Energy Drinks Label: पेप्सी, रेड बुल और मोंस्टर को लेबल से 'एनर्जी ड्रिंक' शब्द हटाने के लिए 90 दिनों का अल्टीमेटम; FSSAI का बड़ा फैसला

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पेप्सी, रेड बुल और मोंस्टर जैसी प्रमुख पेय निर्माता कंपनियों को अपने उत्पाद लेबल से 'एनर्जी ड्रिंक' शब्द हटाने का निर्देश दिया है. नियामक का कहना है कि इस श्रेणी के लिए कोई आधिकारिक मानक मौजूद नहीं हैं और ऐसे दावों से उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं.

पेप्सी, FSSAI और रेड बुल (Photo Credits: Wikimedia Commons and Wikipedia)

नई दिल्ली: भारत के खाद्य सुरक्षा नियामक, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. एफएसएसएआई ने पेप्सी (Pepsi), रेड बुल (Red Bull), मोंस्टर (Monster), रिलायंस (Campa Energy) और हेल एनर्जी (Hell Energy) जैसी दिग्गज कंपनियों को अपने लेबल से 'एनर्जी ड्रिंक' (Energy Drink) शब्द हटाने का निर्देश दिया है.

नियामक ने स्पष्ट किया है कि भारत में इस श्रेणी के लिए कोई आधिकारिक मानक तय नहीं हैं, जिसके कारण ऐसे शब्द उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं. कंपनियों को इन बदलावों को लागू करने के लिए 90 दिनों का समय दिया गया है. यह भी पढ़ें: FSSAI Advisory: खाने-पीने की चीजों को अखबार में पैक करने या परोसने पर लगी रोक, FSSAI ने स्वास्थ्य के लिए बताया गंभीर खतरा

नियामक का रुख और 90 दिनों की समयसीमा

एफएसएसएआई के अनुसार, "शरीर और दिमाग को स्फूर्ति देता है" (vitalises body and mind) या "सामान्य कमजोरी में मददगार" जैसे विज्ञापन वाक्य उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकते हैं.

उद्योग प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में एफएसएसएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रजीत पुन्हानी ने स्पष्ट किया कि यदि कंपनियां इस फैसले से असहमत हैं, तो वे इसे अदालत में चुनौती दे सकती हैं. हालांकि, सरकारी सूत्रों के अनुसार, पेय कंपनियों के प्रतिनिधि इस निर्देश का पालन करने और अगले 90 दिनों के भीतर पैकेजिंग में बदलाव करने पर सहमत हो गए हैं.

पेय उद्योग की प्रतिक्रिया और बाजार का दायरा

पेय पदार्थ निर्माता कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली 'इंडियन बेवरेज एसोसिएशन' (Indian Beverage Association) ने एफएसएसएआई से इस मामले में बातचीत के जरिए समाधान निकालने का आग्रह किया था. संगठन ने 6 जुलाई को लिखे पत्र में चेतावनी दी थी कि सार्वजनिक रूप से ऐसे निर्देश जारी करने से ब्रांड की साख को नुकसान पहुंच सकता है और व्यापार प्रभावित हो सकता है.

यह विनियामक कदम ऐसे समय में आया है जब भारत में उच्च-कैफीन वाले पेय पदार्थों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है.

राज्यों में कार्रवाई और ई-कॉमर्स पर असर

एफएसएसएआई के इस रुख के बाद राज्य स्तर पर प्रवर्तन कार्रवाई (Enforcement Action) शुरू हो गई है. राजस्थान में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने स्टिंग, कैम्पा एनर्जी और रेड बुल जैसे ब्रांडों की हजारों बोतलें जब्त की हैं.

इसके अलावा, राजस्थान सरकार ने 8 जुलाई को अमेज़न (Amazon), फ्लिपकार्ट (Flipkart), ब्लिंकिट (Blinkit) और स्विगी इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart) जैसे प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को इन पेय पदार्थों को 'एनर्जी ड्रिंक' के रूप में विज्ञापित या प्रचारित करने से रोकने का निर्देश जारी किया है.

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