देश की खबरें | न्यायालय में की गई टिप्पणी वापस लें सॉलिसिटर जनरल : मणिपुर आदिवासी महिला समूह

नयी दिल्ली, सात अगस्त मणिपुर के कुकी-हमार-जोमी समुदाय के दिल्ली-एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) स्थित एक महिला संगठन ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा उच्चतम न्यायालय में की गई उस टिप्पणी को वापस लिये जाने की मांग की है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि मणिपुर में जातीय हिंसा के दौरान मिले अधिकतर लावारिस शव ‘‘घुसपैठियों’’ के हैं।

‘यूएनएयू आदिवासी महिला मंच, दिल्ली-एनसीआर’ ने एक बयान में कहा कि यह समूह मणिपुर के कुकी-हमार-जोमी समुदाय की माताओं का प्रतिनिधित्व करता है और ये माताएं एक अगस्त को न्यायालय में सॉलिसिटर जनरल द्वारा की गई टिप्पणियों से ‘‘बहुत आहत एवं हैरान’’ हैं।

समूह ने कहा, ‘‘देश के सॉलिसिटर जनरल की ऐसी तुच्छ और निराधार टिप्पणी अशोभनीय, अस्वीकार्य और घृणित है। यह उन मृतकों के परिवारों के लिए बेहद दुखद है, जो आज तक अपने प्रियजन का अंतिम संस्कार नहीं कर पाए हैं।’’

महिला समूह ने आरोप लगाया कि इंफाल में सुरक्षा संबंधी मौजूदा हालात के कारण कुछ मृतकों के शवों तक उनके शोकसंतप्त परिवार पहुंच भी नहीं पा रहे। उसने आरोप लगाया कि यदि वे शवों तक पहुंचने की कोशिश करेंगे तो ‘‘उनकी मौत निश्चित है।’’

इसमें कहा गया है कि कुकी-हमार-जोमी समुदाय इन शवों को चुराचांदपुर लाने की बार-बार मांग कर रहा है, जिसका ‘‘कोई असर नहीं हुआ।’’

महिला समूह ने कहा कि भारत के किसी भी नागरिक को बिना आधार या सबूत के ‘‘घुसपैठिया या अवैध प्रवासी’’ कहना एक गंभीर मामला है और ‘‘यह झूठ बोलने और न्यायालय को गुमराह करने के समान है तथा ऐसी टिप्पणी देश के दूसरे सबसे उच्च विधि अधिकारी के पद को संभालने वाले व्यक्ति को शोभा नहीं देती।’’

समूह ने कहा, ‘‘उपरोक्त बातों के मद्देनजर, कुकी-हमार-जोमी समुदाय की मांओं का प्रतिनिधित्व करने वाला समूह ‘यूएनएयू आदिवासी महिला मंच, दिल्ली-एनसीआर’ सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से टिप्पणी वापस लेने की मांग करता है...।’’

मीडिया में प्रसारित खबरों के अनुसार, केंद्र और मणिपुर सरकार की ओर से पेश हुए मेहता ने एक अगस्त को उच्चतम न्यायालय से कहा था, ‘‘अधिकतर लावारिस शव घुसपैठियों के हैं।’’ उन्होंने मणिपुर में हिंसा को लेकर प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष दिनभर हुई सुनवाई के आखिर में यह टिप्पणी की थी।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने न्यायालय का रुख स्पष्ट करते हुए कहा था, ‘‘लेकिन जिनके साथ बलात्कार किया गया और जिनकी हत्या की गई, वे अंतत: हमारे लोग थे, ठीक है? इसलिए, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि न्याय हो, बस।’’

मेहता ने इस बिंदु पर हस्तक्षेप करते हुए कहा था, ‘‘ज्यादातर लावारिस शव उन घुसपैठियों के हैं... जो किसी विशेष योजना के साथ आए और मारे गए... मैं इस बारे में और कुछ कहना और चीजों को बिगाड़ना नहीं चाहता...।’’

इस बीच, वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्वेस ने कहा, ‘‘एक सौ अठारह आदिवासियों के शव इंफाल के मुर्दाघर में हैं।’

आदिवासी समुदायों की ओर से पेश होते हुए गोंजाल्वेस ने कहा, ‘‘शवों की महीनों से पहचान नहीं हो पाई है। वे सड़ रहे हैं। हम उनकी पहचान करने के लिए वहां नहीं जा सकते। उन्हें पहचानने में हमारी मदद करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा।’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)