EPFO Registrations: नौकरीपेशा युवाओं में Gen Z का दबदबा, FY26 में नए रजिस्ट्रेशन में 79% हिस्सेदारी

इस रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि नए पंजीकरणों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 28 प्रतिशत रही, जो संगठित क्षेत्र के श्रम बल में एक बड़े जनसांख्यिकीय बदलाव का संकेत देती है

EPFO Registrations:  भारत की औपचारिक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में देश की युवा पीढ़ी सबसे आगे नजर आ रही है. वर्कफोर्स सॉल्यूशंस प्रदाता 'क्वेस्ट कॉर्प' (Quess Corp) की नवीनतम रिपोर्ट 'पल्स वित्त वर्ष 2026: शेपिंग इंडियाज वर्कफोर्स फ्यूचर' के अनुसार, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत वित्त वर्ष 2026 में जनरेट किए गए सभी नए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) में से 79 प्रतिशत खाते 'जनरेशन जेड' (Gen Z) यानी युवाओं के रहे हैं.

इस रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि नए पंजीकरणों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 28 प्रतिशत रही, जो संगठित क्षेत्र के श्रम बल में एक बड़े जनसांख्यिकीय बदलाव का संकेत देती है.  यह भी पढ़े:   EPFO Pension Status: EPFO पोर्टल, UMANG App, SMS और मिस्ड कॉल से ऐसे चेक करें EPS-95 पेंशन और EPF क्लेम स्टेटस

प्रवेश स्तर की नौकरियों में युवाओं का दबदबा

वित्त वर्ष 2026 में विश्लेषित 57,000 से अधिक नए यूएएन में 18 से 30 वर्ष की आयु के कर्मचारी सबसे बड़ी श्रेणी के रूप में उभरकर सामने आए हैं. केवल 21 से 25 वर्ष की आयु वर्ग ने कुल नए पंजीकरणों में 35 प्रतिशत से अधिक का योगदान दिया है. यह दिखाता है कि पहली बार नौकरी की तलाश कर रहे युवा बड़ी संख्या में औपचारिक रोजगार प्रणाली में शामिल हो रहे हैं.

शुरुआती करियर की अधिकांश नौकरियां मुख्य रूप से रिटेल, ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स, स्टाफिंग और कस्टमर सपोर्ट जैसे उच्च मांग वाले सेवा क्षेत्रों में केंद्रित रही हैं.

छोटे शहरों (Tier-II और Tier-III) में औपचारिक नौकरियों की वृद्धि

रिपोर्ट के निष्कर्षों से पता चलता है कि औपचारिक रोजगार अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रहा है. विश्लेषित वर्कफोर्स में से लगभग 69 प्रतिशत कर्मचारी टियर-II और टियर-III शहरों से जुड़े हैं.

क्षेत्रीय विनिर्माण केंद्रों, फुलफिलमेंट सेंटरों और विकेंद्रीकृत बैक-ऑफिस संचालन के विस्तार से देश के छोटे शहरों में संगठित नौकरियों के अवसर तेजी से बढ़े हैं.

अप्रेंटिसशिप और शिक्षा का बढ़ा स्तर

शिक्षा और उद्योग की जरूरतों के बीच के अंतर को कम करने के लिए नियोक्ताओं ने अप्रेंटिसशिप कार्यक्रमों का सहारा लिया है. राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (NAPS) के तहत करीब 64,000 अनुबंध सुगम बनाए गए, जिनमें ऑटोमोटिव क्षेत्र सबसे आगे रहा.

इसके अलावा, औपचारिक रोजगार में शामिल हो रहे नए कर्मचारियों के शैक्षणिक स्तर में भी सुधार देखा गया है:

विशेषज्ञ की राय और ईपीएफओ का ढांचा

क्वेस्ट कॉर्प के ग्रुप सीईओ लोहित भाटिया ने कहा कि युवाओं का इतनी बड़ी संख्या में औपचारिक वर्कफोर्स में प्रवेश करना अर्थव्यवस्था के लिए एक निर्णायक मोड़ है. उन्होंने जोर देकर कहा कि अब केवल भर्ती पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय युवाओं की 'रोजगार क्षमता' (Employability) का निर्माण करने पर जोर होना चाहिए, जिसमें व्यावहारिक प्रशिक्षण और अप्रेंटिसशिप सबसे प्रभावी माध्यम साबित हो रहे हैं.

कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 के तहत, 15,000 रुपये तक के मूल वेतन वाले कर्मचारियों के लिए ईपीएफओ में नामांकन अनिवार्य होता है. इसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का वैधानिक योगदान शामिल होता है.

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