देश की खबरें | विश्व आदिवासी दिवस : बस्तर और सरगुजा में 2,848 विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार को राज्य के बस्तर और सरगुजा जिलों में ‘विश्व आदिवासी दिवस’ के मौके पर दो कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और एक हजार करोड़ रुपये के 2,848 विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

रायपुर, नौ अगस्त छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार को राज्य के बस्तर और सरगुजा जिलों में ‘विश्व आदिवासी दिवस’ के मौके पर दो कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और एक हजार करोड़ रुपये के 2,848 विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

राज्य में इस वर्ष के अंत तक प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले बघेल ने राज्य के आदिवासी बहुल दक्षिणी क्षेत्र (बस्तर) और उत्तरी क्षेत्र (सरगुजा) में आदिवासियों के हित में कई घोषणाएं कीं।

सरगुजा में विधानसभा की 14 और बस्तर में 12 सीटें हैं, जिनमें से क्रमश: नौ और 11 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। राज्य के 90 विधानसभा सीटों में से 29 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।

अधिकारियों ने बताया कि आज मुख्यमंत्री बघेल बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए तथा बाद में उन्होंने सरगुजा जिले के विकासखंड सीतापुर में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की।

उन्होंने बताया कि जगदलपुर में कार्यक्रम के दौरान बघेल ने बस्तर संभाग के सभी जिला मुख्यालयों में बीएड और डीएड कॉलेज खोले जाने, जगदलपुर में आदिवासियों के संस्कृति के प्रतीक बुढ़ादेव गुडी निर्माण और मूर्ति की स्थापना करने, जगदलपुर में 100 करोड़ रुपये की लागत से इंडोर स्टेडियम का निर्माण करने, जिला न्यायालय जगदलपुर चौक का नामकरण ‘भूमकाल चौक’ करने समेत कई घोषणाएं कीं।

अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने सरगुजा जिले के सीतापुर में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सरगुजा में जनजातीय सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना करने, सर्व आदिवासी समाज और अन्य समाजों के लिए भूमि आवंटन करने, पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए जिले के आदिवासी वर्ग के शिक्षित बेरोजगारों (युवक एवं युवतियों) को पर्यटक गाइड समेत अन्य प्रशिक्षण दिलाये जाने की व्यवस्था करने तथा जिले के आदिवासी वर्ग के युवकों और युवतियों को राष्ट्रीय/अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न खेल विधाओं में भाग लेने के लिए आदिवासी विकास विभाग की ओर से आवश्यक आर्थिक सहायता प्रदान करने समेत कई घोषणाएं कीं।

सीतापुर में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार छत्तीसगढ़ की संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए लगातार काम कर रही है।

बघेल ने कहा, ‘‘आज विश्व आदिवासी दिवस की गूंज ईब (सरगुजा क्षेत्र के जशपुर जिले से निकलने वाली एक नदी) से इंद्रावती (बस्तर क्षेत्र में बहने वाली एक नदी) तक सुनाई दे रही है। हमने विश्व आदिवासी दिवस के दिन छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की, उसके बाद से आदिवासी समाज के लोग बढ़-चढ़कर विश्व आदिवासी दिवस मनाते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सरकार विगत पौने पांच सालों से आदिवासी समुदाय के साथ-साथ सभी वर्गों के हित के लिए लगातार कार्य कर रही है। किसी ने भी नहीं सोचा था कि गोबर की भी खरीदी होगी, लेकिन हमने यह कर दिखाया और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास किया है।’’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘आदिवासियों के आर्थिक-सामाजिक जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए हमने तेंदूपत्ता संग्रहण की दर को 2500 से बढ़ाकर चार हजार रूपए प्रति मानक बोरा किया है, वनोपजों की खरीदी की संख्या सात से बढ़ाकर 65 की है। इसी प्रकार से वन प्रबंधन समिति को 44 करोड़ रुपये लाभांश राशि का अंतरण भी आज उनके खातों में किया गया।’’

बघेल ने कहा, ‘‘हमने जगदलपुर के आसना में 'बादल' नाम की संस्था की स्थापना की। वहां हम आदिवासी संस्कृति, साहित्य और परंपरा को सहेजने का काम कर रहे हैं। सरगुजा में भी आदिवासियों की संस्कृति को सहेजने के लिए एक संस्था का निर्माण किया जाएगा।’’

इससे पहले जगदलपुर के काकतीय कॉलेज परिसर में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए बघेल ने कहा, ‘‘बस्तर शांति का टापू है। प्राकृतिक सुंदरता से भरा हुआ है। बस्तर में साफ दिल के लोग हैं, मेहनतकश और ईमानदार लोग हैं। पिछले कुछ वर्षों से जो भय का माहौल बना था, आज वह भय से उन्मुक्त होते जा रहे हैं। आज हिंसक घटनाओं में बहुत कमी आई है और उसका लाभ जनता उठा पा रही है।’’

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