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Crude Oil Prices Crash: कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, 4 दिनों में 16% टूटा क्रूड ऑयल; भारत में पेट्रोल-डीजल हो सकते हैं सस्ते!

बाजार सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है. इस समझौते के लागू होने के बाद ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना तेल निर्यात फिर से पूरी क्षमता के साथ शुरू करने की मंजूरी मिल सकती है. वैश्विक निवेशकों को उम्मीद है कि इस कदम से बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ेगी और ऊर्जा संकट का दबाव कम होगा.

Crude Oil Prices Crash: कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, 4 दिनों में 16% टूटा क्रूड ऑयल; भारत में पेट्रोल-डीजल हो सकते हैं सस्ते!
(Photo Credits WC)

Crude Oil Prices Crash: वैश्विक ऊर्जा बाजार से भारत के लिए राहत भरी खबर आ रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है. अमेरिका और ईरान के बीच रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'स्ट्रैट ऑफ होर्मुज' (होर्मुज जलडमरूमध्य) को फिर से खोलने के लिए होने वाले संभावित समझौते के चलते कच्चे तेल के दाम तीन महीने के निचले स्तर पर आ गए हैं. पिछले चार कारोबारी सत्रों में तेल की कीमतों में करीब 16 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की जा चुकी है, जो इस साल की सबसे लंबी गिरावट है.

$80 के नीचे पहुंचे दोनों वैश्विक बेंचमार्क

इस बड़ी गिरावट के बाद अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में घटकर 77 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है. इसी तरह वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) भी भारी बिकवाली के दबाव में 79 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे बंद हुआ. बाजार विश्लेषकों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने से तेल बाजारों पर बना रिस्क प्रीमियम तेजी से खत्म हो रहा है.  यह भी पढ़े:  Petrol-Diesel Tax Cut: मोदी सरकार का फैसला, पेट्रोल पर ₹1.50 और डीजल पर ₹13.50 टैक्स घटाया, 1 जून से नई दरें होगीं लागू

अमेरिका-ईरान शांति समझौते का बड़ा असर

बाजार सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है. इस समझौते के लागू होने के बाद ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना तेल निर्यात फिर से पूरी क्षमता के साथ शुरू करने की मंजूरी मिल सकती है. वैश्विक निवेशकों को उम्मीद है कि इस कदम से बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ेगी और ऊर्जा संकट का दबाव कम होगा.

उल्लेखनीय है कि होर्मुज जलमार्ग दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है. युद्धविराम और इस मार्ग के दोबारा पूरी तरह खुलने से वैश्विक सप्लाई चेन को बड़ी राहत मिलेगी.

तेल भंडार घटने के बावजूद बाजार में सुस्ती

कच्चे तेल की कीमतों में आ रही इस गिरावट के बीच अमेरिकी तेल उद्योग से जुड़े आंकड़े एक अलग संकेत दे रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह अमेरिका के घरेलू कच्चे तेल के भंडार में लगभग 83 लाख बैरल की भारी कमी आई है. इसके साथ ही ओक्लाहोमा के कुशिंग हब (Cushing Hub) में भी इन्वेंट्री स्टॉक में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. आमतौर पर तेल भंडार घटने से कीमतों में तेजी आती है, लेकिन फिलहाल बाजार सप्लाई बढ़ने की भविष्य की संभावनाओं को देखकर प्रतिक्रिया दे रहा है.

चुनौतियां अभी भी हैं बरकरार

भले ही शांति समझौते की खबरों से बाजार को राहत मिली है, लेकिन ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि जमीनी स्तर पर तेल की आवाजाही को पूरी तरह सामान्य होने में थोड़ा समय लग सकता है. शुरुआती हफ्तों में समुद्री मार्गों की सुरक्षा जांच और अमेरिकी नौसेना के जहाजों द्वारा तेल टैंकरों को सुरक्षा दिए जाने की आवश्यकता पड़ सकती है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगले एक महीने तक इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही सामान्य गति से कुछ कम रह सकती है.

भारत को क्या होगा सीधा फायदा?

भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है और वह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट के चलते भारतीय रिफाइनरी कंपनियों की कच्चे तेल को खरीदने की लागत काफी कम हो जाएगी.

लागत कम होने से तेल कंपनियों पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें घटाने का दबाव बढ़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में आम उपभोक्ताओं को खुदरा कीमतों में बड़ी राहत मिल सकती है. इसके अलावा, तेल आयात का बिल घटने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार की बचत होगी और भारतीय रुपये को भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती मिलेगी.

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 17, 2026 10:14 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).