विदेश की खबरें | इराक, पाकिस्तान और लेबनान में शिया मुसलमानों ने 'यौम-ए-आशूरा' मनाया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. माना जाता है कि 680 ईसवी में दक्षिण बगदाद के करबला में हुई लड़ाई के दौरान हुसैन शहीद हो गए थे, लिहाजा 'यौम-ए-आशूरा' पर बड़ी संख्या में शिया मुसलमान करबला में जुटते हैं और मातम मनाते है।
माना जाता है कि 680 ईसवी में दक्षिण बगदाद के करबला में हुई लड़ाई के दौरान हुसैन शहीद हो गए थे, लिहाजा 'यौम-ए-आशूरा' पर बड़ी संख्या में शिया मुसलमान करबला में जुटते हैं और मातम मनाते है।
शिया समुदाय के लोग हुसैन और उनके वंशजों को पैगंबर के असली वारिस के रूप में देखते हैं। एक प्रतिद्वंद्वी मुस्लिम गुट के हाथों उनकी हत्या, इस्लाम के सुन्नी और शिया संप्रदायों के बीच दरार का प्रतीक रही है।
आशूरा पर होने वाले सार्वजनिक आयोजनों के चलते अक्सर इराक, लेबनान और पाकिस्तान में सांप्रदायिक तनाव देखा जाता है, जहां इस्लाम के दो मुख्य संप्रदायों के लोग अच्छी खासी तादाद में रहते हैं।
इराक में सुरक्षा बल किसी भी हिंसक घटना से बचने के लिए सतर्कता बरत रहे हैं क्योंकि शियाओं को विधर्मी मानने वाले कुछ सुन्नी चरमपंथी समूह पिछले कई वर्षों से इस अवसर पर शिया समुदाय के लोगों को निशाना बनाते रहे हैं।
पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि आतंकवादी आशूरा के जुलूस में शामिल होने वालों को निशाना बना सकते हैं।
इस बीच, कड़े सुरक्षा इंतजामों के तहत इस्लामाबाद समेत पाकिस्तान के प्रमुख शहरों में दूसरे दिन भी बड़े पैमाने जुलूस निकाले गए, जिनमें शामिल लोगों ने मातम किया।
लेबनान में जुलूसों के चलते कई क्षेत्रों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। लेबनान की 50 लाख की आबादी में एक तिहाई शिया हैं।
काले वस्त्र डाले हजारों पुरुषों, महिलाओं और बच्चों ने हिज़्बुल्लाह के झंडे लहराते हुए सड़कों पर मार्च और मातम किया।
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