MP Fake Passport Racket: बौद्ध मठों के पते पर बने 70 फर्जी पासपोर्ट, एक ही गवाह का कई आवेदन में इस्तेमाल; STF ने छह आरोपियों को किया गिरफ्तार

STF ने इस मामले की जांच अब मध्य प्रदेश से बाहर असम, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब तक बढ़ा दी है. जांच एजेंसी अब तक करीब 75 संदिग्ध आरोपियों की पहचान कर चुकी है. इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि क्या फर्जी दस्तावेज, झूठे निवास प्रमाण और अन्य प्रक्रियागत खामियों का इस्तेमाल कर सुनियोजित तरीके से पासपोर्ट बनवाए गए.

MP Fake Passport Racket Update: मध्य प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने फर्जी पासपोर्ट रैकेट की जांच के दौरान बड़ा खुलासा किया है. जांच में अब तक करीब 70 ऐसे पासपोर्ट सामने आए हैं, जो कथित तौर पर राज्य के अलग-अलग पतों का इस्तेमाल कर बनवाए गए थे. जांच एजेंसी को कई पासपोर्ट आवेदनों में बौद्ध मठों के पते और एक ही गवाहों का बार-बार इस्तेमाल होने के सबूत मिले हैं. STF इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है. यह भी पढ़ें: Bengaluru: जेंडर करेक्टेड पासपोर्ट बनवाने के लिए पुरुष बना महिला

बौद्ध मठों के पते का कई पासपोर्ट आवेदनों में इस्तेमाल

STF के मुताबिक, भोपाल, बैतूल, छिंदवाड़ा, डबरा और पांढुर्ना में स्थित बौद्ध मठों के पते का कई पासपोर्ट आवेदनों में इस्तेमाल किया गया. जांच में भोपाल के अन्ना नगर स्थित पते से जुड़े करीब 40 मामले, डबरा के 17 मामले, बैतूल के आमला बौद्ध मठ से जुड़े 11 मामले और छिंदवाड़ा-पांढुर्ना के 2 मामले सामने आए हैं. इससे पहले भी जांच में भोपाल के अन्ना नगर के पते पर दर्जनों पासपोर्ट जारी होने की बात सामने आई थी.

एक ही गवाहों का कई आवेदन में इस्तेमाल

जांच में STF को एक और अहम सुराग मिला है. अब तक सामने आए 70 मामलों में से करीब 50 मामलों में गयाप्रसाद गौतम, गुलाब राय और रियाल चौधरी उर्फ भंते मेटानंद को गवाह के रूप में दिखाया गया है. इन तीनों के मोबाइल नंबर भी कई पासपोर्ट आवेदनों में दर्ज मिले हैं. STF का मानना है कि यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था.

पासपोर्ट सेवा केंद्र के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

STF के DIG राहुल लोधा ने बताया कि जांच एजेंसी पासपोर्ट सेवा केंद्र से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की संभावित भूमिका की भी जांच कर रही है. शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि कुछ पासपोर्ट अधिकारियों या कर्मचारियों की मिलीभगत से तैयार किए गए हो सकते हैं. इसी वजह से आवेदन प्रक्रिया से जुड़े सभी लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है.

अब तक छह आरोपी गिरफ्तार

STF अब तक इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. गिरफ्तार आरोपियों में रियाल चौधरी उर्फ भंते मेटानंद, विप्लब अधिकारी, प्रियां रॉय, जॉय चौधरी, नसीम अख्तर और गयाप्रसाद गौतम शामिल हैं. इनमें 23 सितंबर को गिरफ्तार किए गए गयाप्रसाद गौतम पर कई पासपोर्ट आवेदनों में गवाह बनने का आरोप है.

छह राज्यों तक पहुंची जांच

STF ने इस मामले की जांच अब मध्य प्रदेश से बाहर असम, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब तक बढ़ा दी है. जांच एजेंसी अब तक करीब 75 संदिग्ध आरोपियों की पहचान कर चुकी है. इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि क्या फर्जी दस्तावेज, झूठे निवास प्रमाण और अन्य प्रक्रियागत खामियों का इस्तेमाल कर सुनियोजित तरीके से पासपोर्ट बनवाए गए. जांच में पहले भोपाल नगर निगम के फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल की बात भी सामने आ चुकी है.

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