8th Pay Commission: हर 10 साल का इंतजार होगा खत्म? वेतन और पेंशन में 5 साल के रिवीजन चक्र की मांग; चंडीगढ़ दौरे से पहले यूनियनों ने खोला मोर्चा
केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन व भत्तों की समीक्षा के लिए गठित 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष कर्मचारी संगठनों ने 10 साल के पारंपरिक वेतन पुनरीक्षण चक्र को समाप्त करने की जोरदार मांग उठाई है. कर्मचारी यूनियनों ने प्रस्ताव रखा है कि बढ़ती महंगाई और गिरती क्रय शक्ति से निपटने के लिए वेतन और पेंशन में हर 5 वर्ष में संशोधन किया जाना चाहिए.
नई दिल्ली: केंद्र सरकार के सेवारत कर्मचारियों और पेंशनर्स के वित्तीय भविष्य को आकार देने वाले 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) के विचार-विमर्श में एक बड़ा नीतिगत बदलाव चर्चा का केंद्र बन गया है. विभिन्न केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों ने वेतन आयोग के समक्ष मांग रखी है कि वेतन और पेंशन में संशोधन की व्यवस्था को पारंपरिक 10 साल के चक्र से घटाकर हर 5 वर्ष (5-Year Revision Cycle) किया जाए.
पुडुचेरी में अपनी परामर्श बैठकें समाप्त करने के बाद आयोग 16 से 18 सितंबर 2026 तक चंडीगढ़ में हितधारकों से संवाद करेगा. इससे पहले आयोग दिल्ली, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और लद्दाख का दौरा कर विभिन्न कर्मचारी संघों से इनपुट ले चुका है. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission Fitment Factor: 3.83 या 4.0 फिटमेंट फैक्टर से कितनी बढ़ सकती है सरकारी कर्मचारियों की सैलरी? जानें पूरा गणित
10 साल का इंतजार क्यों खत्म करना चाहती हैं यूनियनें?
Livemint की रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारी संघों का तर्क है कि 10 वर्षों का लंबा अंतराल मुद्रास्फीति के दौर में कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों की वास्तविक आय को गंभीर रूप से प्रभावित करता है:
- क्रय शक्ति में गिरावट: एक दशक का लंबा अंतराल आने तक महंगाई के कारण बेसिक वेतन और पेंशन की वास्तविक क्रय शक्ति (Purchasing Power) काफी घट जाती है.
- DA से केवल आंशिक राहत: यूनियनों का कहना है कि साल में दो बार मिलने वाला महंगाई भत्ता (DA) केवल आंशिक राहत देता है, जबकि कई आवश्यक भत्ते वर्षों तक अपरिवर्तित रहते हैं और केवल वेतन आयोग के गठन पर ही संशोधित होते हैं.
प्रमुख संगठनों के मुख्य प्रस्ताव
विभिन्न कर्मचारी और पेंशनभोगी निकायों ने आयोग को सौंपे गए ज्ञापनों में कई ठोस सुधार सुझाए हैं:
| संगठन | मुख्य प्रस्ताव / मांग |
| भारत पेंशनर्स समाज (BPS) | 10 साल के पारंपरिक चक्र को समाप्त कर हर 5 वर्ष में वेतन और पेंशन का पुनरीक्षण लागू किया जाए। |
| नेशनल काउंसिल-JCM (स्टाफ साइड) | मुद्रास्फीति के मुकाबले वेतन की प्रासंगिकता और पर्याप्तता बनाए रखने के लिए समयबद्ध आवधिक वेतन वृद्धि की जाए। |
| रेलवे सीनियर सिटिजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) | बढ़ती जीवन-यापन लागत को संतुलित करने के लिए मुद्रास्फीति या लागत सूचकांक आधारित नियमित व व्यापक समीक्षा हो। |
| फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस (FNPO) | 10-वर्षीय आयोग की जगह 'स्थायी वेतन समीक्षा निकाय' (Permanent Wage Review Body) बने और DA के 50% पार होते ही फिटमेंट फैक्टर की स्वतः समीक्षा हो। |
ऐतिहासिक मिसाल: सार्वजनिक उपक्रमों में 5-वर्षीय व्यवस्था
Upstox की रिपोर्ट के अनुसार, 5-वर्षीय चक्र की मांग कोई नई नहीं है.. इससे पहले 7वें वेतन आयोग के समक्ष भी भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) ने यह तर्क दिया था कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) और बैंकिंग संस्थानों में ऐतिहासिक रूप से 5-वर्षीय वेतन संशोधन व्यवस्था अपनाई जाती रही है. कर्मचारी प्रतिनिधियों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के तेज विस्तार और कर संग्रह में हुई मजबूत वृद्धि के चलते सरकार इस वित्तीय भार को संभालने में सक्षम है.
चंडीगढ़ बैठक के बाद आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले 8वें वेतन आयोग में प्रोफेसर पुलक घोष (अंशकालिक सदस्य) और पूर्व आईएएस अधिकारी पंकज जैन (सदस्य-सचिव) शामिल हैं.
आयोग देश के विभिन्न राज्यों का दौरा कर सभी सेवा संवर्गों की मांगों का विश्लेषण कर रहा ह. यह आयोग 5-वर्षीय चक्र की सिफारिश करेगा, महंगाई से जुड़े स्वतः संशोधन का फॉर्मूला सुझाएगा या उच्च फिटमेंट फैक्टर लागू करेगा, यह अंतिम रिपोर्ट आने पर ही स्पष्ट होगा. आयोग की विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी, जिसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल के अनुमोदन से नया वेतन व पेंशन ढांचा प्रभावी होगा.