राम पंचायत, विधायक, सांसद निधि से निर्माण कराया जाएगा. 100 करोड़ रुपये स्थानीय निकाय को सरकार ने दिए हैं.

उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी ग्रामीण निकायों (ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत) और शहरी निकायों (नगर पालिका, नगर निगम) में स्थायी गौवंश आश्रय स्थल बनाने और संचालन नीति के निर्धारण के प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी मिली है. गौवंश आश्रय स्थलों के वित्तीय प्रबंधन के लिए एक्साइज विभाग शराब पर दो प्रतिशत गौ कल्याण सेस लगाएगा. इससे पहले सोमवार को श्रीकांत शर्मा ने कहा था कि आवारा पशुओं की समस्या का जल्द ही हल निकाल लिया जाएगा और गौवंश को सुरक्षित रखने के लिए प्रत्येक प्रखंड में गौशाला की व्यवस्था की जा रही है. शर्मा ने कहा था कि इस बात का खास ध्यान रखा जाएगा कि आवारा पशुओं से किसानों के फसल का नुकसान नहीं हो.

कैबिनेट के अन्य फैसले-

मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि पुलिस और अग्निशमन सेवा के अफसरों व कार्मिकों के साथ ड्यूटी के दौरान होने वाली किसी दुर्घटना के लिए उन्हें अनुग्रह राशि प्रदान किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है. 80 से 100 फीसदी तक अपंग होने पर 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. 70 से 79 फीसदी तक 15 लाख रुपये, 50 से 69 फीसदी तक 10 लाख रुपये की आर्थिक राशि प्रदान करने की स्वीकृति दी गई है. यह भी पढ़ें- राम मंदिर निर्माण पर बोले पीएम मोदी, न्यायिक प्रक्रिया पूरा होने के बाद ही अध्यादेश पर लिया जाएगा फैसला

उन्होंने कहा कि इससे पहले की व्यवस्था में पुलिस विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों की ड्यूटी के दौरान मारे जाने पर उनके परिजनों को अनुग्रह राशि दी जाती थी. उनके परिवार को 40 लाख रुपये और उनके माता-पिता को 10 लाख रुपये दिए जाते हैं, लेकिन अग्निशमन के कर्मचारियों के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी. यह व्यवस्था नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में केंद्र सरकार ने की है.

प्रवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र की नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में व्यवस्था का संज्ञान लेते हुए इसे लागू किया है. उन्होंने यह भी बताया कि यूपी के 10 सेक्टरों में कार्यरत सर्तकता अधिष्ठान (विजिलेंस) की इकाइयों को थाना बनाने के प्रस्ताव पर भी मुहर लगाई गई है. विजिलेंस की लखनऊ, अयोध्या, कानपुर, आगरा, वाराणसी, मेरठ, प्रयागराज, बरेली, गोरखपुर और झांसी स्थित इकाइयों को थाने का दर्जा दिया गया. अभी तक विजिलेंस को एफआईआर दर्ज कराने के लिए स्थानीय पुलिस पर निर्भर होना पड़ता था.

शर्मा ने कहा कि यूपी इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, लखनऊ में निदेशक/सचिव पद पर सीधी भर्ती प्रक्रिया में संशोधन से संबंधित प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है. आवेदन के लिए आयु पहले 57 वर्ष तक थी, जिसे अब घटा कर 45 से 55 वर्ष कर दिया गया है. उन्होंने कहा मोटर दुर्घटना प्रतिकर से जुड़े मामले में जिला स्तर पर विशेषीकृत मोटर दुर्घटना अधिकरण स्थापित होगा. इसके लिए 23.73 करोड़ रुपये निर्धारित होंगे. एडीजे के स्तर पर अदालत भी बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है.

एजेंसी इनपुट

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 02, 2019 08:35 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).