Assam Floods: असम में बादल फटने और मूसलाधार बारिश से भीषण तबाही; 31 लोगों की मौत, 5.65 लाख से अधिक प्रभावित
ऊपरी इलाकों में बादल फटने और भीषण बारिश के कारण असम के 16 जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। राज्य में अब तक 31 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5.65 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं. ब्रह्मपुत्र समेत प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और राहत बचाव कार्य जारी हैं.
गुवाहाटी: ऊपरी पहाड़ियों में बादल फटने और लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते असम (Assam) में बाढ़ (Flood) की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है. राज्य के 16 जिलों में 5.65 लाख से अधिक आबादी बाढ़ के पानी से घिरी हुई है. वहीं, विभिन्न हादसों और डूबने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है.
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, पूर्वी असम के शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं. अकेले शिवसागर जिले में ही 24 घंटे के भीतर 13 लोगों की जान चली गई. क्षेत्र से गुजरने वाली ब्रह्मपुत्र, दिखौ, दिसंग और धनसिरी नदियां खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही हैं. यह भी पढ़ें: IMD Rain Alert: देश के 15 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट; हिमाचल में 'ऑरेंज अलर्ट' और जम्मू-कश्मीर में बाढ़ की चेतावनी
870 से अधिक गांव जलमग्न, 24 हजार हेक्टेयर फसल तबाह
बाढ़ के कारण राज्य के 872 गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं और करीब 24,210 हेक्टेयर कृषि भूमि डूब गई है. कई स्थानों पर सुरक्षा तटबंध (Embankments) टूट गए हैं और सड़कों व पुलों को भारी नुकसान पहुंचा है। गोलाघाट में पुल क्षतिग्रस्त होने से कई इलाकों का संपर्क कट गया है.
प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने के लिए भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमें निरंतर जुटी हुई हैं. वर्तमान में 71 राहत शिविरों में 12,000 से अधिक विस्थापित नागरिक शरण लिए हुए हैं, जबकि 1 लाख से अधिक लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है.
रेल और सड़क यातायात प्रभावित
मरियानी और शिमलगुड़ी रेलखंड के बीच पटरियों पर पानी भरने के कारण पूर्वोत्तर सीमा रेलवे (NFR) ने डिब्रूगढ़ और न्यू तिनसुकिया जाने वाली कई ट्रेनों को रद्द, डायवर्ट या आंशिक रूप से समाप्त कर दिया है. यात्रियों की आवाजाही के लिए आपातकालीन बस सेवाएं चलाई जा रही हैं.
इसके अलावा गुवाहाटी और जोरहाट जैसे शहरी क्षेत्रों में भी भारी जलभराव देखा गया है, जहाँ से पानी निकालने के लिए पंप तैनात किए गए हैं.
भौगोलिक परिस्थिति और राहत कार्य
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि पड़ोसी पहाड़ी राज्यों में बादल फटने और भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है. राज्य सरकार के मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों का एक दल प्रभावित पूर्वी जिलों में राहत कार्यों की सीधी निगरानी कर रहा है.
मानसून के दौरान ब्रह्मपुत्र नदी घाटी के निचले इलाकों में हर साल बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है, लेकिन पड़ोसी राज्यों से आने वाले अतिरिक्त पानी और तटबंधों के टूटने से इस बार नुकसान अधिक हुआ है.