100 से ज्यादा भारतीय अमेरिका से भेजे गए हैं. इस पर बहुत सी गलत जानकारियां सोशल मीडिया पर डाली गईं. पुरानी और असंबद्ध तस्वीरें शेयर करके झूठे दावे किए गए. डीडब्ल्यू फैक्ट चेक टीम ने कुछ गलत जानकारियों की पड़ताल की है.अमेरिकी सेना का एक विमान 104 प्रत्यर्पित प्रवासियों को लेकर उत्तर भारत में पंजाब के अमृतसर में उतरा. इनमें वे लोग हैं, जो बीते कई सालों में गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में घुसे थे. ये लोग भारत के अलग अलग राज्यों के हैं.
ट्रंप प्रशासन ने अपनी प्रत्यर्पण योजनाओं पर अमल करते हुए मंगलवार सुबह सेना के सी-17 विमान से बिना दस्तावेज वाले भारतीय नागरिकों को रवाना किया. अवैध आप्रवासियों के खिलाफ ट्रंप प्रशासन की ताजा कार्रवाई में पहली बार इतनी दूर लोगों को भेजा गया है. प्रत्यर्पण का मुद्दा भारत के लिए संवेदनशील है. इस घटना ने ऑनलाइन जगत में गलत सूचनाओं की भरमार कर दी है.
हथकड़ी और बेड़ियां लगा कर भारतीयों को विमान से भेजा गया
दावाः एक फेसबुक यूजर ने विमान में हथकड़ियां लगा कर बैठे लोगों की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, "यह दृश्य उस विमान का है जिसमें आप्रवासी भारतीयों को 'आजाद लोगों के देश' से भेजा गया है."
डीडब्ल्यू फैक्ट चेकः गलत
इस तस्वीर में दिख रहे लोग अमेरिका से भेजे गए भारतीय आप्रवासी नहीं हैं. यह एसोसिएटेड प्रेस की 30 जनवरी की तस्वीर है, जिसमें एल पासो, टेक्सस के लोगों को दिखाया गया है, इन्हें ग्वाटेमाला भेजा जाना है. इन लोगों के चेहरों पर काले मास्क हैं और हाथ-पैर में बेड़ियां हैं, लेकिन यह तस्वीर भारतीय लोगों की नहीं है.
हालांकि समाचार एजेंसियों के पास अमृतसर में विमान के उतरने की जो तस्वीरें हैं, उनसे यह साफ नहीं है कि किन परिस्थितियों में भारतीय लोग विमान में सवार हुए या फिर उन्हें इस लंबी यात्रा के दौरान क्या सुविधाएं दी गईं.
पहली बार ट्रंप प्रशासन ने भारत के लोगों के प्रत्यर्पण के लिए सेना के विमान का उपयोग किया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने खबर दी है कि सी-17 सैन्य विमान का अनुमानित खर्च प्रतिघंटे करीब 28,000 अमेरिकी डॉलर है. विमान को अमेरिका से अमृतसर पहुंचने में करीब 24 घंटे का समय लगना था.
अमेरिका से भेजे गए भारतीय लोगों की सिर्फ यही तस्वीर गलत नहीं है. एक और गलत पोस्ट में फेसबुक पर हिंदी में दावा किया गया, "एक अमेरिकी सी-17 विमान इन लोगों को साथ लेकर उड़ा है. यह विमान अगले 24 घंटे में भारत पहुंचेगा."
यह गलत है. यह तस्वीर भी पुरानी है और 23 जनवरी की है. तब प्रत्यर्पण के लिए पहला विमान टकसॉन इंटरनेशनल एयरपोर्ट से ग्वाटेमाला के लिए उड़ा था. यह तस्वीर अमेरिकी वायुसेना ने दी थी और इसे पिक्चर अलायंस जैसी कई एजेंसियों ने मीडिया संस्थानों को मुहैया कराया था.
पुरानी तस्वीरें बिना संदर्भ के शेयर की गईं
दावाः सोशल मीडिया पर दिखाई जा रही इस तस्वीर (अर्काइव किया गया) का दावा है कि इसमें दिख रहे लोग भारतीय हैं जिन्हें अमेरिका से हाल ही में प्रत्यर्पित किया गया है. एक यूजर ने इसे एक्स पर डाला और लिखा, "अवैध भारतीय आप्रवासियों का पहला जत्था अमेरिका से सी-17 ग्लोबमास्टर थ्री सैन्य विमान से भेजा गया है." साथ ही यह भी लिखा, "उनका अमेरिकी सपना अब खत्म हो गया."
डीडब्ल्यू फैक्ट चेकः गलत
यह तस्वीर पुरानी है और ट्रंप प्रशासन के किए भारतीयों के हालिया प्रत्यर्पण की नहीं है. यह तस्वीर दिसंबर, 2023 के आखिर में मुंबई में ली गई थी. तब सैकड़ों भारतीयों को पेरिस से मानव तस्करी के संदेह में वापस भेजा गया था. ये लोग चार्टर्ड विमान से लातिन अमेरिकी देश निकारागुआ जा रहे थे.
भारतीय लोगों के अमेरिका से प्रत्यर्पण के बारे में केवल गलत तस्वीरें ही ऑनलाइन शेयर नहीं की जा रही हैं. कितने लोगों को भारत वापस भेजा जा रहा है, इस संख्या को लेकर भी बहुत चर्चा और उलझन है जिसे लेकर गलत जानकारियां फैलाई जा रही हैं. एक्स पर वायरल हुए एक पोस्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका और कनाडा ने 12 लाख अवैध भारतीय आप्रवासियों को भेजने की मंजूरी दी है. यह संख्या गलत है.
भारत और अमेरिका के बीच प्रत्यर्पण पर लंबे समय से बातचीत हो रही है. ब्लूमबर्ग की खास रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल अमेरिका ने करीब 18,000 बिना दस्तावेजों वाले भारतीयों की पहचान की थी जिन्हें उनके घर भेजा जाना है.
अमेरिका में गैरकानूनी तरीके से घुसने की कोशिश कर रहे 1,100 से ज्यादा भारतीय लोगों को 2023 और 2024 में वापस भेजा गया था. यह काम राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में हुआ था, ट्रंप के सत्ता में आने से पहले. अमेरिका में बिना दस्तावेज के रह रहे भारतीय लोगों की कोई आधिकारिक संख्या जारी नहीं की गई है. हालांकि प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि यह संख्या 725,000 से ज्यादा हो सकती है. इस तरह से मेक्सिको और सल्वाडोर के बाद भारतीय लोगों का समूह इस मामले में तीसरे नंबर पर है.
विमान में सवार होते भारतीय लोगों का वीडियो
दावाः इंस्टाग्राम पर डाले एक वीडियो पोस्ट में दावा किया गया है कि भारतीय आप्रवासी विमान में सवार होते हुए दर्द में थे. हिंदी में डाले पोस्ट में लिखा हैः "चेहरे पर उनके मास्क, हाथ और पैरों में बेड़ियां. भारतीयों को अमेरिका से बेरहमी के साथ भेजा गया."
डीडब्ल्यू फैक्ट चेकः गलत
यह वीडियो भी भारत भेजे जा रहे भारतीय लोगों को नहीं दिखा रहा है, बल्कि यह पहली प्रत्यर्पण उड़ानों का है. यह फुटेज अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के 27 जनवरी को जारी किए एक वीडियो का है. यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन के एजेंट जंजीरों में जकड़े और हथकड़ियां लगाए लोगों को सैन्य विमान में चढ़ा रहे हैं और रक्षा विभाग के मुताबिक इसकी तारीख 23 जनवरी की है. विभाग ने इस उड़ान की मंजिल का ब्यौरा नहीं दिया है.
अवैध आप्रवासियों को अमेरिका से भेजना ट्रंप के चुनावी अभियान का एक प्रमुख वादा था. ब्लूमबर्ग के मुताबिक भारत सरकार ने इस मामले में ट्रंप प्रशासन के साथ सहयोग की इच्छा जताई थी, ताकि कारोबारी संघर्ष से बचा जा सके.
भारत ने बार बार यह दोहराया है कि वह अमेरिका में वैध आप्रवासियों के हितों की रक्षा चाहता है. अमेरिका में भारतीय मूल के करीब 50 लाख लोग पहले से ही रहते हैं. इनके अलावा 50 लाख से ज्यादा लोगों के पास अमेरिका जाने के लिए गैर आप्रवासी वीजा है. इतना ही नहीं, हर साल अमेरिका में दिए जाने वाले एच-1बी वीजा का करीब दो तिहाई हिस्सा भारतीय लोगों को मिलता है.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से ट्रंप के शपथग्रहण के एक दिन बाद मुलाकात की और अनियमित आप्रवासन पर चिंता जताई थी. अमेरिकी विदेश विभाग की प्रेस विज्ञप्ति में इसकी जानकारी दी गई.
भारत ने अपनी तरफ से बिना दस्तावेज वाले आप्रवासियों को वापस लेने की इच्छा जताई है. जयशंकर ने बाद में कहा, "हमारी हमेशा से यह राय रही है कि अगर कोई भी हमारा नागरिक यहां कानूनी रूप से नहीं है, अगर हम जानते हैं कि वे हमारे नागरिक हैं, तो हम हमेशा इस बात के लिए तैयार हैं कि वे कानूनी तौर पर भारत लौटें."













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