Extortion Case Against Wife: पत्नी ने दूसरी शादी के बाद किया ये गंदा काम तो दर्ज हो सकता है फिरौती का मामला

बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुणे की एक महिला के खिलाफ दर्ज जबरन वसूली (फिरौती) की FIR को रद्द करने से इनकार कर दिया है. महिला ने पहली शादी के कानूनी रूप से कायम रहते हुए दूसरी शादी की और फिर कानून का दुरुपयोग कर दूसरे पति से गुजारा भत्ता (Alimony) की मांग की.

Bombay HC

Bombay HC on Extortion Case Against Wife: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई महिला अपनी पहली शादी के कानूनी रूप से वैध रहते हुए दूसरी शादी करती है और फिर कानून का गलत इस्तेमाल कर दूसरे पति से गुजारा भत्ता (Alimony) मांगती है, तो उसके खिलाफ जबरन वसूली या फिरौती (Extortion) का आपराधिक मामला चलाया जा सकता है. अदालत ने पुणे की रहने वाली एक महिला के खिलाफ दर्ज ऐसी ही एक FIR को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया है.

बॉम्बे हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाई कोर्ट के एकल पीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजितसिंह भोंसले (Justice Ranjitsinha Bhonsale) ने मामले की सुनवाई करते हुए 10 जून को अपना फैसला सुनाया. अदालत ने नोट किया कि याचिकाकर्ता महिला ने सितंबर 2015 में दूसरी शादी की थी. उस वक्त उसकी पहली शादी कानूनी तौर पर समाप्त नहीं हुई थी और उसका पहला विवाह अस्तित्व में था.  यह भी पढ़े:  बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश: आवारा कुत्तों को खिलाना है तो अपने घर में खिलाएं, कहीं बाहर नहीं

बॉम्बे HC का बड़ा फैसल

न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि पहली शादी के रहते हुए की गई दूसरी शादी कानूनी तौर पर अमान्य (Void) है. ऐसी स्थिति में कानून का सहारा लेकर दूसरे पति से गुजारा भत्ता या वित्तीय लाभ की मांग करना सीधे तौर पर जबरन वसूली के दायरे में आ सकता है. इसलिए महिला के खिलाफ दर्ज आपराधिक शिकायत को शुरुआती स्तर पर ही रद्द नहीं किया जा सकता.

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद पुणे से जुड़ा हुआ है, जहां महिला के दूसरे पति ने उसके खिलाफ धोखाधड़ी और फिरौती की शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायतकर्ता (दूसरे पति) का आरोप है कि महिला ने अपनी पिछली शादी की बात छिपाकर उनसे शादी रचाई. शादी के कुछ समय बाद महिला ने अलग होने की धमकी दी और कानून का अनुचित लाभ उठाते हुए भारी-भरकम गुजारा भत्ते की मांग शुरू कर दी.

जब दूसरे पति को महिला की पहली शादी के बारे में पता चला, तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद महिला ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) को रद्द कराने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया.

कोर्ट का रुख: कानून का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं

अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर जोर दिया कि वैवाहिक विवादों से जुड़े कानूनों को महिलाओं के संरक्षण के लिए बनाया गया है, न कि किसी को आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने या अवैध वसूली करने के लिए. पीठ ने कहा कि चूंकि प्रथम दृष्टया महिला द्वारा तथ्यों को छिपाने और दूसरे पक्ष पर वित्तीय दबाव बनाने के सबूत मिले हैं, इसलिए पुलिस को इस मामले की पूरी जांच करने का पूरा अधिकार है. कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब महिला को ट्रायल कोर्ट में आपराधिक मुकदमे का सामना करना पड़ेगा.

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