8th Pay Commission: 3.83 से 4.0 तक फिटमेंट फैक्टर की मांग; बेसिक सैलरी ₹18,000 से बढ़कर हो सकती है ₹72,000, समझें पेंशन और वेतन का पूरा गणित

केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष फिटमेंट फैक्टर को 3.83 से 4.0 के बीच तय करने की जोरदार मांग रखी है. यदि सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार करती है, तो कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन मौजूदा ₹18,000 से सीधे बढ़कर ₹68,940 या ₹72,000 प्रति माह हो सकता है. इसी अनुपात में न्यूनतम बेसिक पेंशन भी ₹9,000 से बढ़कर ₹34,470 या ₹36,000 तक पहुंच जाएगी.

8th Pay Commission Latest News (Photo Credits: File Photo)

नई दिल्ली: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन ढांचे में संशोधन को लेकर गठित 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) की गतिविधियां तेज हो गई हैं.। बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को आधार बनाते हुए कर्मचारी संगठनों ने इस बार फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) को 3.83 से 4.0 के दायरे में रखने की मांग की है.

रिपोर्ट के अनुसार, यदि आयोग और केंद्र सरकार इस मांग पर मुहर लगाते हैं, तो लेवल-1 (एंट्री लेवल) के कर्मचारियों के मूल वेतन में चार गुना तक की ऐतिहासिक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. यह भी पढ़ें: 8वां वेतन आयोग: महंगाई राहत (DR) की गणना कैसे होती है और पेंशनभोगी संगठन क्या बदलाव चाहते हैं? जानें सब कुछ

आयोग का गठन और रिपोर्ट की समयसीमा

केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में 8वें वेतन आयोग का औपचारिक गठन किया था:

फिटमेंट फैक्टर का इतिहास और संगठनों के तर्क

फिटमेंट फैक्टर वह गुणक (Multiplier) होता है, जिसके जरिए पुराने वेतन आयोग के बेसिक पे को नए वेतन आयोग में बदला जाता है:

सैलरी और पेंशन पर संभावित असर: 3.83 बनाम 4.0 फिटमेंट फैक्टर

प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर लागू होने की स्थिति में केंद्रीय कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों की आय में इस प्रकार बदलाव देखा जा सकता है:

पद / श्रेणी मौजूदा स्तर (7वां वेतन आयोग) 3.83 फिटमेंट फैक्टर पर 4.0 फिटमेंट फैक्टर पर
न्यूनतम बेसिक पे (Level-1) ₹18,000 ₹68,940 ₹72,000
न्यूनतम बेसिक पेंशन ₹9,000 ₹34,470 ₹36,000

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि बेसिक पे में होने वाली यह वृद्धि केवल शुरुआती आधार तय करेगी. इसके ऊपर मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता (TA) और महंगाई भत्ता (DA) को नए सिरे से पुनर्गठित किया जाएगा, जिससे कर्मचारियों की कुल इन-हैंड (Gross Take-Home) सैलरी में काफी बड़ा उछाल आएगा.

अंतिम फैसले के लिए कैबिनेट की मंजूरी जरूरी

वेतन विशेषज्ञों का कहना है कि 3.83 और 4.0 के आंकड़े फिलहाल कर्मचारी संघों द्वारा प्रस्तुत किए गए मांग पत्र (Memorandum) का हिस्सा हैं. आयोग सभी आर्थिक पहलुओं, केंद्र सरकार की राजकोषीय क्षमता और मुद्रास्फीति के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद ही अपनी आधिकारिक सिफारिश तय करेगा. आयोग द्वारा अपनी रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल की अंतिम स्वीकृति मिलने पर ही नए पे-मैट्रिक्स और भत्तों की अंतिम दरें अधिसूचित होंगी.

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