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Chhattisgarh: देशव्यापी संकट के बावजूद छत्तीसगढ़ में घटी बेरोजगारी दर, CM भूपेश बघेल की मेहनत लाई रंग

देशव्यापी संकट के बावजूद छत्तीसगढ़ में घटी बेरोजगारी दर

Chhattisgarh: देशव्यापी संकट के बावजूद छत्तीसगढ़ में घटी बेरोजगारी दर, CM भूपेश बघेल की मेहनत लाई रंग
सीएम भूपेश बघेल (Photo Credits: PTI)

रायपुर: देशव्यापी मंदी के बीच छत्तीसगढ़ ने अपने आर्थिक उपायों से राज्य में बेरोजागरी दर को लगातार नियंत्रित रखने में सफलता पाई है. माह नवंबर में छत्तीसगढ़ में बेरोजारी दर 3.5 प्रतिशत दर्ज की गई, जो राष्ट्रीय दर 6.51 प्रतिशत की तुलना में 3.01 प्रतिशत कम है। राज्य में सितंबर 2018 में बेरोजगारी दर 22.2 प्रतिशत थी. कोरोना संकट और लॉकडाउन के बावजूद छत्तीसगढ़ में इसमें लगातार कमी आई. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआई) द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ का आंकड़ा हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, आंध्रप्रदेश, असम, बिहार, गोवा, झारखंड, केरल, मध्यप्रदेश,पंजाब, राजस्थान, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की तुलना में बहुत कम है.

लॉकडाउन के दौरान देश में औद्योगिक गतिविधियां ठप हो गई थीं, जिसका देश की अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ा था.इसी दौरान राज्य की भूपेश बघेल सरकार ने छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए रणनीति तैयार कर काम शुरु किया। लॉकडाउन के दौरान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत ग्रामीणों को रोजगार देने में छत्तीसगढ़ अव्वल रहा. उस अवधि में कृषि और उससे जुड़ी सराहना की थी। इसी दौरान वनोपज संग्राहकों को भी राज्य शासन ने राहत दी.लॉकडाउन के दौरान देश में कुल संग्रहित लघु-वनोपजों का 73 प्रतिशत छत्तीसगढ़ में संग्रहित किया गया. गतिविधियों पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया. यह भी पढ़े: छत्तीसगढ़: भूपेश बघेल ‘थैंक्यू सीएम’ कार्यक्रम में हुए शामिल, सरकार की योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री को कहा धन्यवाद

आरबीआई ने भी छत्तीसगढ़ में किए जा रहे प्रयासों की लघु-वनोपजों की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने वाले लघु-वनोपजों की संख्या 07 से बढ़ाकर 52 कर दी गई. जुलाई माह में जबकि दिल्ली, पांडुचेरी, राजस्थान, गोवा जैसे राज्यों में बेरोजगारी दर बढ़ रही थी, तब छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर जून माह के 14.4 प्रतिशत से घटकर 9 प्रतिशत के स्तर पर आ गई थी.

छत्तीसगढ़ में अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में औद्योगिक गतिविधियां प्रारंभ हो गई थीं। कोरोना की रोकथाम और बचाव के उपायों के साथ राज्य की औद्योगिक इकाईयों ने उत्पादन शुरु कर दिया था। राजीव गांधी किसान न्याय योजना सहित किसान हितैषी योजनाओं तथा जनकल्याणकारी फैसलों से भी उत्साहजनक वातावरण बना। गोधन न्याय योजना शुरु होने तथा गौठानों में आजीविका संबंधी गतिविधियों में तेजी आने से भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली.

सितंबर माह में छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर घटकर मात्र दो प्रतिशत रह गई थी, जोकि देश में असम के बाद सबसे कम बेरोजगारी दर थी। अनलॉक होते ही छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था ने गति पकड़ ली थी, राज्य में जीएसटी कलेक्शन में अच्छी वृद्धि हुई.  ऑटो मोबाइल, एग्रीकल्चर समेत सभी सेक्टरों में तेजी आती गई.  सितंबर माह में देश में अव्वल रहने वाला असम नवंबर माह में फिसल कर छत्तीसगढ़ के बाद के क्रम में आ गया.

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआई) द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक नवंबर माह में आंध्र प्रदेश में बेरोजगारी दर 6.0, असम में 4.0, बिहार में 10.0, दिल्ली में 6.6, गोवा में 15.9, गुजरात में 3.9, हरियाणा में 25.6, हिमाचल प्रदेश में 13.8, जम्मू-कश्मीर में 8.6, झारखंड में 9.6, केरल में 5.8, मध्यप्रदेश में 4.4, पंजाब में 7.6, राजस्थान में 18.6, त्रिपुरा में 13.1, उत्तरप्रदेश में 5.2 तथा पश्चिम बंगाल में 11.2 प्रतिशत रही। जबकि कर्नाटक में 1.9, महाराष्ट्र में 3.1, मेघालय में 1.1, ओडिशा में 1.7, पांडुचेरी में 2.2, सिक्किम में 1.9, तमिलनाडु में 1.1, तेलंगाना में 1.5 था उत्तराखंड में 1.5 प्रतिशत दर्ज की गई.

(The above story first appeared on LatestLY on Dec 30, 2020 09:06 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).