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Delhi Digital Arrest Case: दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने डिजिटल अरेस्ट रैकेट का भंडाफोड़ किया, तीन गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की साइबर सेल ने एक बड़े डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. यह कार्रवाई इंस्पेक्टर शिव राम के नेतृत्व में और एसीपी साइबर सेल अनिल कुमार की निगरानी में की गई.

Delhi Digital Arrest Case: दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने डिजिटल अरेस्ट रैकेट का भंडाफोड़ किया, तीन गिरफ्तार
(प्रतिकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली, 7 अक्टूबर : दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की अपराध शाखा की साइबर सेल ने एक बड़े डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी रैकेट(Digital Arrest Fraud Racket) का पर्दाफाश किया है, जिसमें तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. यह कार्रवाई इंस्पेक्टर शिव राम के नेतृत्व में और एसीपी साइबर सेल अनिल कुमार की निगरानी में की गई. इस रैकेट ने 80 वर्ष से अधिक उम्र के एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी से करीब 42.49 लाख रुपए की ठगी मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर की.

इस गिरफ्तारी से संगठित साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जो देशभर में लोगों को निशाना बना रहा था. घटना तब सामने आई, जब पीड़ित को कुछ व्हाट्सएप नंबरों से कॉल आए, जिसमें कॉलर ने खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई का अधिकारी बताया. उन्होंने पीड़ित पर झूठा आरोप लगाया कि वह संदिग्ध वित्तीय लेनदेन में शामिल है और उस पर स्पष्टीकरण पत्र और निजी जानकारी देने के लिए दबाव डाला गया. जांच में पता चला कि ठगी की रकम को कई बैंक खातों में डाला गया, जिसमें से 8.49 लाख रुपए की राशि ट्रेस की गई. शेष रकम का भी पता लगाया जा रहा है. यह भी पढ़ें: डबल इंजन सरकार के झूठे दावों में नहीं आने वाली बिहार की जनता; प्रियंका चतुर्वेदी

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान महेंद्र कुमार वैष्णव (37), विशाल कुमार (25) और श्याम दास (25) के रूप में हुई. तीनों राजस्थान के पाली के रहने वाले हैं.जांच में सामने आया कि महेंद्र ने अपने बैंक खाते को अंतरराज्यीय साइबर गिरोहों को 10,000 रुपए प्रति खाते की दर से उपलब्ध कराया था. इसके लिए उसने चेकबुक, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स भी सौंप दिए, जिसका इस्तेमाल ठगी में हुआ. जांच में 8 प्राथमिक बैंक खातों की पहचान हुई, जिसमें महेंद्र का खाता मुख्य रूप से ठगी के लिए इस्तेमाल हुआ. वित्तीय विश्लेषण से पता चला कि उसे हर खाते के लिए मासिक 10,000 रुपए का भुगतान होता था. पुलिस उपायुक्त आदित्य गौतम ने बताया कि आगे की जांच जारी है और अन्य संदिग्धों का पता लगाया जा रहा है.

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 07, 2025 05:18 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).