Karur Rally से लेकर Maha Kumbh तक... 20 सालों में भगदड़ से 1408 लोगों की मौत! यहां देखें 21 बड़ी घटनाओं की लिस्ट
पिछले 20 सालों में धार्मिक समारोहों, राजनीतिक समारोहों और त्योहारों में भीड़ प्रबंधन की कमी के कारण सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है.
Vijay’s TVK Rally Stampede: तमिलनाडु के करूर जिले (Karur Stampede) में शनिवार शाम अभिनेता से नेता बने विजय की चुनावी रैली (Vijay's Political rally) में एक बड़ा हादसा हो गया. भारी भीड़ अचानक बेकाबू हो गई और भगदड़ मच गई. इस अफरा-तफरी में 31 लोगों की मौत हो गई, जबकि 40 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कम जगह और भीड़भाड़ के कारण लोगों को घुटन महसूस हुई. कई लोग बेहोश हो गए, जिससे भगदड़ (Tamil Nadu Stampede) मच गई.
भारत में ऐसे हादसे कोई नए नहीं हैं. पिछले 20 सालों में धार्मिक समारोहों, राजनीतिक समारोहों और त्योहारों में भीड़ प्रबंधन की कमी (Lack of Crowd Management) के कारण सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है.
प्रमुख भगदड़ की घटनाएं (2003-2025)
- 4 जून, 2025: बेंगलुरु, आरसीबी आईपीएल जीत का जश्न, 11 मौतें.
- 3 मई, 2025: गोवा, श्री लैराई देवी मंदिर उत्सव, 6 मौतें, 100 घायल.
- 15 फरवरी, 2025: नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, कुंभ यात्रा की भीड़, 18 मौतें.
- 29 जनवरी, 2025: प्रयागराज, महाकुंभ स्नान, 30 मौतें, 60 घायल.
- 8 जनवरी, 2025: तिरुमाला हिल्स, टिकटों के लिए धक्का-मुक्की, 6 मौतें.
- 4 दिसंबर, 2024: हैदराबाद, पुष्पा II की स्क्रीनिंग, 1 मौत, 1 घायल.
- 2 जुलाई, 2024: हाथरस, भोले बाबा सत्संग, 100-120 मौतें.
- 31 मार्च, 2023: इंदौर, रामनवमी के एक आयोजन के दौरान एक बावड़ी के ढहने से 36 मौतें.
- 1 जनवरी, 2022: जम्मू और कश्मीर, वैष्णो देवी मंदिर, 12 मौतें.
- 29 सितंबर, 2017: मुंबई, एलफिंस्टन रेलवे ब्रिज, 23 मौतें.
- 14 जुलाई, 2015: आंध्र प्रदेश, पुष्करम उत्सव, 27 मौतें.
- 3 अक्टूबर, 2014: पटना, गांधी मैदान, 32 मौतें.
- 13 अक्टूबर, 2013: मध्य प्रदेश, रतनगढ़ मंदिर, 115 मौतें.
- 19 नवंबर, 2012: पटना, छठ पूजा, 18 मौतें.
- 8 नवंबर, 2011: हरिद्वार, हर-की-पौड़ी घाट, 20 मौतें.
- 14 जनवरी, 2011: केरल, सबरीमाला (पुलमेडु दुर्घटना), 104 मौतें.
- 4 मार्च, 2010: उत्तर प्रदेश, कृपालु महाराज मंदिर, 63 मौतें.
- 30 सितंबर, 2008: जोधपुर, चामुंडा देवी मंदिर, 220-250 मौतें.
- 3 अगस्त 2008: हिमाचल प्रदेश, नैना देवी मंदिर, 162 मौतें.
- 25 जनवरी 2005: महाराष्ट्र, मंधार देवी मंदिर, लगभग 340 मौतें.
- 27 अगस्त, 2003: नासिक, कुंभ मेला, 39 मौतें.
क्या हमारी भीड़ प्रबंधन की तैयारियां सही हैं?
इतिहास गवाह है कि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था (Crowd Control and Security Arrangements) की कमी के कारण भारत में बार-बार ऐसी त्रासदियां होती हैं. करूर की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारी भीड़ प्रबंधन की तैयारियां पर्याप्त हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े आयोजनों के दौरान सिर्फ पुलिस (Tamil Nadu Stampede) की मौजूदगी बढ़ाना ही काफी नहीं है. प्रवेश-निकास मार्गों की योजना बनाना, चिकित्सा टीमों की उपस्थिति और चरणबद्ध तरीके से भीड़ का प्रबंधन करना बेहद जरूरी है.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 27, 2025 11:25 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

