UPI MDR Controversy: क्या ग्राहकों से वसूला जा रहा है UPI चार्ज? वायरल स्क्रीनशॉट पर वित्त मंत्रालय के DFS ने दी सफाई, खारिज किए दावे

सोशल मीडिया पर एक वायरल सेटलमेंट स्क्रीनशॉट के जरिए दावा किया जा रहा था कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस पर लगने वाला मर्चेंट डिस्काउंट रेट अब सीधे आम ग्राहकों से वसूला जा रहा है. केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत वित्तीय सेवाएं विभाग ने बुधवार को इन भ्रामक दावों को सिरे से खारिज कर दिया.

A screenshot shared by an X user showing MDR charged on UI transaction (Photo Credits: X/@Kenu73)

नई दिल्ली: यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक वायरल स्क्रीनशॉट के हवाले से दावा किया गया था कि यूपीआई भुगतान पर व्यापारियों पर लगने वाला एमडीआर शुल्क अंततः ग्राहकों की जेब पर डाला जा रहा है.

वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) ने इस दावे का तथ्यपरक खंडन किया है. डीएफएस ने साफ शब्दों में कहा कि यह स्क्रीनशॉट किसी ग्राहक के यूपीआई ऐप का नहीं बल्कि मर्चेंट के बैकएंड सेटलमेंट इंटरफेस का है, इसलिए ग्राहक द्वारा एमडीआर चुकाने की बात पूरी तरह निराधार है. यह भी पढ़ें: UPI ट्रांजैक्शन चार्ज: जानें किन भुगतानों पर लगेगा शुल्क और क्या रहेगा पूरी तरह मुफ्त

वायरल स्क्रीनशॉट की सच्चाई: मर्चेंट का था सेटलमेंट डैशबोर्ड

सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लेन-देन में कटे शुल्क का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए लिखा था कि "एमडीआर का बोझ ग्राहकों पर डाला जा रहा है।"

इस पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) ने आधिकारिक पोस्ट में बिंदुवार तथ्य सामने रखे:

लागू होने वाला कोई भी MDR मर्चेंट को उठाना होता है, ग्राहक को नहीं

बैंक अकाउंट ट्रांसफर और क्रेडिट कार्ड UPI में बड़ा अंतर

रिपोर्ट के अनुसार, डीएफएस ने सीधे बैंक खाते से होने वाले यूपीआई भुगतान और क्रेडिट-लिंक्ड यूपीआई भुगतान के बीच के तकनीकी अंतर को समझाया:

लागू होने वाला MDR मर्चेंट वहन करता है, ग्राहक नहीं

वित्तीय सेवाएं विभाग ने दोहराया कि जहां भी एमडीआर लागू होता है, वह लागत व्यापारी और उसके अधिग्रहण करने वाले बैंक (Acquiring Bank) के बीच का वाणिज्यिक समझौता होती है.

भ्रामक जानकारी न फैलाने की अपील

एनपीसीआई (NPCI) द्वारा हाल ही में 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले 0.4% एमडीआर ढांचे को लेकर जारी स्पष्टीकरण के बाद भी सोशल मीडिया पर कई तरह की अपुष्ट जानकारियां प्रसारित हो रही हैं.

डीएफएस ने इंटरनेट उपयोगकर्ताओं से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले असत्यापित दावों और भ्रामक स्क्रीनशॉट्स को बिना पुष्टि के आगे साझा न करें. डिजिटल भुगतान और बैंकिंग नियमों से जुड़े किसी भी अपडेट के लिए केवल वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या एनपीसीआई के आधिकारिक बयानों पर ही भरोसा करें.

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