Bengaluru Water New Rules: बेंगलुरु में पानी की बर्बादी पर सख्ती, नलों में एयरेटर लगाना अनिवार्य, उल्लंघन करने पर लगेगा भारी जुर्माना
मानसून में देरी और अल नीनो (El Niño) के प्रभाव को देखते हुए बेंगलुरु जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड (BWSSB) ने शहर में पीने के पानी की बर्बादी रोकने के लिए सख्त नियम लागू किए हैं.
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Bengaluru Water New Rules: मानसून की कमजोर शुरुआत और अल नीनो (El Niño) के प्रभाव से गहराते जल संकट के बीच बेंगलुरु जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड (BWSSB) ने शहर में पानी के संरक्षण के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं. इन नए नियमों के तहत पीने के पानी (पोटेबल वाटर) के गैर-जरूरी इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. इसके साथ ही शहर के सभी आवासीय, व्यावसायिक और सरकारी भवनों में पानी बचाने वाले आधुनिक उपकरण लगाना अनिवार्य कर दिया गया है. बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा.
नलों में एयरेटर (फ्लो रिस्ट्रिक्टर) लगाना हुआ अनिवार्य
BWSSB के नए आदेश के अनुसार, बेंगलुरु के सभी घरों, अपार्टमेंट्स, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, सरकारी दफ्तरों, होटलों और उद्योगों के नलों में एयरेटर (फ्लो रिस्ट्रिक्टर) लगाना अब अनिवार्य है. बोर्ड का कहना है कि एयरेटर लगाने से पानी के दबाव या उपयोग पर कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन इससे पानी की खपत में 30 से 50 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है. इस नियम का पालन करने के लिए प्रतिष्ठानों को एक निश्चित समय सीमा दी गई है.
गैर-जरूरी कामों में पीने के पानी के इस्तेमाल पर रोक
नए नियमों के तहत पीने के पानी का उपयोग गैर-जरूरी गतिविधियों के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है. अब नागरिक वाहनों को धोने, बागवानी करने, सड़कों व फुटपाथों की सफाई करने और निर्माण कार्यों के लिए पीने के पानी का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे. बोर्ड ने निर्देश दिया है कि इन सभी कामों के लिए केवल रिसाइकिल्ड या ट्रीटेड (उपचारित) पानी का ही उपयोग किया जाए.
स्विमिंग पूल भरने पर प्रतिबंध
BWSSB ने शहर के निजी और सार्वजनिक, दोनों प्रकार के स्विमिंग पूलों में पीने का पानी भरने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. पूल संचालकों को निर्देश दिया गया है कि वे केवल ट्रीटेड वाटर या अन्य वैकल्पिक स्रोतों के पानी का ही इस्तेमाल करें. हालांकि, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए एथलीटों को प्रशिक्षित करने वाले पूलों को इस नियम से सशर्त छूट दी गई है.
नियम तोड़ने पर 5,000 रुपये जुर्माना और कानूनी कार्रवाई
इन कड़े नियमों को लागू करने के लिए बोर्ड ने सख्त दंड का प्रावधान किया है. भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) की जल प्रबंधन रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर तैयार किए गए इन नियमों का पहली बार उल्लंघन करने पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. यदि उल्लंघन जारी रहता है, तो प्रतिदिन 500 रुपये का अतिरिक्त जुर्माना देना होगा. इसके अलावा, बेंगलुरु जल आपूर्ति और सीवरेज अधिनियम, 1964 के तहत संबंधित परिसर की पानी की आपूर्ति में 50 प्रतिशत तक की कटौती की जा सकती है और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी.
बीडब्ल्यूएसएसबी अध्यक्ष की नागरिकों से अपील
BWSSB की अध्यक्ष डॉ. मंजुला ने नागरिकों से इन नियमों का पालन करने और जल संरक्षण अभियान में सहयोग करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि पीने का पानी एक बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन है और इसकी सुरक्षा हम सभी की जिम्मेदारी है. डॉ. मंजुला ने जनता से आग्रह किया कि वे जिम्मेदारी से पानी का उपयोग करें, अपने घरों में एयरेटर लगवाएं और पानी के दुरुपयोग को रोककर बेंगलुरु के भविष्य को सुरक्षित बनाने में मदद करें.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 05, 2026 02:49 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

