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Agniveer Permanent Job Update: अग्निपथ योजना में बड़े बदलाव के संकेत, 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद अधिक अग्निवीरों को स्थायी करने के पक्ष में सेना, जानें वजह

'ऑपरेशन सिंदूर' के अनुभवों के बाद भारतीय सशस्त्र बल अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए अग्निवीरों के स्थायीकरण का प्रतिशत बढ़ाने के पक्ष में हैं. सेना का मानना है कि आधुनिक तकनीक और युद्ध की स्थिति से निपटने के लिए अनुभवी जवानों की संख्या बढ़ाना आवश्यक है.

Agniveer Permanent Job Update: अग्निपथ योजना में बड़े बदलाव के संकेत, 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद अधिक अग्निवीरों को स्थायी करने के पक्ष में सेना, जानें वजह
(Photo Credits Twitter0

Agniveer Permanent Job Update:  भारतीय सशस्त्र बलों का मानना है कि चार साल की सेवा पूरी करने के बाद 25 प्रतिशत से अधिक संख्या में अग्निवीरों को स्थायी (Agnipath Permanent Job) रूप से सेना में बनाए रखा जाना चाहिए. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सेना के पास अनुभवी जवानों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से यह विचार किया जा रहा है. रक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि युद्ध या किसी बड़े सैन्य संघर्ष की स्थिति में अनुभवी सैनिकों की मौजूदगी बेहद महत्वपूर्ण साबित होती है.

सूत्रों के मुताबिक, पिछले साल आयोजित किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद सेना को यह अहम सीख मिली है कि सैन्य अभियानों में युवाओं के साथ-साथ लंबे अनुभव का होना कितना जरूरी है.  यह भी पढ़े: Indian Army Recruitment 2022: भारतीय सेना में नौकरी का शानदार मौका, जल्द करें अप्लाई

'ऑपरेशन सिंदूर' से मिली बड़ी सीख

अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान अग्निवीरों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया था. लेकिन कई चुनौतीपूर्ण मौकों पर ऐसे सैनिकों ने अधिक तेजी और प्रभावी तरीके से हालात का सामना किया, जिन्हें अलग-अलग कठिन इलाकों में काम करने और कई सैन्य अभ्यासों का पुराना अनुभव था.

इसी अनुभव को देखते हुए थलसेना, नौसेना और वायुसेना अब अधिक प्रतिशत में अग्निवीरों को स्थायी सेवा में बनाए रखने की जरूरत महसूस कर रही हैं. वर्तमान नियमों के मुताबिक, केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को ही चार साल बाद स्थायी कैडर में शामिल करने का प्रावधान लागू है.

आधुनिक तकनीक और हथियारों के लिए ट्रेनिंग की जरूरत

सूत्रों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने बड़ी संख्या में आधुनिक प्लेटफॉर्म, नई टेक्नोलॉजी और अत्याधुनिक हथियारों की खरीद शुरू की है. इन जटिल तकनीकी उपकरणों और हथियार प्रणालियों के संचालन के लिए जवानों को विशेष और लंबे प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है.

यह जरूरत विशेष रूप से नौसेना के नाविकों और वायुसेना व थलसेना के उन तकनीकी विंग के जवानों के लिए अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो संवेदनशील रक्षा प्रणालियों को संभालते हैं. कम कार्यकाल के कारण इन हथियारों पर पूर्ण महारत हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

जवानों की कमी को रोकने का प्रयास

हर साल सेना से एक तय संख्या में नियमित जवान सेवानिवृत्त (रिटायर) होते हैं. ऐसे में अधिकारियों का मानना है कि यदि बहुत कम संख्या में अग्निवीरों को स्थायी सेवा में रखा गया, तो आने वाले कुछ समय के लिए सेना में अनुभवी जवानों की अस्थायी कमी हो सकती है. हालांकि, अधिकारियों का यह भी कहना है कि कुछ वर्षों में यह स्थिति सामान्य हो जाएगी.

इसके अलावा, लंबा कार्यकाल सैनिकों को अपने साथियों के साथ बेहतर तालमेल और भरोसा बनाने का मौका देता है. कठिन परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण तैनाती के दौरान जवानों के बीच आपसी समझ और टीम भावना को मजबूत करने के लिए सेवा अवधि का लंबा होना सहायक माना जाता है.

योजना अभी मूल्यांकन के दौर में: पूर्व थलसेना प्रमुख

अग्निपथ योजना के तहत भर्ती किए गए अग्निवीरों के शुरुआती बैच ने साल 2023 की शुरुआत में अपनी ट्रेनिंग शुरू की थी. इन शुरुआती बैचों के अग्निवीर इस साल (2026) के आखिर तक अपनी चार साल की सेवा पूरी कर लेंगे.

पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि अग्निपथ योजना सेना में एक बड़ा मानव संसाधन सुधार (मैनपावर रिफॉर्म) है. उन्होंने स्पष्ट किया था कि यह अभी एक विकसित होती हुई प्रक्रिया है. पहले बैच का कार्यकाल समाप्त होने के बाद मिले ऑपरेशनल फीडबैक और सेना के समग्र आकलन के आधार पर ही योजना में किसी भी तरह के बदलाव या सुधार का फैसला लिया जाएगा.

पृष्ठभूमि: पेंशन को लेकर केंद्र सरकार का रुख

इस बीच, केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर एक हलफनामे में यह स्पष्ट किया है कि अग्निवीर नियमित सैनिकों की श्रेणी में नहीं आते हैं. सरकार के अनुसार, युद्ध या किसी सैन्य कार्रवाई के दौरान यदि किसी अग्निवीर की मृत्यु होती है, तो उनके परिवार को सामान्य सैनिकों की तरह मिलने वाली पारंपरिक पेंशन का लाभ नहीं दिया जा सकता. उनके लिए सेवा निधि और विशेष अनुग्रह राशि का प्रावधान अलग से किया गया है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 06, 2026 09:59 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).