Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उमर अंसारी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) के कथित उल्लंघन के लिए उनके खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामले में गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है.
प्रयागराज (यूपी), 20 दिसंबर : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) के कथित उल्लंघन के लिए उनके खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामले में गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है. हाईकोर्ट ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखने के बाद अपराध बनता है. न्यायमूर्ति समित गोपाल ने कहा, "आगे उसका फोरम हंटिंग का कार्य, उसका आपराधिक इतिहास, जो यह दर्शाता है कि आवेदक विभिन्न प्रकार की आपराधिक गतिविधियों में शामिल है और मुकदमे की कार्यवाही में उसका असहयोग है, इसलिए उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज की जा रही है.“
4 मार्च, 2022 को मऊ जिले के कोतवाली पुलिस स्टेशन में अब्बास अंसारी (मऊ सदर सीट से एसबीएसपी उम्मीदवार), उमर अंसारी और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी. एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि 3 मार्च, 2022 को पहाड़पुरा मैदान में एक सार्वजनिक बैठक में अब्बास अंसारी, उमर अंसारी और आयोजक मंसूर अहमद अंसारी ने मऊ प्रशासन के साथ हिसाब-किताब करने का आह्वान किया था.यह एमसीसी के उल्लंघन का मामला है.
सुनवाई के दौरान उमर अंसारी का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता जी.एस. चतुर्वेदी ने दलील दी कि आवेदक इस मामले में मुख्य आरोपी नहीं है. दलील दी गई है कि सह-आरोपी अब्बास अंसारी इस मामले में मुख्य आरोपी हैं और उन्हें ट्रायल कोर्ट से जमानत मिल चुकी है. बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष के अनुसार, आवेदक ने कानून और व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला ऐसा कोई भाषण नहीं दिया.
यह तर्क दिया गया कि "इस मामले की प्रकृति से पता चलता है कि इसे केवल प्रतिशोध की भावना से दर्ज किया गया है." हालांकि, अतिरिक्त महाधिवक्ता पीसी श्रीवास्तव ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि गहन जांच के बाद आवेदक और सह-अभियुक्तों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया गया था, जिस पर ट्रायल कोर्ट ने संज्ञान लिया था और उन्हें तलब किया था. श्रीवास्तव ने तर्क दिया, "जहां तक आवेदक के खिलाफ आरोपों का सवाल है, इससे पता चलता है कि एक अपराध बनाया गया है, जिसे आवेदक ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है."
(The above story first appeared on LatestLY on Dec 20, 2023 06:51 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

