Bhadohi Hospital Incident: भदोही में अस्पताल ने भर्ती करने से किया इनकार? सड़क किनारे महिला ने दिया बच्चे को जन्म, वायरल वीडियो पर मचा सियासी बवाल

घटना के बाद कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो साझा करते हुए उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और वंचित समुदायों के साथ कथित भेदभाव को लेकर सरकार की आलोचना की. हालांकि प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी.

Bhadohi Woman Gives Birth Outside Hospital: उत्तर प्रदेश के भदोही जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां 20 वर्षीय आदिवासी महिला रानी देवी ने कथित तौर पर जिला अस्पताल में भर्ती करने से इनकार किए जाने के बाद अस्पताल के बाहर सड़क किनारे बच्चे को जन्म दिया. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है. कांग्रेस ने इस मामले का वीडियो साझा कर राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और कथित भेदभाव को लेकर सरकार पर निशाना साधा है.

जानकारी के मुताबिक, जोराई गांव की रहने वाली रानी देवी मंगलवार रात प्रसव पीड़ा होने पर अपने परिजनों के साथ ज्ञानपुर स्थित महाराजा चेत सिंह जिला अस्पताल पहुंची थीं. महिला के भाई विजय कुमार का आरोप है कि अस्पताल की स्टाफ नर्स ने कथित तौर पर यह कहते हुए डिलीवरी कराने से इनकार कर दिया कि महिला मुसहर समुदाय से है. परिजनों ने विरोध किया, लेकिन जब कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा तो वे महिला को वापस घर ले जाने लगे.

अस्पताल में भर्ती करने से मना किए जाने के बाद महिला ने अस्पताल के बाहर बच्चे को जन्म दिया

अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर ही रानी देवी को तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई. इसके बाद साथ मौजूद महिलाओं ने चादर की आड़ बनाकर सड़क किनारे ही उनकी डिलीवरी कराई. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया.

CMO ने दी सफाई, कम हीमोग्लोबिन का दिया हवाला

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. एस.के. चक के अनुसार, रानी देवी सोमवार को भी अस्पताल आई थीं, जहां जांच में उनका हीमोग्लोबिन स्तर केवल 5 ग्राम पाया गया था. इसके बाद उन्हें मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल रेफर किया गया. मंगलवार रात दोबारा जिला अस्पताल आने पर डॉक्टर और स्टाफ नर्स ने कम हीमोग्लोबिन के कारण उन्हें बीएचयू रेफर किया.

CMO का कहना है कि परिवार 102 एंबुलेंस सेवा से संपर्क नहीं कर सका और अस्पताल से लौटते समय महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई, जिसके चलते सड़क किनारे ही बच्चे का जन्म हुआ. सूचना मिलने के बाद प्रशासन ने मां और नवजात को अस्पताल लाकर भर्ती कराया, जहां दोनों का इलाज जारी है. महिला को प्लाज्मा भी दिया जा रहा है.

जांच के आदेश, दोषियों पर होगी कार्रवाई

CMO ने नर्स और संबंधित डॉक्टर की कथित लापरवाही की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित कर दी है. उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. वहीं जिला अधिकारी शैलेश कुमार ने भी मामले को गंभीर बताते हुए अस्पताल प्रशासन, डॉक्टर और स्टाफ नर्स की कार्यप्रणाली की जांच कराने की बात कही है.

घटना के बाद कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो साझा करते हुए उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और वंचित समुदायों के साथ कथित भेदभाव को लेकर सरकार की आलोचना की. हालांकि प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी.

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