इस दिवाली पटाखों की बिक्री 40% घटी, बाजारों में छाई मंदी
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पटाखों की बिक्री और उसे जलाने पर कड़े नियम लागू किए जाने के कारण देश के 20,000 करोड़ रुपये के पटाखा कारोबार पर असर पड़ा है और दिवाली के दौरान बिक्री में 40 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.
कोलकाता: सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पटाखों की बिक्री और उसे जलाने पर कड़े नियम लागू किए जाने के कारण देश के 20,000 करोड़ रुपये के पटाखा कारोबार पर असर पड़ा है और दिवाली के दौरान बिक्री में 40 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. पटाखा निर्माताओं ने केंद्र सरकार से 'हरित पटाखे' के निर्माण के लिए दिशानिर्देश जारी करने और समग्र नीति लागू करने की मांग की है.
कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, "पटाखों का देश भर में सालाना 20,000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है. इस साल बिक्री में पिछले साल की तुलना में 40 फीसदी की गिरावट आई है. हम सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हैं. यह पर्यावरण के लिए अच्छा है, लेकिन बाजार में मंदी छा गई है."
उन्होंने कहा कि पटाखे का कारोबार मौसमी होता है और दिवाली के दौरान ही 80 फीसदी सालाना बिक्री होती है.
उन्होंने कहा, "इस उद्योग से लाखों लोग जुड़े हैं, जिनकी आजीविका प्रभावित हुई है."
उन्होंने कहा कि पटाखा निर्माता और व्यापारी सर्वोच्च न्यायालय से इस साल छूट देने की भी मांग की थी.
खंडेलवाल के सुर में सुर मिलाते हुए सारा बंगला आतिशबाजी उन्नयन समिति के अध्यक्ष बाबला राय ने आईएएनएस को बताया, "पटाखा जलाने के लिए दो घंटे का वक्त दिया गया है. इतने कड़े नियम के कारण हमारी बिक्री में 40 फीसदी की कमी आई है."
अदालत ने हालांकि अपने आदेश में कहा कि यह दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों के लिए ही है और बाकी देश पर लागू नहीं होता है.
खंडेलवाल ने कहा, "दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में सर्वोच्च न्यायालय के हरित पटाखा के आदेश के कारण 500 करोड़ रुपये का स्टॉक बेकार हो गया है. इतने कम समय में हम इसे बेचने के लिए दूसरे राज्य भी नहीं ले जा सकते हैं, न ही हम इसे हरित उत्पाद बना सकते हैं, क्योंकि सरकार की तरफ से अभी तक हरित पटाखों की परिभाषा ही नहीं बताई गई है."
(The above story first appeared on LatestLY on Nov 07, 2018 02:43 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

