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अब भी स्वतंत्र आर्थिक फैसले नहीं ले पाती हैं 59 फीसदी भारतीय कामकाजी महिलाएं: सर्वे

भारतीय महिलाएं पहले के मुकाबले अब काफी हद तक स्वतंत्र हो रही हैं, लेकिन यह अभी भी पर्याप्त नहीं है. महिलाएं घर से बाहर निकल कर काम जरूर कर रही हैं लेकिन बावजूद इसके वे वित्तीय निर्णय नहीं ले पाती हैं.

अब भी स्वतंत्र आर्थिक फैसले नहीं ले पाती हैं 59 फीसदी भारतीय कामकाजी महिलाएं: सर्वे
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo: PIxabay)

भारतीय महिलाएं पहले के मुकाबले अब काफी हद तक स्वतंत्र हो रही हैं, लेकिन यह अभी भी पर्याप्त नहीं है. महिलाएं घर से बाहर निकल कर काम जरूर कर रही हैं लेकिन बावजूद इसके वे वित्तीय निर्णय नहीं ले पाती हैं. एक सर्वे में खुलासा हुआ है भारतीय महिलाएं अब भी स्वतंत्र वित्तीय निर्णय लेने से कतराती हैं. महिलाओं के बीच वित्तीय जागरूकता के बारे में जीवन बीमा (Tata AIA) सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि जब वित्तीय निर्णय लेने की बात आती है तो वे अभी भी 'घर के आदमी' पर भरोसा करती हैं. Cancer Prevention: कैंसर से बचना है तो 20 और 30 साल की उम्र में करें ये पांच उपाय. 

टाटा एआईए के अनुसार, महिलाओं के बीच वित्तीय जागरूकता के बारे में सर्वेक्षण से पता चलता है कि 59 फीसदी महिलाएं स्वतंत्र रूप से अपने खर्चे पर निर्णय नहीं लेती हैं. हालांकि, एक विकल्प को देखते हुए, 44 फीसदी महिलाएं अपने वित्तीय निर्णय खुद लेने के लिए तैयार हैं.

पहले पिता तो बाद में पति लेता है निर्णय

सर्वेक्षण के मुताबिक 89 प्रतिशत विवाहित महिलाएं वित्तीय नियोजन के लिए अपने जीवनसाथी पर निर्भर हैं. शादी से पहले, पिता महिलाओं के लिए वित्तीय निर्णयों के लिए जिम्मेदार होते हैं. वहीं शादी के बाद वित्तीय निर्णय पति लेने लगता है.

सर्वेक्षण ने यह भी संकेत दिया कि चूंकि शादी करने वाली महिलाओं की औसत आयु 20-22 वर्ष है, इसलिए उन्हें अपने वित्त के बारे में निर्णय लेने की स्वतंत्रता नहीं है. इस प्रकार, महिलाओं के लिए वित्तीय निर्णय लेने में स्वतंत्रता को बाधित करने में विवाह सबसे प्रमुख निवारक कारकों में से एक है.

मासिक बजट तक सीमित हैं महिलाएं

सर्वेक्षण में शामिल 39 फीसदी महिलाओं के लिए, वित्तीय नियोजन मासिक बजट की योजना बनाने तक ही सीमित है. वित्तीय नियोजन की बेहतर समझ रखने वाली 42 फीसदी महिलाओं में से केवल 12 फीसदी गृहिणी हैं. सर्वेक्षण के निष्कर्षों के अनुसार, ज्यादातर महिलाओं के आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें अपने वित्त संबंधी निर्णय लेने की स्वतंत्रता है.

कामकाजी महिलाओं में, 59 फीसदी स्वतंत्र रूप से अपने वित्त पर निर्णय नहीं लेती हैं. टियर 3 बाजारों में अनुपात अधिक है, जहां 65 फीसदी कामकाजी महिलाएं स्वतंत्र वित्तीय निर्णय नहीं लेती हैं. यह व्यवहार महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता की गहन कोशिशों के बावजूद है, जिस पर दशकों से व्यापक रूप से विचार-विमर्श किया गया है.

वित्तीय स्वतंत्रता कितनी?

महिला सशक्तिकरण के लिए कानूनों को भी मजबूत किया गया है, और समाज में महिलाओं की स्थिति के संबंध में पिछले कुछ वर्षों में सकारात्मक बदलाव आया है, लेकिन फिर भी जब वित्तीय नियोजन की बात आती है तो महिलाओं को मौका नहीं मिलता है. कई जगह महिलाओं को अन्य लोगों द्वारा रोका जाता है तो कहीं खुद उनके मन में कई प्रकार की चीजें होती हैं.

प्राथमिकताओं के बारे में पूछे जाने पर सर्वेक्षण से पता चला कि महिलाएं अपने परिवार की वित्तीय सुरक्षा को अपने ऊपर प्राथमिकता देती हैं. विभिन्न वित्तीय साधनों में, 62 प्रतिशत महिलाएं अपने परिवारों के लाभ के लिए बैंक एफडी में निवेश करने में अधिक सहज हैं. हालांकि, जब उनसे अपनी पसंद के बारे में पूछा गया तो उन्होंने अपने जीवनसाथी के फैसले पर भरोसा जताया.

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 12, 2022 04:11 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).