देश की खबरें | पेड़ों के संरक्षण में ढिलाई के लिए अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों नहीं हो: अदालत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली के कई अधिकारियों से जवाब मांगा है कि पेड़ों की सुरक्षा और संरक्षण में कर्तव्य की अवहेलना के लिए उनके खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए।

नयी दिल्ली, छह मार्च दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली के कई अधिकारियों से जवाब मांगा है कि पेड़ों की सुरक्षा और संरक्षण में कर्तव्य की अवहेलना के लिए उनके खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए।

न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने कहा कि पेड़ों को हुए नुकसान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), वन विभाग, बीएसईएस आरपीएल तथा दिल्ली पुलिस के अधिकारियों सहित कई विभागों को नोटिस जारी किया। साथ ही सुनवाई की अगली तारीख 14 मार्च को उन्हें अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति वजीरी ने कहा, ‘‘न्यायिक आदेशों के बावजूद ऐसा प्रतीत होता है कि कहीं न कहीं कुछ अधिकारी और एजेंसियां आदेशों का अनुपालन नहीं करना चाहतीं।’’

न्यायमूर्ति ने इस बात पर जोर दिया कि पेड़ों को क्षति पहुंचाना और हरित माहौल को बिगाड़कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और नागरिकों को कानून के अनुसार अपने परिवेश को बनाए रखने और उनकी देखभाल करने का अधिकार है।

अदालत ने चित्तरंजन पार्क फुटपाथ की कई तस्वीरें रिकॉर्ड पर लीं, जिसे लोक निर्माण कार्य के लिए खोदा गया था।

अदालत ने कहा, ‘‘पेड़ के तने से खुदाई की दूरी एक मीटर से कम है, पेड़ की जड़ें काट दी गई हैं/क्षतिग्रस्त हो गई हैं, इस अदालत और राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेशों का जानबूझकर उल्लंघन किया गया है।’’

अदालत ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया प्रतिवादियों द्वारा अदालत की अवमानना ​​की गई है। न्यायमूर्ति ने कहा, ‘‘पेड़ों की सुरक्षा को लेकर अदालत द्वारा कई आदेश पारित करने और इसके लिए अधिकारियों को संवेदनशील बनाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों में इसके प्रति बहुत कम संवेदनशीलता देखी गई है।’’

अदालत ने अपने हालिया आदेश में कहा, ‘‘अदालत के आदेशों का लगातार उल्लंघन न केवल अदालत की अवमानना ​​है, बल्कि यह दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1994 के प्रावधानों का भी उल्लंघन है और उक्त अधिनियम के तहत अपराध है।’’

याचिकाकर्ता ‘न्यू डेल्ही नेचर सोसाइटी’ के वकील आदित्य एन प्रसाद ने कहा कि किसी भी एजेंसी द्वारा उक्त स्थान पर कोई उपचारात्मक उपाय शुरू नहीं किया गया था और तस्वीरों से पेड़ों को हुए नुकसान का साफ पता चलता है।

अदालत ने कहा, ‘‘पीडब्ल्यूडी को तुरंत काम बंद करना चाहिए था, संबंधित अधिकारी को उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करनी चाहिए थी। स्थानीय पुलिस ने भी कोई कार्रवाई नहीं की... प्रथम दृष्टया अदालत का मानना ​​है कि प्रतिवादियों ने अदालत की अवमानना ​​की है और अपने आधिकारिक कर्तव्य की स्पष्ट अवहेलना भी की है। इसलिए प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया जाए। वे बताएं कि अदालत की अवमानना ​​अधिनियम, 1971 की धारा 2 (बी), 10 और 12 के तहत उनके खिलाफ अवमानना की ​​कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जाए... सुनवाई की अगली तारीख पर सभी प्रतिवादी अदालत में उपस्थित रहेंगे।’’

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