बढ़ती महंगाई के बीच आरबीआई ने रेपो रेट में 40 बीपीएस की बढ़ोतरी की, शेयर बाजार में आई गिराव
आरबीआई ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए रेपो रेट में 40 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी की घोषणा की. केंद्रीय बैंक ने इसे चार से बढ़ाकर 4.40 प्रतिशत कर दिया गया है.
नई दिल्ली, 4 मई : आरबीआई ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए रेपो रेट में 40 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी की घोषणा की. केंद्रीय बैंक ने इसे चार से बढ़ाकर 4.40 प्रतिशत कर दिया गया है. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने बुधवार को कहा कि केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने एक बैठक में रेपो दर को तत्काल प्रभाव से 40 बेसिस प्वाइंट्स (बीपीएस) से बढ़ाकर 4.40 प्रतिशत कर दिया है.
आरबीआई की ओर से यह घोषणा ऐसे समय पर की गई है, जब देश में महंगाई अपने चरम पर है और यह केंद्रीय बैंक की निर्धारित सीमा से ऊपर बनी हुई है. बता दें कि आरबीआई ने पिछले महीने अपनी मॉनिटरी पॉलिसी में नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया था. रेपो रेट वह दर है, जिस पर केंद्रीय बैंक बैंकों को अल्पकालिक यानी कम समय के लिए धन उधार देता है. आरबीआई ने फरवरी 2019 से रेपो रेट में 250 बेसिस प्वाइंट्स (आधार अंकों) की कटौती की है, ताकि विकास की गति को पुनर्जीवित करने में मदद मिल सके. मौद्रिक नीति समिति विकास का समर्थन करने के लिए लंबे समय से उदार रुख पर है.
साथ ही रिजर्व रेश्यो 50 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 4.5 फीसदी कर दिया गया है. महंगाई पर काबू पाने के लिए यह कदम उठाया गया है. चल रहे भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति (महंगाई) को अधिक बढ़ा रहे हैं, इसके अलावा कच्चे तेल की कीमत भी अस्थिर है और इसकी कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रही है. दास ने कहा कि खाद्य तेल की कमी निर्यातकों के संघर्ष और प्रतिबंध के कारण है. दास ने कहा, "रेपो दर बढ़ाने के आज के फैसले को मई 2020 की रेट के संबंध में कार्रवाई के उलट होने के रूप में देखा जा सकता है. यह भी पढ़ें : होंडा कार्स ने उतारी पहली हाइब्रिड इलेक्ट्रिक कार ‘सिटी ई: एचईवी’, कीमत 19.49 लाख रुपये से शुरू
पिछले महीने, हमने समायोजन वापस लेने का रुख तय किया था. आज की कार्रवाई को उस कार्रवाई के अनुरूप देखा जाना चाहिए." दास ने कहा, "मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि मौद्रिक नीति कार्रवाई का उद्देश्य मुद्रास्फीति में वृद्धि को रोकना और मुद्रास्फीति की उम्मीदों को फिर से स्थापित करना है. उच्च मुद्रास्फीति को विकास के लिए हानिकारक के रूप में जाना जाता है." दास ने हालांकि कहा कि मौद्रिक रुख उदार बना हुआ है और कार्रवाई संतुलित रहेगी. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केंद्रीय बैंक द्वारा अनिर्धारित घोषणा ने इक्विटी बाजारों और निवेशकों को चौंका दिया है. सेंसेक्स करीब 1,100 अंक टूटा है, जबकि निफ्टी 300 अंक से अधिक टूटी है.
(The above story first appeared on LatestLY on May 04, 2022 03:54 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

