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Bihar Assembly Election 2025: वामपंथी गढ़ में सियासी जंग, सीपीआई की पकड़ पर भाजपा की नजर

बिहार चुनाव के बीच बेगूसराय जिले का बखरी (एससी) विधानसभा क्षेत्र फिर सुर्खियों में है. गंडक नदी के किनारे बसा यह क्षेत्र अपनी घनी आबादी और कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता है. प्रति वर्ग किलोमीटर 1,928 लोगों की घनत्व वाला यह क्षेत्र आसपास के गांवों का प्रमुख बाजार केंद्र है.

Bihar Assembly Election 2025: वामपंथी गढ़ में सियासी जंग, सीपीआई की पकड़ पर भाजपा की नजर
(Photo Credits Twitter)

पटना, 22 अक्टूबर : बिहार चुनाव (Bihar Elections) के बीच बेगूसराय जिले का बखरी (एससी) विधानसभा क्षेत्र फिर सुर्खियों में है. गंडक नदी के किनारे बसा यह क्षेत्र अपनी घनी आबादी और कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता है. प्रति वर्ग किलोमीटर 1,928 लोगों की घनत्व वाला यह क्षेत्र आसपास के गांवों का प्रमुख बाजार केंद्र है. बखरी की बलुई-दोमट मिट्टी धान, गेहूं, मक्का और दालों की खेती के लिए उपजाऊ है, जबकि दुग्ध उत्पादन आय का महत्वपूर्ण स्रोत है. लघु उद्योग भी स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देते हैं. यह निर्वाचन क्षेत्र बेगूसराय से 30 किमी, खगड़िया से 40 किमी और समस्तीपुर से 60 किमी दूर है, जबकि राजधानी पटना से 130 किमी की दूरी पर स्थित है.

चुनाव आयोग (Election Commission) के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र की कुल आबादी 4,82,993 है, जिसमें पुरुषों की संख्या 2,51,140 और महिलाओं की संख्या 2,31,853 है. मतदाता सूची में कुल 2,94,726 नाम दर्ज हैं, जिसमें पुरुष मतदाता 1,54,307 और महिला मतदाता 1,40,410 हैं, जबकि 9 थर्ड जेंडर मतदाता हैं. यह क्षेत्र एससी आरक्षित होने से दलित वोटरों (करीब 20-25 प्रतिशत) का विशेष महत्व है. ग्रामीण बहुल (करीब 85 प्रतिशत) इस क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और रोजगार प्रमुख मुद्दे हैं. गंडक नदी की बाढ़ हर साल फसलें बर्बाद करती है, जिससे प्रवासन बढ़ा है. यह भी पढ़ें : Kerala: एक बार फिर इतिहास रचने की दिशा में केरल, देश का पहला और विश्व का दूसरा अत्यधिक गरीबी मुक्त क्षेत्र

राजनीतिक रूप से बखरी 1951 में स्थापित विधानसभा क्षेत्र है, जो बेगूसराय लोकसभा के सात क्षेत्रों, चेरिया बरियारपुर, बछवाड़ा, तेघरा, मटिहानी, साहेबपुर कमल, बेगूसराय और बखरी, में शामिल है. 2008 के परिसीमन से इसे एससी आरक्षित किया गया. क्षेत्र में बखरी, डंडारी, गढ़पुरा प्रखंडों के साथ नवकोठी प्रखंड की पसराहा (पूर्व), नवकोठी, हसनपुरबागर, राजकपुर, विष्णुपुर, समसा और डफरपुर ग्राम पंचायतें आती हैं.

यहां अब तक 17 चुनाव हुए हैं, जहां वामपंथी दलों का दबदबा रहा. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने 11 बार जीत हासिल की, जिसमें 1967 से 1995 तक लगातार आठ बार का सिलसिला शामिल है. कांग्रेस को 1952, 1957 और 1962 में तीन जीतें मिलीं. 2000 में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने सीपीआई की जीत का सिलसिला तोड़ा, लेकिन 2005 के दोनों चुनावों में सीपीआई ने वापसी की. वहीं, 2010 में भाजपा ने पहली बार जीत दर्ज की, जबकि 2015 में राजद विजेता रहा. महागठबंधन ने 2020 में सीपीआई को ही सीट सौंप दी, जिसके उम्मीदवार मनोज कुमार ने भाजपा के प्रत्याशी को 777 वोटों से हराया.

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 23, 2025 08:44 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).