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Bihar Caste Based Census: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में जाति आधारित जनगणना के खिलाफ याचिकाओं पर विचार करने से किया इनकार

याचिका में दावा किया गया कि 6 जून, 2022 की अधिसूचना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करती है, जो कानून के समक्ष समानता और कानून की समान सुरक्षा प्रदान करता है. याचिका में दावा किया गया है, इस विषय पर कानून के अभाव में राज्य सरकार कार्यकारी आदेशों द्वारा जाति जनगणना नहीं करा सकती है.

Bihar Caste Based Census: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में जाति आधारित जनगणना के खिलाफ याचिकाओं पर विचार करने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट (Photo Credit : Twitter)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को जाति आधारित जनगणना (Caste Based Census) कराने के बिहार सरकार (Bihar Government) के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार करने से इनकार कर दिया. जस्टिस बीआर गवई (BR Gavai) और विक्रम नाथ (Vikram Nath) की पीठ ने कहा कि अदालत याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील द्वारा दी गई दलीलों पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं थी और मौखिक रूप से कहा, तो, यह एक प्रचार हित याचिका है?

मामले में संक्षिप्त सुनवाई के बाद, शीर्ष अदालत ने वकील को उच्च न्यायालय जाने के लिए कहा और सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया. शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने न्यायिक उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता के साथ इन रिट याचिकाओं को वापस लेने की अनुमति मांगी है. अनुमति दी जाती है. इसलिए, इन रिट याचिकाओं को प्रार्थना के अनुसार स्वतंत्रता के साथ वापस ले लिया गया मान कर खारिज किया जाता है. Haryana: फिर जेल से बाहर आएगा रेप-हत्या का दोषी राम रहीम, 56 दिनों बाद मिली 40 दिन की पैरोल

याचिकाओं में शीर्ष अदालत से जाति आधारित जनगणना करने की बिहार सरकार की अधिसूचना को रद्द करने का निर्देश देने की मांग की गई थी. 11 जनवरी को, शीर्ष अदालत ने राज्य में जाति सर्वेक्षण कराने के बिहार सरकार के फैसले को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर विचार करने पर सहमति व्यक्त की.

याचिका में राज्य में जाति सर्वेक्षण के संबंध में उप सचिव, बिहार सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को रद्द करने और संबंधित अधिकारियों को अभ्यास करने से रोकने की मांग की गई है. इसमें कहा गया है कि जाति विन्यास के संबंध में संविधान में कोई प्रावधान नहीं है. अखिलेश कुमार द्वारा दायर याचिका में तर्क दिया गया है कि यह कदम अवैध, मनमाना, तर्कहीन, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक होने के अलावा, संविधान की मूल संरचना के खिलाफ भी था.

उन्होंने तर्क दिया कि जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 3 के अनुसार, केंद्र को भारत के पूरे क्षेत्र या किसी भी हिस्से में जनगणना करने का अधिकार है. इसमें आगे कहा गया है कि अधिनियम की योजना यह स्थापित करती है कि कानून में जातिगत जनगणना पर विचार नहीं किया गया है और राज्य सरकार के पास जाति जनगणना करने के लिए कानून में कोई अधिकार नहीं है.

याचिका में दावा किया गया कि 6 जून, 2022 की अधिसूचना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करती है, जो कानून के समक्ष समानता और कानून की समान सुरक्षा प्रदान करता है. याचिका में दावा किया गया है, इस विषय पर कानून के अभाव में राज्य सरकार कार्यकारी आदेशों द्वारा जाति जनगणना नहीं करा सकती है. बिहार राज्य में जातिगत जनगणना के लिए विवादित अधिसूचना में वैधानिक स्वाद और संवैधानिक स्वीकृति का अभाव है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 20, 2023 10:23 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).