Antilia Bomb Scare: बर्खास्त पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को एनआईए कोर्ट से मिली जमानत; अदालत बोली- 'अंबानी परिवार में दहशत फैलने का कोई सबूत नहीं’

साल 2021 के बहुचर्चित एंटीलिया विस्फोटक और मनसुख हिरेन हत्याकांड मामले में मुंबई की एक विशेष एनआईए अदालत ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को नियमित जमानत दे दी है. विशेष सत्र न्यायाधीश चकोर एस. बाविस्कर ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां अधिनियम के तहत आतंकवाद का प्रथम दृष्टया मामला स्थापित करने में विफल रहा है.

Former Mumbai Cop Sachin Waze (Photo Credits: File Image)

मुंबई: उद्योगपति मुकेश अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित आवास 'एंटीलिया' के बाहर विस्फोटक मिलने और व्यवसायी मनसुख हिरेन की संदिग्ध मौत के मामले में मुख्य आरोपी और मुंबई पुलिस के बर्खास्त सहायक पुलिस निरीक्षक (API) सचिन वाझे को बड़ी कानूनी राहत मिली है. The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, विशेष एनआईए अदालत ने वाझे को जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया है.

विशेष सत्र न्यायाधीश चकोर एस. बाविस्कर ने अपने आदेश में कहा कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) द्वारा लगाए गए कड़े आतंकवाद-रोधी कानून (UAPA) के प्रावधान इस मामले में प्रथम दृष्टया लागू नहीं होते. मार्च 2021 में गिरफ्तारी के बाद से वाझे इस मामले में लंबे समय से जेल में बंद थे.

UAPA की धारा 15 पर अदालत के गंभीर सवाल: 'अंबानी परिवार के बयान तक दर्ज नहीं'

Rediff News की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने आतंकवाद के आरोपों की समीक्षा करते हुए एनआईए की जांच में कई बुनियादी कमियों को रेखांकित किया:

मनसुख हिरेन हत्याकांड को माना गया स्वतंत्र अपराध

इस मामले में कारोबारी मनसुख हिरेन की हत्या को भी अदालत ने यूएपीए की सख्त जमानत पाबंदियों से अलग रखा:

क्या था पूरा घटनाक्रम?

यह मामला देश के सबसे सनसनीखेज आपराधिक मामलों में से एक रहा है:

आदेश की शर्तें और मामले का भविष्य

Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार, विशेष न्यायाधीश ने सचिन वाझे को ₹1 लाख के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत पेश करने पर रिहा करने का आदेश दिया है.

अदालत ने स्पष्ट किया है कि जमानत देते समय की गई ये टिप्पणियां केवल UAPA की प्रथम दृष्टया प्रयोज्यता तक सीमित हैं और इसे आरोपों के अंतिम निष्कर्ष या दोषमुक्ति (Acquittal) के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. मुख्य मामले का नियमित ट्रायल अदालत में जारी रहेगा.

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