CJP Protest: कॉकरोच जनता पार्टी का बड़ा ऐलान, जंतर-मंतर के बाद 11 जून को पुणे यूनिवर्सिटी में होगा प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उठेगी मांग
सोशल मीडिया पर तेजी से उभरी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दिल्ली के जंतर-मंतर के बाद अब 11 जून को महाराष्ट्र के पुणे में बड़े प्रदर्शन का एलान किया है. संगठन ने नीट (NEET) जैसी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है.
Cockroach Janta Party Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद, अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने महाराष्ट्र की शैक्षणिक राजधानी कहे जाने वाले पुणे में अपना अगला मोर्चा खोलने का एलान किया है. संगठन द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन 11 जून को शाम 4 बजे प्रतिष्ठित सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी (SPPU) के परिसर में आयोजित किया जाएगा. इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करना है.
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट
कॉकरोच जनता पार्टी के इस नए एलान ने इंटरनेट पर काफी ध्यान आकर्षित किया है. सीजेपी ने अपने आधिकारिक पोस्ट में लिखा कि महाराष्ट्र की शैक्षणिक राजधानी पुणे में 'कॉकरोच' शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करेंगे. इसके साथ ही पोस्ट में पूछा गया कि पुणे के कितने 'कॉकरोच' इस आंदोलन में शामिल होने जा रहे हैं. यह भी पढ़े: Cockroach Politics: सोशल मीडिया से सड़कों तक पहुंची ‘कॉकरोच पॉलिटिक्स’, यूथ कांग्रेस ने लॉन्च किया ‘इंडियन यूथ कॉकरोचेस’ अभियान, CJP और सरकार पर साधा निशाना
इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने लिखा कि चलो पुणे में मिलते हैं! जय महाराष्ट्र! इस आक्रामक और व्यंग्यात्मक भाषा के चलते युवाओं और छात्रों के बीच इस आगामी प्रदर्शन को लेकर खासी चर्चा शुरू हो गई है.
देखें पोस्ट
दिल्ली के जंतर-मंतर प्रदर्शन का अगला चरण
पुणे में होने वाला यह प्रदर्शन असल में 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन का ही अगला हिस्सा है. दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान सीजेपी के प्रवक्ताओं ने केंद्र सरकार को सात दिन का अल्टीमेटम दिया था. उन्होंने कहा था कि यदि शिक्षा मंत्री स्वेच्छा से इस्तीफा नहीं देते या उन्हें पद से नहीं हटाया जाता, तो यह आंदोलन देशव्यापी रूप ले लेगा.
पुणे के इस कार्यक्रम को उसी राष्ट्रीय रणनीति के पहले कदम के रूप में देखा जा रहा है. संगठन का दावा है कि नीट-यूजी (NEET-UG) और अन्य प्रमुख परीक्षाओं में हुई कथित धांधलियों ने देश के लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है और इसके लिए सीधे तौर पर मंत्रालय जवाबदेह है.
विरोध स्थल के रूप में पुणे यूनिवर्सिटी का महत्व
सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी (SPPU) को विरोध प्रदर्शन के लिए चुनना रणनीतिक माना जा रहा है. यह यूनिवर्सिटी न केवल महाराष्ट्र बल्कि देश के सबसे प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में से एक है. ऐतिहासिक रूप से भी यह परिसर छात्र आंदोलनों और नागरिक प्रदर्शनों का एक प्रमुख केंद्र रहा है.
चूंकि पुणे को एक बड़ा एजुकेशनल हब माना जाता है, जहां देश भर से लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के लिए आते हैं, इसलिए संगठन को यहां बड़े पैमाने पर युवाओं का समर्थन मिलने की उम्मीद है. हालांकि, यूनिवर्सिटी प्रशासन या स्थानीय पुलिस की ओर से इस प्रदर्शन की अनुमति को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.