Constitution Amendment Bill 2025: गिरफ्तार PM, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को 30 दिन बाद पद से हटाने वाले बिल पर संसदीय समिति की रिपोर्ट टली, होगी और चर्चा
संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने बैठक के बाद बताया कि मसौदा रिपोर्ट को फिलहाल लंबित रखा गया है. उन्होंने कहा कि समिति के सभी सदस्यों की राय थी कि इतने व्यापक प्रभाव वाले विधेयक पर अंतिम निर्णय लेने से पहले और अधिक चर्चा जरूरी है.
Constitution (130th Amendment) Bill 2025 Update: संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) से पहले शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 (Constitution (One Hundred and Thirtieth Amendment) Bill, 2025) पर विचार कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने अपनी मसौदा रिपोर्ट को अपनाने का फैसला फिलहाल टाल दिया है. यह विधेयक गंभीर आपराधिक मामलों में 30 दिनों तक जेल में रहने वाले प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और केंद्रीय व राज्य मंत्रियों को पद से हटाने के लिए कानूनी व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव देता है. समिति ने कहा कि इस मुद्दे पर और अधिक विचार-विमर्श तथा विभिन्न पक्षों से परामर्श की आवश्यकता है. यह भी पढ़ें: Parliament Monsoon Session 2026: मानसून सत्र में पेश हो सकते हैं 7 बड़े विधेयक, FCRA संशोधन और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल पर रहेगी नजर
संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने बैठक के बाद बताया कि मसौदा रिपोर्ट को फिलहाल लंबित रखा गया है. उन्होंने कहा कि समिति के सभी सदस्यों की राय थी कि इतने व्यापक प्रभाव वाले विधेयक पर अंतिम निर्णय लेने से पहले और अधिक चर्चा जरूरी है.
समिति के अनुसार, 13 मई और 30 जून 2026 को कुल 27 राजनीतिक दलों को सुझाव देने के लिए पत्र भेजे गए थे. इनमें से पांच दलों ने अपने सुझाव भेजे, लेकिन समिति की बैठक में शामिल नहीं हुए. सरकार का उद्देश्य इस महत्वपूर्ण विधेयक पर सभी राजनीतिक दलों को साथ लेकर आगे बढ़ना है.
विपक्षी दल इस संविधान संशोधन विधेयक का लगातार विरोध कर रहे हैं. विपक्षी सदस्यों का कहना है कि किसी जनप्रतिनिधि के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया केवल कार्यपालिका के आधार पर नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें न्यायपालिका की भी अहम भूमिका होनी चाहिए. उनका यह भी तर्क है कि प्रस्तावित "निलंबन" (Suspension) प्रावधान में कई कानूनी और संवैधानिक खामियां हैं.
सूत्रों के मुताबिक, समिति की मसौदा रिपोर्ट में "पद से हटाने" (Removal) की जगह "निलंबन" (Suspension) शब्द इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया था. इसके अलावा "गंभीर आपराधिक अपराध" की स्पष्ट परिभाषा तय करने की भी सिफारिश की गई थी. प्रस्ताव के अनुसार, ऐसे अपराध जिन्हें पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा हो सकती है, उन्हें गंभीर आपराधिक अपराध माना जा सकता है. मसौदे में मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष या फास्ट-ट्रैक अदालतों और जमानत मिलने पर स्वत: पद बहाली (Automatic Reversal Clause) का भी सुझाव शामिल बताया गया है.
यह विधेयक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अगस्त 2025 में लोकसभा में पेश किया था. विधेयक के अनुसार यदि किसी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को किसी गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया जाता है और वह 30 दिनों के भीतर जमानत नहीं प्राप्त कर पाता, तो 31वें दिन उसे पद से हटाया जा सकता है या वह अपने पद का दायित्व निभाने के लिए कानूनी रूप से अयोग्य हो जाएगा. वहीं बाद में अदालत से जमानत मिलने पर उसे दोबारा पद संभालने की अनुमति देने का भी प्रावधान प्रस्तावित किया गया है.
हालांकि संसदीय समिति द्वारा रिपोर्ट को फिलहाल स्थगित किए जाने के बाद यह स्पष्ट नहीं है कि यह विधेयक संसद के मौजूदा मानसून सत्र में पेश किया जाएगा या नहीं. अब समिति आगे विभिन्न हितधारकों और राजनीतिक दलों से चर्चा के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगी.