UP: बरेली में DJ बना मौत का कारण! तेज आवाज से 60 वर्षीय महिला के सीने में दर्द उठने के बाद तोड़ा दम
स्थानीय पुलिस प्रशासन ने घटना का संज्ञान लिया है और मामले की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है. पुलिस अधिकारी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि क्या जुलूस में इस्तेमाल किया गया साउंड सेटअप सार्वजनिक स्थानों के लिए तय डेसीबल सीमाओं का उल्लंघन कर रहा था.
UP DJ News: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के अलीगंज क्षेत्र में सोमवार को एक दुखद घटना सामने आई. यहां 60 वर्षीय एक महिला की तेज आवाज में बज रहे डीजे (DJ) के संपर्क में आने के बाद सीने में अत्यधिक दर्द के कारण मौत हो गई. मृतका की पहचान महोलिया गांव निवासी कमला देवी के रूप में हुई है. घटना के समय कमला देवी अपनी बहू ननू के साथ गौरी शंकर मंदिर में जलाभिषेक करने जा रही थीं.
डीजे से उत्पन्न हुई तेज कंपन और सीने में उठा दर्द
प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, दोनों महिलाएं रास्ते में थीं तभी वहां से ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लगा एक उच्च क्षमता वाला साउंड सिस्टम (डीजे) गुजरा. साउंड सिस्टम की तेज आवाज और उससे उत्पन्न कंपन के कारण कमला देवी को तुरंत सीने में तेज दर्द महसूस हुआ. यह भी पढ़े: UP: धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर और DJ की तेज आवाज पर लगेगी लगाम, CM योगी का सख्त निर्देश
अत्यधिक बेचैनी की शिकायत करने के कुछ ही देर बाद वह सड़क किनारे गिर पड़ीं. परिजनों द्वारा उन्हें तुरंत नजदीकी चिकित्सा केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. परिजनों का आरोप है कि अचानक लगे ध्वनि के झटके और अत्यधिक बेस (Bass) आउटपुट के कारण ही उनकी हालत बिगड़ी और जान चली गई.
पुलिस जांच और डेसीबल नियमों का सत्यापन
स्थानीय पुलिस प्रशासन ने घटना का संज्ञान लिया है और मामले की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है. पुलिस अधिकारी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि क्या जुलूस में इस्तेमाल किया गया साउंड सेटअप सार्वजनिक स्थानों के लिए तय डेसीबल सीमाओं का उल्लंघन कर रहा था.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कानूनी कार्रवाई पोस्ट-मार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय की जाएगी.
ध्वनि प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिमों पर बढ़ता संकट
यह घटना उत्तर प्रदेश भर में धार्मिक और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान बिना रोक-टोक इस्तेमाल किए जा रहे हाई-डेसीबल डीजे सिस्टम और ध्वनि प्रदूषण पर गंभीर सवाल खड़े करती है.
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक तेज आवाज और कम आवृत्ति (low frequency) की कंपन बुजुर्गों और हृदय रोगियों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है, जिससे दिल का दौरा पड़ने या कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ जाता है.