यौन अपराधों के लिए दोषसिद्धि 'फरलो' से इनकार करने का आधार नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि यौन अपराध करने के लिए दोषसिद्धि किसी कैदी को 'फरलो' का लाभ देने से इनकार करने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए.
नई दिल्ली, 8 नवंबर : दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि यौन अपराध करने के लिए दोषसिद्धि किसी कैदी को 'फरलो' का लाभ देने से इनकार करने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए. न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि यौन अपराधों के दोषी व्यक्तियों को गलत आधार पर 'फरलो' (यानी थोड़े दिन की छुट्टी का) लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता है, जिसके लिए वे अन्यथा पात्र हैं. दोषी गोपी निशा मल्लाह ने 4 सितंबर को दिल्ली सरकार द्वारा जारी एक आदेश को रद्द करने की मांग की थी, जिसने छुट्टी के उनके अनुरोध को खारिज कर दिया था.
अदालत ने मल्लाह को 21 दिन की छुट्टी दे दी. उसे पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया था और 2018 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. छुट्टी के लिए उसका अनुरोध परिवार और दोस्तों के साथ सामाजिक संबंध बनाए रखने की जरूरत पर आधारित था. अदालत ने मल्लाह के नाममात्र रोल को ध्यान में रखा, जिससे संकेत मिलता है कि वह लगभग 9 साल और 7 महीने तक न्यायिक हिरासत में रहा था, जिसमें 1 साल और 8 महीने की छूट अर्जित की गई थी. यह भी पढ़ें : राजस्थान चुनाव: लूनी से कई बार किस्मत आजमाने वाले प्रेम सिंह इस बार टिकट नहीं मिलने से निराश
अदालत ने यह भी कहा कि मल्लाह को पहले मुकदमे के दौरान अंतरिम जमानत और पैरोल दी गई थी. स्वतंत्रता के दुरुपयोग या देर से आत्मसमर्पण की शिकायतों की कोई रिपोर्ट नहीं थी. न्यायमूर्ति शर्मा ने आगे कहा कि पिछले एक साल में जेल में मल्लाह का आचरण और साथ ही उसका समग्र व्यवहार संतोषजनक रहा है, कदाचार का कोई मामला सामने नहीं आया है. इन परिस्थितियों को देखते हुए, अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि याचिकाकर्ता के परिवार और दोस्तों के साथ सामाजिक संबंध बनाए रखने के लिए छुट्टी के अनुरोध को अस्वीकार नहीं किया जाना चाहिए. नतीजतन, अदालत ने याचिका स्वीकार कर ली और प्रतिवादी द्वारा जारी 4 सितंबर के आदेश को रद्द कर दिया.
(The above story first appeared on LatestLY on Nov 08, 2023 05:21 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

