Toxic Movie Review: बड़े पर्दे पर एक्शन की आंधी लेकर आए यश, डबल रोल में दिखा दमदार अंदाज
सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स' आखिरकार आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और इसने आते ही बड़ा धमाका कर दिया है. प्रतिभावान निर्देशक गीतू मोहनदास के कुशल निर्देशन में बनी इस भव्य फिल्म का निर्माण मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस और केवीएन प्रोडक्शंस के बैनर तले खुद यश और वेंकट के. नारायण द्वारा मिलकर किया गया है.
Toxic Movie Review: सुपरस्टार यश (Yash) की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स' (Toxic: A Fairytale for Grown-Ups) आखिरकार आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और इसने आते ही बड़ा धमाका कर दिया है. प्रतिभावान निर्देशक गीतू मोहनदास (Geetu Mohandas) के कुशल निर्देशन में बनी इस भव्य फिल्म का निर्माण मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस और केवीएन प्रोडक्शंस के बैनर तले खुद यश और वेंकट के. नारायण द्वारा मिलकर किया गया है. लेटेस्टली हिंदी इस सिनेमाई मास्टरपीस को 3.5 स्टार्स की रेटिंग देता है और इसकी वजह जानने के लिए पढ़ें फिल्म का ये रिव्यू. यह भी पढ़ें: ‘Toxic’: ‘'टॉक्सिक’ के रोमांटिक गाने ‘मदहोश’ से तारा सुतारिया ने शेयर कीं यश संग खूबसूरत तस्वीरें, फैंस पर चला रोमांस का जादू (See Pics)
कहानी
‘टॉक्सिक’ को सिर्फ एक साधारण एक्शन ड्रामा कहना इसके साथ नाइंसाफी होगी. यह फिल्म दर्शकों को अपराध और ताकत के एक ऐसे अंधेरे साम्राज्य में ले जाती है, जहां गोलियों की गूंज के साथ-साथ प्यार, वफादारी, परिवार और गहरे मानवीय रिश्तों की एक संवेदनशील जंग भी जारी रहती है. कहानी की शुरुआत होती है खतरनाक गैंगस्टर राया से, जिसके लिए वफादारी ही उसका सब कुछ है. लेकिन जब उसके बेटे टिकट की एंट्री होती है, तो कहानी एक बेहद भावुक मोड़ ले लेती है. राया की जिंदगी से जुड़े कई अनकहे राज, अतीत के पन्ने और रिश्तों की उलझने धीरे-धीरे सामने आती हैं. फिल्म में नादिया और गंगा जैसे किरदार कहानी को एक मजबूत भावनात्मक रीढ़ प्रदान करते हैं. जैसे-जैसे सेकंड हाफ आगे बढ़ता है, बदला और अपनों की रक्षा की यह लड़ाई और ज्यादा हिंसक व असल हो जाती है. फिल्म का क्लाइमैक्स एक ऐसा अप्रत्याशित ट्विस्ट लेकर आता है, जो दर्शकों को पूरी कहानी नए नजरिए से देखने पर मजबूर कर देता है.
अभिनय
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत सुपरस्टार यश का शानदार और स्क्रीन-प्रेजेंस से भरा प्रदर्शन है. यश ने फिल्म में राया और उसके बेटे टिकट का दोहरा किरदार निभाया है. जहां राया के रूप में उनका खतरनाक और रॉ गैंगस्टर अवतार सीटीमार है, वहीं टिकट के किरदार में उन्होंने अपनी गहरी और भावनात्मक अभिनय क्षमता का परिचय दिया है. दोनों ही किरदारों की बॉडी लैंग्वेज, एक्सप्रेशन्स और स्टाइल में यश ने जो फर्क पेश किया है, वह काबिले तारीफ है. सपोर्टिंग कास्ट ने भी फिल्म को मजबूत बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. नयनतारा ने गंगा के रूप में कहानी को भावनात्मक गहराई दी है, वहीं कियारा आडवाणी की नादिया में एक मासूमियत नजर आती है. हुमा कुरैशी अपने एलिजाबेथ के रोल में बेहद प्रभावशाली हैं, जबकि रुक्मिणी वसंत अपने शांत लेकिन दमदार किरदार से अपनी अलग छाप छोड़ती हैं. इसके अलावा तारा सुतारिया, अक्षय ओबेरॉय, डैरेल डी'सिल्वा और सुदेव नायर ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ पूरी ईमानदारी से न्याय किया है.
निर्देशन और संगीत
निर्देशक गीतू मोहनदास ने 'टॉक्सिक' के जरिए साबित कर दिया है कि बड़े कैनवास की मास-एक्शन फिल्मों में भी भावनात्मक गहराई और बेहतरीन स्टोरीटेलिंग को कैसे पिरोया जाता है. फिल्म का पहला हाफ कहानी और किरदारों की नींव बहुत मजबूती से रखता है, जहां जल्दबाजी न करते हुए ड्रामा को समझने का पूरा वक्त दिया गया है. इंटरवल का धमाकेदार सीक्वेंस दर्शकों को आगे की कहानी के लिए पूरी तरह उत्साहित कर देता है. सेकंड हाफ में एक्शन का स्केल और ज्यादा विशाल, इंटेंस और रॉ हो जाता है, जहां असल एनर्जी पर्दे पर उतरती है. वहीं, फिल्म का बैकग्राउंड संगीत हर एक्शन सीक्वेंस को और भी ज्यादा असरदार और थ्रिलिंग बना देता है, जो 3 घंटे 14 मिनट के इस सिनेमाई सफर में दर्शकों की उत्सुकता को लगातार बनाए रखता है.
अंतिम फैसला
'टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स' सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि बड़े पर्दे का एक जादुई और रोमांचक सिनेमाई अनुभव है. यश का स्वैग, गैंगस्टर वर्ल्ड का रियलिस्टिक थ्रिल, रिश्तों का ड्रामा और चौंका देने वाला क्लाइमैक्स इसे एक बेहतरीन सिनेमा बनाते हैं. फिल्म खत्म होने के बाद भी इसके कई हिस्से और इसका असर दिमाग में बना रहता है. अगर आप सिनेमाघरों में एक भव्य एक्शन-इमोशनल थ्रिलर का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो 'टॉक्सिक' को बिल्कुल भी मिस नहीं किया जाना चाहिए.