8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग से पहले उठी महंगाई भत्ते को बेसिक सैलरी में मिलाने और न्यूनतम वेतन ₹69,000 करने की मांग
8वें वेतन आयोग के गठन की चर्चाओं के बीच केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने महंगाई भत्ते को बेसिक सैलरी में मिलाने, न्यूनतम वेतन बढ़ाने और इन्फ्लेशन-लिंक्ड वेज मॉडल लागू करने की मांग तेज कर दी है. कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान 60% डीए को ध्यान में रखते हुए मूल वेतन में संशोधन किया जाना चाहिए.
नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) (DA) में बढ़ोतरी किए जाने के बाद अब सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के विभिन्न संगठनों ने 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के समक्ष अपनी प्रमुख मांगें रखनी शुरू कर दी हैं. कर्मचारी यूनियनों ने महंगाई भत्ते को मूल वेतन (Basic Salary) में मिलाने, न्यूनतम वेतन बढ़ाने और महंगाई पर आधारित नई गणना प्रणाली (Cost-of-Living Index) लागू करने की मांग की है.
गौरतलब है कि अप्रैल में केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ते में 2 प्रतिशत की वृद्धि की थी, जिससे डीए मूल वेतन के 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया था. यह वृद्धि 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी गई थी, जिससे लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों को लाभ पहुंचा था. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों को मिलेगी पुरानी पेंशन योजना? राज्यसभा में केंद्र सरकार ने साफ किया रुख
डीए को बेसिक सैलरी में विलय करने की मांग
कर्मचारी संगठनों की सबसे प्रमुख मांगों में से एक है कि 50 प्रतिशत से अधिक हो चुके महंगाई भत्ते का आधिकारिक रूप से मूल वेतन में विलय (DA Merger) कर दिया जाए.
7वें वेतन आयोग की सिफारिशों में यह उल्लेख था कि जब डीए 50 प्रतिशत की सीमा को पार कर जाए, तो उसे मूल वेतन में शामिल करने पर विचार किया जा सकता है. चूंकि वर्तमान में डीए 60 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, इसलिए कर्मचारी समूह इसका विलय चाहते हैं. डीए के मूल वेतन में विलय होने से भविष्य निधि (PF), पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य भत्तों की राशि में सीधा इजाफा होगा.
इन्फ्लेशन-लिंक्ड मॉडल और ₹69,000 न्यूनतम वेतन का प्रस्ताव
नेशनल काउंसिल - जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) और ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष सिफारिश रखी है कि वेतन ढांचे को सीधे महंगाई दर से जोड़ा जाना चाहिए.
- न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी: NC-JCM और AIDEF दोनों ने वर्तमान न्यूनतम वेतन ₹18,000 प्रति माह को बढ़ाकर ₹69,000 प्रति माह करने का प्रस्ताव दिया है.
- महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन की मांग: इस संगठन ने न्यूनतम वेतन ₹65,000 प्रति माह करने और डीए के 50 प्रतिशत हिस्से को मूल वेतन में तुरंत मिलाने की मांग की है.
डीए की गणना फॉर्मूले में बदलाव की सिफारिश
कर्मचारी फेडरेशन (AIDEF) ने मौजूदा 'ऑल-इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स' (AICPI-IW) आधारित फॉर्मूले में बदलाव की मांग की है.
संगठन का तर्क है कि वर्तमान इंडेक्स में कई स्थिर मदों को अधिक वजन दिया जाता है, जबकि निम्न आय वर्ग के कर्मचारियों का बड़ा खर्च खाद्य पदार्थों, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और मकान किराए जैसी बुनियादी जरूरतों पर होता है. इसलिए, कर्मचारियों के वास्तविक जीवन-यापन खर्च को दर्शाने वाला नया सूचकांक तैयार किया जाना चाहिए.
विभिन्न राज्यों और बैंकिंग क्षेत्र में डीए में बढ़ोतरी
केंद्र सरकार के फैसले के बाद कई राज्य सरकारों और स्वायत्त निकायों ने भी अपने कर्मचारियों के भत्तों में संशोधन किया है:
- बैंकिंग क्षेत्र (IBA): इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने मई से जुलाई 2026 की अवधि के लिए कर्मचारियों के मूल वेतन और डीए में संशोधन की घोषणा की.
- भारतीय रेलवे: रेलवे ने भी अपने कर्मचारियों के लिए 2 प्रतिशत डीए वृद्धि को मंजूरी दी.
- राज्य सरकारें: उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा, असम और अरुणाचल प्रदेश ने डीए 2 प्रतिशत बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया. पश्चिम बंगाल ने डीए बढ़ाकर 38 प्रतिशत किया, जबकि बिहार और महाराष्ट्र सरकार ने भी अपने कर्मचारियों के लिए बकाया (Arrears) व डीए में वृद्धि की घोषणा की.
वर्तमान में कर्मचारी और पेंशनभोगी 2026 की दूसरी छमाही के लिए संभावित 3 से 4 प्रतिशत की अगली डीए वृद्धि का इंतजार कर रहे हैं, जो श्रम ब्यूरो द्वारा जारी होने वाले जून 2026 के AICPI-IW आंकड़ों पर निर्भर करेगा.