Global Fuel Price Hike: वैश्विक ईंधन संकट के बीच भारत एक 'अपवाद', अमित मालवीय ने अन्य देशों से तुलना कर बताई पेट्रोल-डीजल की स्थिति

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने वैश्विक स्तर पर बढ़ती ईंधन की कीमतों के बीच भारत की स्थिति को बेहतर बताया है. उन्होंने अन्य देशों की तुलना में भारत में हुई मामूली बढ़ोतरी को सरकार और तेल कंपनियों की कुशल रणनीति का परिणाम करार दिया.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

Global Fuel Price Hike: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के माध्यम से कच्चे तेल की आपूर्ति में आए व्यवधान के कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है. इस संकट के बीच, भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने शुक्रवार को कहा कि भारत एक 'अद्भुत अपवाद' (Striking Exception) बनकर उभरा है. मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर विभिन्न देशों के ईंधन मूल्यों का तुलनात्मक डेटा साझा करते हुए दावा किया कि वैश्विक दबाव के बावजूद भारत में कीमतों को काफी हद तक नियंत्रित रखा गया है. यह भी पढ़ें: Petrol, Diesel Price Hike: ईंधन की कीमतों में भारी उछाल, दिल्ली, मुंबई और कोलकाता सहित प्रमुख शहरों में ₹3 तक महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल

वैश्विक तुलना और भारत की स्थिति

अमित मालवीय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 23 फरवरी से 15 मई के बीच जब ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार रहीं, उस दौरान भारत में पेट्रोल की कीमतों में केवल 3.2% और डीजल में 3.4% की वृद्धि दर्ज की गई.

इसके विपरीत, पड़ोसी और अन्य प्रमुख देशों में यह वृद्धि काफी अधिक रही:

तेल कंपनियों द्वारा 'अंडर-रिकवरी' का अवशोषण

मालवीय ने बताया कि भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों, जो खुदरा बिक्री का 90% हिस्सा संभालती हैं, उन्होंने वैश्विक कीमतों में बढ़त के बावजूद 76 दिनों तक घरेलू कीमतों को स्थिर रखा। उन्होंने लिखा, "नागरिकों पर तुरंत बोझ डालने के बजाय, इन कंपनियों ने रिफाइनरी गेट पर होने वाले नुकसान (Under-recoveries) को खुद सहा."

अनुमानों के अनुसार, 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा से पहले, तेल कंपनियों का दैनिक घाटा लगभग 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था.

महंगाई नियंत्रण और स्थिरता

बीजेपी नेता ने इस वृद्धि को एक 'कैलिब्रेटेड' (नपा-तुला) कदम बताया. उन्होंने कहा कि 95 रुपये के आधार मूल्य पर यह वृद्धि केवल 3.5% के करीब है. मालवीय के अनुसार, ईंधन की कीमतों में यह स्थिरता न केवल उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि मुद्रास्फीति (Inflation), परिवहन लागत, रसद व्यय और विनिर्माण लागत को नियंत्रित करने के लिए भी आवश्यक है.

उन्होंने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि जहां दुनिया के बड़े हिस्से में 10% से 90% तक की वृद्धि देखी गई, वहीं भारत ने अपने नागरिकों पर इसके प्रभाव को मात्र 3% से कुछ अधिक तक सीमित रखा है.

Share Now

Tags

Amit Malviya BJP Brent Crude crude oil diesel hike diesel prices energy crisis fuel hike Fuel Inflation FUEL PRICES Global Fuel Hike India fuel prices INFLATION Malaysia Fuel Prices Myanmar Fuel Prices Oil marketing companies Oil prices OMCs Pakistan fuel prices petrol hike PETROL PRICES Strait of Hormuz UAE Fuel Prices UAE में ईंधन की कीमतें US Fuel Prices US में ईंधन की कीमतें west asia conflict अमित मालवीय ईंधन की कीमतें ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी ईंधन महंगाई ऊर्जा संकट कच्चा तेल डीजल की कीमतें डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी तेल की कीमते तेल विपणन कंपनिया पश्चिम एशिया संघर्ष पाकिस्तान में ईंधन की कीमत पेट्रोल की कीमतें पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी ब्रेंट क्रूड भारत में ईंधन की कीमतें मलेशिया में ईंधन की कीमतें महंगाई म्यांमार में ईंधन की कीमतें वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी होर्मुज जलडमरूमध्य