UPI MDR Controversy: क्या ग्राहकों से वसूला जा रहा है UPI चार्ज? वायरल स्क्रीनशॉट पर वित्त मंत्रालय के DFS ने दी सफाई, खारिज किए दावे
सोशल मीडिया पर एक वायरल सेटलमेंट स्क्रीनशॉट के जरिए दावा किया जा रहा था कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस पर लगने वाला मर्चेंट डिस्काउंट रेट अब सीधे आम ग्राहकों से वसूला जा रहा है. केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत वित्तीय सेवाएं विभाग ने बुधवार को इन भ्रामक दावों को सिरे से खारिज कर दिया.
नई दिल्ली: यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक वायरल स्क्रीनशॉट के हवाले से दावा किया गया था कि यूपीआई भुगतान पर व्यापारियों पर लगने वाला एमडीआर शुल्क अंततः ग्राहकों की जेब पर डाला जा रहा है.
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) ने इस दावे का तथ्यपरक खंडन किया है. डीएफएस ने साफ शब्दों में कहा कि यह स्क्रीनशॉट किसी ग्राहक के यूपीआई ऐप का नहीं बल्कि मर्चेंट के बैकएंड सेटलमेंट इंटरफेस का है, इसलिए ग्राहक द्वारा एमडीआर चुकाने की बात पूरी तरह निराधार है. यह भी पढ़ें: UPI ट्रांजैक्शन चार्ज: जानें किन भुगतानों पर लगेगा शुल्क और क्या रहेगा पूरी तरह मुफ्त
वायरल स्क्रीनशॉट की सच्चाई: मर्चेंट का था सेटलमेंट डैशबोर्ड
सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लेन-देन में कटे शुल्क का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए लिखा था कि "एमडीआर का बोझ ग्राहकों पर डाला जा रहा है।"
इस पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) ने आधिकारिक पोस्ट में बिंदुवार तथ्य सामने रखे:
- मर्चेंट-फेसिंग इंटरफेस: डीएफएस ने स्पष्ट किया कि वायरल स्क्रीनशॉट भुगतान करने वाले ग्राहक के खाते का नहीं है. यह उस व्यापारी (दुकानदार) के सिस्टम का सेटलमेंट डेटा है, जिसे भुगतान प्राप्त हुआ था.
- ग्राहक पर शून्य भार: जब कोई नागरिक किसी क्यूआर कोड को स्कैन कर भुगतान करता है, तो उसके बैंक खाते से केवल उतनी ही राशि कटती है जितने का उसने सामान खरीदा है. ग्राहक से एक भी अतिरिक्त पैसा नहीं काटा जाता.
लागू होने वाला कोई भी MDR मर्चेंट को उठाना होता है, ग्राहक को नहीं
बैंक अकाउंट ट्रांसफर और क्रेडिट कार्ड UPI में बड़ा अंतर
रिपोर्ट के अनुसार, डीएफएस ने सीधे बैंक खाते से होने वाले यूपीआई भुगतान और क्रेडिट-लिंक्ड यूपीआई भुगतान के बीच के तकनीकी अंतर को समझाया:
- रुपे क्रेडिट कार्ड (RuPay CC) ट्रांजैक्शन: जिस स्क्रीनशॉट को लेकर भ्रम फैलाया गया, उसमें भुगतान का तरीका "RuPay CC – Credit Card" दर्ज था.
- क्रेडिट इंस्ट्रूमेंट के अलग नियम: क्रेडिट कार्ड से जुड़े यूपीआई लेन-देन बैंक द्वारा दिए जाने वाले अल्पकालिक ऋण (Short-term Credit) होते हैं, जिन पर नियमित क्रेडिट कार्ड के वाणिज्यिक नियम लागू होते हैं। इसे सामान्य बैंक-टू-बैंक यूपीआई ट्रांसफर के साथ नहीं मिलाया जाना चाहिए.
- छोटे व्यापारियों के लिए छूट: छोटे कारोबारियों को बढ़ावा देने के लिए ₹20 लाख से कम वार्षिक टर्नओवर वाले व्यापारियों पर रुपे क्रेडिट कार्ड से ₹2,000 तक के भुगतान पर शून्य एमडीआर (Zero MDR) का नियम पहले से लागू है.
लागू होने वाला MDR मर्चेंट वहन करता है, ग्राहक नहीं
वित्तीय सेवाएं विभाग ने दोहराया कि जहां भी एमडीआर लागू होता है, वह लागत व्यापारी और उसके अधिग्रहण करने वाले बैंक (Acquiring Bank) के बीच का वाणिज्यिक समझौता होती है.
- नियम के मुताबिक, कोई भी व्यापारी यूपीआई के जरिए भुगतान स्वीकार करते समय ग्राहक से एमडीआर या कोई अतिरिक्त अधिभार (सरचार्ज) नहीं वसूल सकता.
- ग्राहक को केवल वही कीमत चुकानी होती है जो वस्तु या सेवा के लिए तय की गई है.
भ्रामक जानकारी न फैलाने की अपील
एनपीसीआई (NPCI) द्वारा हाल ही में 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले 0.4% एमडीआर ढांचे को लेकर जारी स्पष्टीकरण के बाद भी सोशल मीडिया पर कई तरह की अपुष्ट जानकारियां प्रसारित हो रही हैं.
डीएफएस ने इंटरनेट उपयोगकर्ताओं से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले असत्यापित दावों और भ्रामक स्क्रीनशॉट्स को बिना पुष्टि के आगे साझा न करें. डिजिटल भुगतान और बैंकिंग नियमों से जुड़े किसी भी अपडेट के लिए केवल वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या एनपीसीआई के आधिकारिक बयानों पर ही भरोसा करें.