विदेश की खबरें | यमन युद्ध में शामिल पक्षों ने 357 कैदी रिहा किए: रेड क्रॉस
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से पिछले महीने हुए समझौते ने वर्षों बाद हुई कैदियों की अदला-बदली में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से पिछले महीने हुए समझौते ने वर्षों बाद हुई कैदियों की अदला-बदली में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
यमन में लंबे समय से जारी युद्ध को खत्म करने के लिए वार्ता को लेकर किए जा रहे राजनयिक प्रयासों के बीच यह समझौता हुआ है।
इस समझौते में 2014 में युद्ध शुरू होने के बाद सभी पक्षों द्वारा कैद किए गए 800 से अधिक लोगों को रिहा किया जाना शामिल है। उस साल हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा करके अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार गिरा दी थी।
कैदियों की रिहाई का सिलसिला शुक्रवार को सभी पक्षों की ओर से 318 बंदियों को छोड़ने के साथ शुरू हुआ था। जिन कैदियों को रिहा किया गया उनमें मेजर जनरल महमू अल-सुबैही भी शामिल हैं, जो युद्ध छिड़ने के समय यमन के रक्षा मंत्री थे। इसके अलावा यमन के पूर्व राष्ट्रपति आबिद रब्बू मंसूर हदी के भाई नासिर मंसूर हदी भी रिहा होने वालों में शामिल हैं।
आईसीआरसी ने बताया कि सभी पक्षों ने शनिवार को 357 कैदियों को रिहा किया। हूती कैदियों को सऊदी अरब और यमन सरकार के नियंत्रण वाले अन्य शहरों से राजधानी सना लाया गया, जिसपर विद्रोहियों का कब्जा है।
शनिवार को रिहा होने वालों में सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन की तरफ से युद्ध लड़ने वाले लगभग दो दर्जन सऊदी और सूडानी सैनिक शामिल हैं।
समझौते के अनुसार विद्रोहियों ने यमन के कद्दावर नेता रहे दिवंगत अली अब्दुल्ला सालेह के रिश्तेदारों को भी रिहा किया है।
सालेह युद्ध के शुरुआती वर्षों में हूतियों की ओर से लड़े थे, लेकिन बाद में उन्होंने पाला बदल लिया और दिसंबर 2017 में विद्रोहियों ने उनका कत्ल कर दिया।
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