Cheque Bounce Case: बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की सजा बरकरार, दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाई 3 महीने की जेल

दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस के कई मामलों में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की दोषसिद्धि (कॉन्विक्शन) को बरकरार रखते हुए उन्हें 3 महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई है. कोर्ट ने बार-बार दिए गए आश्वासनों और समझौतों का पालन न करने पर अभिनेता के रुख पर कड़ी नाराजगी जताई.

(Photo Credits Instagram)

नई दिल्ली: अपनी बेहतरीन कॉमेडी के लिए मशहूर बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव (Rajpal Yadav) की मुश्किलें बढ़ गई हैं. दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को अभिनेता के खिलाफ दर्ज चेक बाउंस के विभिन्न मामलों (Cheque Bounce Case) में उनकी दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा है. न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने फैसला सुनाते हुए राजपाल यादव को कुल सात मामलों में से प्रत्येक में तीन महीने की साधारण कारावास (सिंपल इम्प्रिजनमेंट) की सजा सुनाई है. अदालत ने निर्देश दिया है कि ये सभी सजाएं एक साथ (कनकरेंटली) चलेंगी. इसके साथ ही, कोर्ट ने अभिनेता को शिकायतकर्ता कंपनी को एक बड़ी हर्जाना राशि का भुगतान करने का भी आदेश दिया है. यह भी पढ़ें: Rajpal Yadav Case: राजपाल यादव की मुश्किलें बढ़ीं, दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद तिहाड़ जेल में किया सरेंडर; जानें क्या है मामला

भारी-भरकम जुर्माना भरने का आदेश; पत्नी पर भी कोर्ट सख्त

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में वित्तीय देनदारियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने राजपाल यादव को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को प्रत्येक सात मामलों में 1.05 करोड़ रुपये का भुगतान करें. इसके अलावा, 1 करोड़ 4 लाख 75 हजार रुपये अतिरिक्त रूप से शिकायतकर्ता को दिए जाएंगे, जबकि 25,000 रुपये राज्य सरकार के खाते में जमा करने होंगे।

अदालत ने इस मामले में अभिनेता की पत्नी राधा यादव की भूमिका पर भी आदेश पारित किया.  कोर्ट ने राधा यादव को प्रत्येक मामले में शिकायतकर्ता को 5 करोड़ 51 हजार 380 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति शर्मा ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत ने समझौते के तहत यादव द्वारा पहले ही भुगतान की जा चुकी राशि पर विचार किया था, इसलिए मुकदमे के दौरान तय किए गए जुर्माने में कोई कानूनी खामी नहीं है. कोर्ट ने नोट किया कि मामले के लंबित रहने के दौरान अब तक 2.25 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जिसे शेष राशि की गणना करते समय समायोजित (एडजस्ट) किया जाएगा.

दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को 3 महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई

'जज के नरम होने का मतलब उन्हें कमजोर न समझें'

हाई कोर्ट इस बात से बेहद असंतुष्ट था कि राजपाल यादव को अपनी वित्तीय देनदारियां पूरी करने और समझौते की शर्तों का सम्मान करने के लिए अदालत द्वारा दर्जनों बार अवसर दिए गए थे, लेकिन वे हर बार अपने हलफनामे (अंडरटेकिंग) से मुकर गए. सुनवाई के अंतिम चरण में, जब कोर्ट की मध्यस्थता से शिकायतकर्ता कंपनी 6 करोड़ रुपये के 'वन-टाइम सेटलमेंट' के लिए भी तैयार हो गई थी, तब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए यादव ने आगे कोई भी भुगतान करने से इनकार कर दिया और कहा कि वह जेल जाने के लिए तैयार हैं.

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा:

"अगर कोई न्यायाधीश आपके प्रति उदार या अच्छा व्यवहार कर रहा है, तो उन्हें कभी कमजोर समझने की भूल न करें. अदालत से कई बार रियायतें पाने के बावजूद याचिकाकर्ता ने अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं किया."

कोर्ट ने कहा कि इससे पहले एक पूर्ववर्ती पीठ ने इस मामले को मेरिट के आधार पर सुनने से इनकार कर दिया था, लेकिन चूंकि यादव ने तब विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने की इच्छा जताई थी, इसलिए अदालत ने नरमी दिखाई थी.  लेकिन लगातार वादों को तोड़ने के बाद अब और राहत नहीं दी जा सकती.

क्या है पूरा मामला और आगे का विकल्प?

यह पूरा विवाद राजपाल यादव द्वारा अपनी फिल्म के निर्माण और विकास के लिए शिकायतकर्ता कंपनी 'मैसर्स मूरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' (M/s Murli Projects Pvt. Ltd.) से लिए गए एक बड़े लोन से जुड़ा है. लोन चुकाने के लिए दिए गए कई चेक बैंक में बाउंस हो गए थे, जिसके बाद कंपनी ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की थी. मई 2024 में एक सत्र न्यायालय (सेशंस कोर्ट) ने उन्हें छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी, जिसे उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.

इस साल फरवरी 2026 में भी अदालत ने उन्हें तिहाड़ जेल के अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का आदेश दिया था. तब कोर्ट ने साफ कहा था कि कोई व्यक्ति किस पृष्ठभूमि या फिल्म उद्योग से आता है, महज इस आधार पर अदालत किसी के लिए विशेष परिस्थितियां या अलग नियम नहीं बनाएगी. हालांकि, इसके बाद आंशिक भुगतान के आधार पर उनकी सजा का अंतरिम निलंबन जारी रहा था. अब शुक्रवार को आए अंतिम फैसले में हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए दो महीने का समय दिया है, तब तक के लिए उनकी जेल यात्रा पर अस्थायी रोक रहेगी.

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