देश की खबरें | एमएसपी की कानूनी गारंटी, कृषि ऋण माफी जैसी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन फिर शुरू करेंगे : एसकेएम

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने बृहस्पतिवार को ऐलान किया कि वह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी और कृषि ऋण माफी सहित अन्य लंबित मांगों को लेकर फिर से आंदोलन शुरू करेगा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एक ज्ञापन सौंपेगा।

नयी दिल्ली, 11 जुलाई संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने बृहस्पतिवार को ऐलान किया कि वह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी और कृषि ऋण माफी सहित अन्य लंबित मांगों को लेकर फिर से आंदोलन शुरू करेगा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एक ज्ञापन सौंपेगा।

वर्ष 2020-21 के किसान आंदोलन का नेतृत्व करने वाले एसकेएम ने अपनी आम सभा की बैठक के एक दिन बाद यह घोषणा की। इस बार शायद संगठन दिल्ली कूच नहीं करेगा। एसकेएम में अलग-अलग किसान संगठन शामिल हैं।

संगठन के नेताओं ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और राज्यसभा तथा लोकसभा के सदस्यों से मुलाकात करने तथा उन्हें किसानों की मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपने के लिए 16 से 18 जुलाई के बीच का समय मांगा जाएगा।

यह पूछे जाने पर कि क्या किसान फिर से दिल्ली कूच करेंगे, एसकेएम नेताओं ने कहा कि इस बार वे देशव्यापी विरोध प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, विशेष रूप से महाराष्ट्र, झारखंड, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में, जहां विधानसभा चुनाव होने हैं।

आम सभा की बैठक में हिस्सा लेने वाले अखिल भारतीय किसान सभा के हन्नान मुल्ला ने कहा, ‘‘हर बार विरोध का एक ही तरीका अपनाना जरूरी नहीं है। हम पूरे देश में विरोध प्रदर्शन करेंगे।’’

एसकेएम नेताओं ने दावा किया कि किसान आंदोलन का ही असर है कि हालिया लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को विभिन्न राज्यों में 159 ग्रामीण बहुल संसदीय क्षेत्रों में हार का सामना करना पड़ा।

संवाददाता सम्मेलन के बाद जारी किए गए बयान में एसकेएम ने कहा, ‘‘आम सभा ने भारत सरकार के कृषि विभाग के सचिव द्वारा हस्ताक्षरित नौ दिसंबर 2021 के समझौते को लागू करने और किसानों की आजीविका को प्रभावित करने वाली अन्य प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन फिर से शुरू करने का फैसला किया है...।’’

मुल्ला के अलावा अविक साहा, प्रेम चंद गहलावत, पी कृष्णप्रसाद, डॉ सुनीलम, युद्धवीर सिंह और आर वेंकैया जैसे किसान नेताओं ने भी संवाददाताओं को संबोधित किया।

उन्होंने कहा कि आंदोलन को फिर से शुरू करने के तहत वे ज्ञापन सौंपने के लिए 16, 17 या 18 जुलाई को लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी से भी मुलाकात के लिए समय मांगेंगे।

संगठन ने कहा कि नौ अगस्त को एसकेएम अपनी मांगों के समर्थन में देशभर में प्रदर्शन करके ‘‘भारत छोड़ो दिवस’’ ​​को ‘‘कॉरपोरेट भारत छोड़ो दिवस’’ ​​के रूप में मनाएगा।

एसकेएम ने मांग रखी है कि भारत को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) से बाहर आना चाहिए और बहुराष्ट्रीय निगमों को कृषि क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

एसकेएम की पंजाब इकाई 17 अगस्त को जल संकट, कर्ज के बोझ, सड़क गलियारों के माध्यम से भारत-पाकिस्तान व्यापार शुरू करने और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार की ‘‘सत्ता और संसाधनों के केंद्रीकरण की नीति’’ के खिलाफ राज्य की संघीय मांगों के मुद्दों पर मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनके मंत्रियों के आवासों के सामने तीन घंटे का विरोध प्रदर्शन करेगी।

उसी दिन एसकेएम सभी राज्यों में जल संकट और कृषि को प्रभावित करने वाले जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर संगोष्ठी भी आयोजित करेगा।

किसानों की मांगों में सभी फसलों के लिए सुनिश्चित खरीद के साथ फसल लागत से 50 प्रतिशत ज्यादा यानी ‘‘सी2 प्लस 50’’ प्रतिशत फार्मूले पर आधारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, बिजली क्षेत्र के निजीकरण और ‘प्री-पेड’ बिजली मीटर पर रोक, किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा और आंदोलन से संबंधित सभी मुकदमों को वापस लेना शामिल हैं।

सभी फसलों के लिए व्यापक बीमा कवरेज, सभी किसानों और कृषि श्रमिकों के लिए 10,000 रुपये की मासिक पेंशन और 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून को लागू करना भी उनकी मांगों का हिस्सा है। ग्रामीण बहुल लोकसभा सीट पर भाजपा की हार के अपने दावे पर एसकेएम ने कहा, ‘‘पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र की 38 ग्रामीण बहुल सीट पर भाजपा की हार और उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी और झारखंड के खूंटी में अर्जुन मुंडा (कृषि मंत्री) की हार से साफ है कि किसान आंदोलन के कारण ऐसा हुआ...भाजपा, ग्रामीण बहुल 159 निर्वाचन क्षेत्रों में हारी है।’’

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