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Crypto की चोरी: कौन है सॉफ्टवेयर इंजीनियर Rahul Agarwal? जिसने CoinDCX को लगाया ₹384 करोड़ का चूना

बेंगलुरु के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर राहुल अग्रवाल को उसकी ही कंपनी CoinDCX से ₹384 करोड़ की क्रिप्टो चोरी में गिरफ्तार किया गया है. यह चोरी कथित तौर पर उसके कंपनी लैपटॉप को हैक करके की गई थी, जिसके माध्यम से हैकर्स ने मुख्य सर्वर तक पहुंच बनाई. राहुल ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उसे एक अनजान व्हाट्सएप कॉल के ज़रिए फंसाया गया है.

Crypto की चोरी: कौन है सॉफ्टवेयर इंजीनियर Rahul Agarwal? जिसने CoinDCX को लगाया ₹384 करोड़ का चूना
CoinDCX इंजीनियर राहुल अग्रवाल क्रिप्टो चोरी के आरोप में गिरफ्तार (Photo : X)

CoinDCX Engineer Rahul Agarwal Arrested: बेंगलुरु पुलिस ने एक 30 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर को लगभग ₹384 करोड़ (44 मिलियन डॉलर) की क्रिप्टोकरेंसी चोरी (Crypto Heist) के मामले में गिरफ्तार किया है. इस इंजीनियर का नाम राहुल अग्रवाल है और वह क्रिप्टो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म CoinDCX में ही काम करता था. उसे 26 जुलाई को बेंगलुरु की व्हाइटफील्ड सीईएन क्राइम पुलिस ने हिरासत में लिया.

मामला क्या है?

19 जुलाई की सुबह, CoinDCX कंपनी को पता चला कि उनके सिस्टम में किसी ने घुसपैठ की है. कंपनी के वाइस-प्रेजिडेंट हरदीप सिंह ने बताया कि पहले थोड़ी मात्रा में क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसफर हुई. लेकिन सुबह 9:40 बजे तक, चोरों ने कुल ₹384 करोड़ की डिजिटल संपत्ति चुराकर छह अलग-अलग क्रिप्टो वॉलेट में भेज दी.

कर्मचारी पर शक कैसे हुआ?

जब कंपनी ने अपनी जांच शुरू की, तो पता चला कि राहुल अग्रवाल को दिए गए कंपनी लैपटॉप की सुरक्षा के साथ छेड़छाड़ हुई थी. ऐसा लगता है कि हैकर ने इसी लैपटॉप के ज़रिए CoinDCX के मुख्य सर्वर तक पहुंचने का रास्ता बना लिया. यह पता चलने के बाद, पुलिस ने राहुल का लैपटॉप ज़ब्त कर लिया और उसे पूछताछ के लिए ले गई.

राहुल अग्रवाल मूल रूप से उत्तराखंड के हरिद्वार का रहने वाला है और बेंगलुरु में रहता है. उसने चोरी में शामिल होने से साफ़ इनकार कर दिया है. हालांकि, उसने यह माना कि वह कुछ प्राइवेट क्लाइंट्स के लिए अलग से काम कर रहा था, जिनके बारे में उसे ज़्यादा जानकारी नहीं थी. जांच में पुलिस को राहुल के बैंक खाते में एक अज्ञात सोर्स से आए ₹15 लाख का एक संदिग्ध डिपॉज़िट भी मिला है.

राहुल ने अपनी सफाई में क्या कहा?

राहुल ने पुलिस को बताया कि उसे एक जर्मन नंबर से व्हाट्सएप पर कॉल आया था, जिसमें उसे कुछ फाइलें पूरी करने के लिए कहा गया. राहुल का कहना है कि हो सकता है कि इन्हीं में से कोई एक फाइल हैकर का जाल हो, जिससे उसके काम करने वाले सिस्टम में घुसपैठ की गई. उसने कहा कि उसे चोरी के बारे में तब तक पता नहीं चला, जब तक कंपनी ने उससे संपर्क नहीं किया.

CoinDCX ने कहा है कि वे इस बड़ी चोरी की जांच में पुलिस और साइबर क्राइम एक्सपर्ट्स का पूरा सहयोग कर रहे हैं.

क्या ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी सुरक्षित नहीं है?

ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा में काफ़ी तरक्की के बावजूद, इस तरह की बड़ी चोरियां एक लगातार बना रहने वाला खतरा हैं. डिजिटल संपत्ति का विकेंद्रीकृत (Decentralised) होना और अक्सर गुमनाम रहना इसे शातिर साइबर अपराधियों के लिए एक आकर्षक टारगेट बनाता है. ये अपराधी हमेशा क्रिप्टो एक्सचेंज, हॉट वॉलेट और यहां तक कि कर्मचारियों के सिस्टम में कमजोरियों की तलाश में रहते हैं.

भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर नियम-कानून अभी बन ही रहे हैं. CoinDCX जैसी चोरी की घटनाएं अक्सर इस मांग को और तेज़ कर देती हैं कि देश में डिजिटल संपत्ति के लिए कड़े नियम, ग्राहकों की बेहतर सुरक्षा और सभी क्रिप्टो एक्सचेंज के लिए मज़बूत साइबर सुरक्षा मानक होने चाहिए.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 03, 2025 11:12 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).