8th Pay Commission: 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ तो ₹46,260 हो जाएगी न्यूनतम बेसिक सैलरी; जानें लेवल-वार वेतन, पैनल के सदस्य और कब से होगा लागू
केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन ढांचे की समीक्षा के लिए गठित आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के तहत यदि 7वें वेतन आयोग के 2.57 फिटमेंट फैक्टर को बरकरार रखा जाता है, तो केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में लगभग 2.57 गुना की सीधी बढ़ोतरी हो सकती है.
नई दिल्ली: केंद्र सरकार के 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों, सैन्य कर्मियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन में बदलाव को लेकर आठवां केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) तेजी से चर्चा के केंद्र में आ गया है. वेतन आयोग के गठन के बाद से सबसे ज्यादा ध्यान 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) पर टिका है, जो नए वेतन ढांचे में बेसिक पे तय करने का मुख्य गुणक (Multiplier) होता है.
यदि आठवां वेतन आयोग पिछले सातवें वेतन आयोग के 2.57 फिटमेंट फैक्टर को ही आधार बनाता है, तो पे-मैट्रिक्स के हर स्तर पर कर्मचारियों के मूल वेतन में बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission News: देरी से लागू हुआ 8वां वेतन आयोग तो कितना बढ़ेगा एरियर? जानें लेवल 6 से 8 तक का पूरा हिसाब
क्या है फिटमेंट फैक्टर और इसका गणित?
वेतन आयोगों में फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल कर्मचारियों के मौजूदा बेसिक पे को नए पे-मैट्रिक्स के संशोधित बेसिक पे में बदलने के लिए किया जाता है:
- फॉर्मूला: संशोधित बेसिक पे = वर्तमान बेसिक पे × फिटमेंट फैक्टर
- महत्व: यह संशोधित बेसिक पे न केवल कर्मचारी का मुख्य वेतन तय करता है, बल्कि महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता (TA) और सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली ग्रेच्युटी व पेंशन का आधार भी बनता है.
- 7वें वेतन आयोग का इतिहास: सातवें वेतन आयोग ने 57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था, जिसके बाद न्यूनतम बेसिक पे ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 प्रति माह हो गया था.
2.57 फिटमेंट फैक्टर पर लेवल-वार संभावित बेसिक सैलरी
वेतन आयोग के मौजूदा पे-मैट्रिक्स और 2.57 के संभावित गुणक के आधार पर विभिन्न स्तरों पर वेतन में अनुमानित बदलाव इस प्रकार हो सकता है:
| पे-मैट्रिक्स लेवल | 6th CPC बेसिक पे | 7th CPC बेसिक पे (2.57 फैक्टर) | 8th CPC अनुमानित बेसिक पे (2.57 फैक्टर) |
| लेवल 1 (प्रारंभिक स्तर) | ₹7,000 | ₹18,000 | ₹46,260 |
| लेवल 3 | ₹8,444 | ₹21,700 | ₹55,769 |
| लेवल 7 | ₹17,471 | ₹44,900 | ₹1,15,393 |
| लेवल 10 (अधिकारी स्तर) | ₹21,829 | ₹56,100 | ₹1,44,177 |
| लेवल 13 | ₹47,899 | ₹1,23,100 | ₹3,16,367 |
| लेवल 18 (शीर्ष स्तर/कैबिनेट सचिव) | ₹97,276 | ₹2,50,000 | ₹6,42,500 |
कर्मचारी संगठनों की मांग: 2.57 से अधिक हो गुणक
कर्मचारी संघों और पेंशनर्स फेडरेशनों का मानना है कि पिछले एक दशक में बढ़ी महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए 2.57 का गुणक पर्याप्त नहीं होगा:
- विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम 83 से लेकर 3.83 (और कुछ संघों ने 4.0 तक) तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है.
- यदि 0 से 3.83 के बीच कोई फिटमेंट फैक्टर मंजूर होता है, तो न्यूनतम मूल वेतन ₹54,000 से ₹68,000 प्रति माह तक पहुंच सकता है. हालांकि, अंतिम आंकड़े आयोग की वित्तीय समीक्षा पर निर्भर करेंगे.
8वें वेतन आयोग के पैनल में कौन-कौन शामिल हैं?
Livemint की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने पैनल में अनुभवी विशेषज्ञों को जिम्मेदारी सौंपी है:
- अध्यक्ष: सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई.
- सदस्य-सचिव: पूर्व आईएएस अधिकारी पंकज जैन.
- सदस्य: प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (PMEAC) के सदस्य और वित्त के प्रोफेसर पुलक घोष.
यह समिति वेतनमान, भत्तों, पेंशन समानता और पदोन्नति नियमों की समीक्षा के साथ-साथ प्रशासनिक दक्षता और सरकारी खजाने पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ में संतुलन साधने का काम कर रही है. इसके लिए आयोग बेंगलुरु, मुंबई, चंडीगढ़ और दिल्ली सहित देश के प्रमुख शहरों में कर्मचारी संघों से प्रत्यक्ष सुझाव जुटा रहा है.
कब तक लागू हो सकता है 8वां वेतन आयोग?
Livemint की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग की समय-सीमा और क्रियान्वयन की संभावित रूपरेखा इस प्रकार है:
- रिपोर्ट सौंपने की मियाद: आयोग का गठन नवंबर 2025 के अंत में हुआ था और इसे अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है, जिसकी अंतिम तिथि मई 2027 के आसपास है.
- प्रारंभिक मसौदा: प्रारंभिक सिफारिशें या अंतरिम घोषणाएं फरवरी से अप्रैल 2027 के बीच सामने आ सकती हैं.
- कैबिनेट मंजूरी और रोलआउट: रिपोर्ट पेश होने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल की समीक्षा और अधिसूचना जारी होगी. मंत्रालयों, रेलवे डिवीजनों और रक्षा प्रतिष्ठानों में ऐतिहासिक रोलआउट प्रक्रियाओं को देखते हुए नए वेतनमान का पूर्ण क्रियान्वयन 2029 से 2030 के बीच जमीन पर उतरने का अनुमान है.