Satna: 4 बच्चों को चढ़ाया HIV संक्रमित ब्लड, सतना के हॉस्पिटल की बड़ी लापरवाही उजागर, प्रशासन में मची खलबली

मध्य प्रदेश के सतना के जिला हॉस्पिटल की लापरवाही के कारण चार बच्चों की ब्लड रिपोर्ट एचआईवी पॉजिटिव आई है.

Satna News: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सतना (Satna) जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है. जिला हॉस्पिटल (District Hospital) के ब्लड बैंक से बार-बार रक्त चढ़वाने वाले थैलेसीमिया (Thalassemia) से पीड़ित चार मासूम बच्चों में एचआईवी संक्रमण (HIV Positive) पाए जाने की पुष्टि हुई है. इस घटना के बाद पीड़ित परिवारों में डर और आक्रोश का माहौल है.थैलेसीमिया से जूझ रहे बच्चों को जीवनभर नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन (Regular Blood Transfusion) की जरूरत होती है.

बताया जा रहा है कि चारों बच्चों को इलाज के दौरान कई बार खून चढ़ाया गया था. बाद में जब फॉलो-अप जांच (Follow-up Test) कराई गई, तो सभी बच्चे एचआईवी (HIV) संक्रमित पाए गए.ये भी पढ़े:बिहार के सीतामढ़ी में HIV का बढ़ता खतरा, 7400 मामले सामने आए, 400 से ज्यादा बच्चे संक्रमित

दूषित खून से संक्रमण की आशंका

परिजनों का आरोप है कि बच्चों को दिया गया खून सुरक्षित नहीं था. नियमों के मुताबिक हर ब्लड यूनिट की एचआईवी (HIV), हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B) और हेपेटाइटिस सी (Hepatitis C) की जांच अनिवार्य होती है. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि या तो जांच प्रक्रिया में लापरवाही हुई या इस्तेमाल किए गए टेस्ट किट (Testing Kit) संक्रमण के शुरुआती चरण (Window Period) को पकड़ नहीं पाए.

कई हॉस्पिटलों से आया खून

सूत्रों के अनुसार, बच्चों को केवल सतना जिला हॉस्पिटल ही नहीं, बल्कि रीवा (Rewa) और राज्य के अन्य हॉस्पिटलों से भी रक्त उपलब्ध कराया गया था. इससे यह तय करना मुश्किल हो गया है कि संक्रमण की असली वजह कहां से शुरू हुई. एचआईवी (HIV) की पुष्टि होते ही डोनर ट्रेसिंग (Donor Tracing) की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन गलत मोबाइल नंबर, अधूरे पते और पुराने रिकॉर्ड (Outdated Records) बड़ी बाधा बन रहे हैं. अब तक सिर्फ करीब 50 प्रतिशत रक्तदाताओं से ही संपर्क हो सका है.

पूरे सिस्टम की जांच के आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस (Collector) ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. ब्लड कलेक्शन (Blood Collection), जांच, स्टोरेज (Storage) और रिकॉर्ड मेंटेनेंस (Record Management) तक हर स्तर की जांच के निर्देश दिए गए हैं.

ब्लड बैंक प्रभारी ने दी सफाई

जिला अस्पताल ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. देवेंद्र पटेल (Dr Devendra Patel) का कहना है कि थैलेसीमिया मरीजों को बार-बार ट्रांसफ्यूजन की जरूरत होती है, जिससे जोखिम (Risk Exposure) बढ़ जाता है. उन्होंने बताया कि पहले रैपिड टेस्ट (Rapid Test) का इस्तेमाल होता था, जबकि अब ज्यादा संवेदनशील एलाइजा जांच (ELISA Test) की जा रही है. हालांकि, एलाइजा टेस्ट में भी 20 से 90 दिन का विंडो पीरियड (Window Period) रहता है.

राज्य में बढ़ता HIV खतरा

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) पहले ही चेतावनी दे चुका है कि यदि सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो 2030 तक एड्स उन्मूलन (AIDS Elimination 2030) का लक्ष्य खतरे में पड़ सकता है. आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में HIV संक्रमण दर (HIV Prevalence) में बीते वर्षों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है.

 

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