Bihar Voter ID Card: बिहार में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत में चुनौती दी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए हामी भर दी है. अब यह मामला 10 जुलाई, गुरुवार को अदालत में सुना जाएगा. याचिका में आरोप है कि ECI का यह कदम लाखों मतदाताओं को वोट देने के अधिकार से वंचित कर सकता है. इनमें दलित, आदिवासी, मुसलमान और प्रवासी मजदूर शामिल हैं. याचिकाकर्ताओं में आरजेडी, कांग्रेस और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) जैसे संगठन शामिल हैं.
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विपक्ष ने अपनी दलील में क्या कहा?
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और एएम सिंहवी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यह प्रक्रिया "जल्दबाजी और असंवेदनशीलता" से भरी है. उन्होंने कहा कि इतनी कम समयसीमा में 8 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन करना असंभव है.
ADR ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग ने यह फैसला बिना किसी ठोस योजना और व्यवहारिक सोच के लिया है. उन्होंने कहा कि जिन दस्तावेजों को SIR में अनिवार्य किया गया है, जैसे नागरिकता के सबूत, उन्हें आम लोग इतनी जल्दी जुटा ही नहीं सकते.
तेजस्वी यादव ने EC से पूछा सवाल
इस मुद्दे को लेकर तेजस्वी यादव पहले ही चुनाव आयोग से मिल चुके हैं. उन्होंने कहा, "जब मेरी पत्नी का वोटर कार्ड आधार के जरिए बना, तो अब उसी आधार को मान्य दस्तावेज क्यों नहीं माना जा रहा?"
उन्होंने यह भी पूछा कि जो लोग बिहार से बाहर हैं, उन्हें वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन के लिए कैसे बुलाया जाएगा?
SC ने केंद्र और EC से मांगा जवाब
आज की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से कहा है कि 10 जुलाई की सुनवाई से पहले वे याचिका की कॉपी प्राप्त कर अपना जवाब तैयार करें.
अब पूरे प्रदेश की नजर सुप्रीम कोर्ट की 10 जुलाई की सुनवाई पर है. अगर कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप करता है, तो बिहार में चुनावी प्रक्रिया की दिशा बदल सकती है.













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