Andhra Pradesh News: आंध्र प्रदेश में 87 वर्षीय पति की मृत्यु के बाद पत्नी ने भी तोड़ा दम, एक साथ अंतिम संस्कार ने सबको किया भावुक

पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सेवानिवृत्त कर्मचारी कनेटी तताराओ (87) लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे. 24 जुलाई को इलाज और देखरेख के दौरान उन्होंने अपने आवास पर अंतिम सांस ली.

प्रतीकात्मक तस्वीर Photo Credits: Pixabay)

Andhra Pradesh News:  आंध्र प्रदेश के डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनासीमा जिले से एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां राजोल मंडल के विश्वेश्वरयापुरम गांव में 87 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी कनेटी तताराओ के निधन के कुछ ही घंटों बाद उनकी 76 वर्षीय पत्नी झांसी लक्ष्मी ने भी अंतिम सांस ले ली. पति के वियोग का गहरा सदमा न सह पाने के कारण पत्नी की मौत हुई. दंपती की अंतिम यात्रा एक साथ निकाली गई, जिससे पूरे गांव में शोक का माहौल व्याप्त हो गया.

लंबे समय से बीमार थे कनेटी तताराओ

पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सेवानिवृत्त कर्मचारी कनेटी तताराओ (87) लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे. 24 जुलाई को इलाज और देखरेख के दौरान उन्होंने अपने आवास पर अंतिम सांस ली.  यह भी पढ़े:  Sudden Death Video: कोटा में पति की रिटायरमेंट पार्टी में पत्नी की मौत, माला पहनाते ही थम गईं सांसे; मातम में बदलीं खुशियां

तताराओ के निधन के बाद रिश्तेदार और ग्रामीण उनके अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटे हुए थे. घर में मातम का माहौल था और परिजन अंतिम क्रिया की व्यवस्था कर रहे थे.

पति के वियोग का गहरा सदमा नहीं सह सकीं पत्नी

पति की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी झांसी लक्ष्मी (76) का रो-रोकर बुरा हाल था. परिजनों के मुताबिक, वह पति के जाने का सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकीं और अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी.

अभी पति का अंतिम संस्कार संपन्न भी नहीं हो पाया था कि कुछ ही घंटों के भीतर झांसी लक्ष्मी ने भी दम तोड़ दिया. एक ही दिन में माता-पिता दोनों को खो देने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा.

एक साथ उठी अंतिम यात्रा, गांव में पसरा सन्नाटा

इस दुखद घटना की खबर फैलते ही पूरे विश्वेश्वरयापुरम गांव में शोक की लहर दौड़ गई. बड़ी संख्या में ग्रामीण, पड़ोसी और रिश्तेदार पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे.

वर्षों तक एक साथ जीवन बिताने वाले इस बुजुर्ग दंपती की अंतिम यात्रा भी एक साथ ही निकाली गई. सनातन परंपरा के अनुसार दोनों का अंतिम संस्कार एक साथ संपन्न कराया गया, जिसे देख वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं.

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