अमेरिका में टिकटॉक को बैन करने की क्यों हो रही मांग

हाल ही में अमेरिकी संसद के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने 352-65 के भारी मतों से एक बिल पारित किया.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

हाल ही में अमेरिकी संसद के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने 352-65 के भारी मतों से एक बिल पारित किया. इसके तहत, बाइटडांस को छह महीने के भीतर टिकटॉक ऐप को किसी अमेरिकी को बेचना होगा.बीते चार साल में यह दूसरा मौका है जब चीनी वीडियो ऐप टिकटॉक संयुक्त राज्य अमेरिका में सांसदों के निशाने पर है. 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले, डॉनल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करके, इस ऐप्लिकेशन के मालिकाना हक वाली कंपनी बाइटडांस को 90 दिनों के भीतर ऐप को बेचने के लिए मजबूर किया था. हालांकि, कानूनी चुनौतियों की वजह से ट्रंप की यह कोशिश विफल रही.

अमेरिकी सांसद एक बार फिर टिकटॉक को जबरन बेचने की मांग कर रहे हैं और ऐसा न करने पर पूरे देश में इसके इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दे रहे हैं.

बीते बुधवार को अमेरिकी संसद के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने 352-65 के भारी मतों से एक बिल पारित किया. इसके तहत, बाइटडांस को छह महीने के भीतर टिकटॉक ऐप को बेचना होगा. अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो अमेरिका में एप्पल और गूगल प्ले स्टोर से इस ऐप को हटा दिया जाएगा.

इस बिल को अब कानून बनने के लिए सीनेट की मंजूरी की जरूरत होगी. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने वादा किया है कि अगर देश की संसद (कांग्रेस) से यह बिल पारित हो जाता है, तो वह इस पर हस्ताक्षर कर देंगे.

टिकटॉक पर प्रतिबंध क्यों लगाना चाहता है अमेरिका?

टिकटॉक ऐप 2016 में लॉन्च हुआ था. लॉन्च के साथ ही यह काफी लोकप्रिय हो गया. सिर्फ अमेरिका में करीब 17 करोड़ लोग इसका इस्तेमाल करते हैं. तीसरे पक्ष के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिकी उपभोक्ता टिकटॉक पर प्रतिदिन औसतन 60 से 80 मिनट बिताते हैं. वहीं, इसके प्रतिद्वंद्वी इंस्टाग्राम पर करीब 30 से 40 मिनट.

खुफिया विभाग के प्रमुखों ने चेतावनी दी है कि टिकटॉक चीनी सरकार का ऐसा उपकरण बन गया है जिसका इस्तेमाल अमेरिकी लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए किया जा सकता है.

राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के कार्यालय ने इस सप्ताह चेतावनी दी थी कि चीन की प्रोपेगैंडा इकाई ने कथित तौर पर 2022 में अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले डेमोक्रेट और रिपब्लिकन उम्मीदवारों को निशाना बनाया था. एजेंटों को डर है कि ऐप का इस्तेमाल नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है.

चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के तहत, अगर चीनी सरकार को किसी भी समय खुफिया जानकारी की जरूरत पड़ती है, तो वह टिकटॉक के मालिक बाइटडांस को मजबूर कर अमेरिकी उपयोगकर्ताओं का डेटा हासिल कर सकती है.

वहीं दूसरी ओर, टिकटॉक ने बार-बार कहा है कि उसने कभी भी अमेरिकी उपयोगकर्ताओं के डेटा को चीनी अधिकारियों के साथ साझा नहीं किया है और भविष्य में भी मांगे जाने पर ऐसा नहीं करेगा.

वहीं, अमेरिकी विधेयक से राष्ट्रपति को यह अधिकार मिलता है कि अगर कोई ऐप ऐसे देश के नियंत्रण में है जिसे अमेरिका का विरोधी माना जाता है, तो वे उस ऐप को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित कर सकते हैं.

क्या इस योजना को व्यापक समर्थन मिल रहा है?

अमेरिकी संसद के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भारी बहुमत से यह बिल पारित हुआ है. राजनीतिक रूप से विभाजित अमेरिका में ऐसे मौके काफी कम देखने को मिलते हैं.

डीपवाटर एसेट मैनेजमेंट के मैनेजिंग पार्टनर जेन मुंस्टर ने अपने यूट्यूब फॉलोअर्स को बताया, "टिकटॉक पर प्रतिबंध उन दुर्लभ मुद्दों में से एक है जिसे दोनों दलों का समर्थन मिला है. यह असल में ‘चीन पर अमेरिका की सख्त नीति' को दर्शाता है.”

हालांकि, सीनेट में यह बिल पारित होगा या नहीं, इस पर संशय के बादल छाए हुए हैं क्योंकि कुछ सांसद चुनावी वर्ष के दौरान इतने लोकप्रिय ऐप पर प्रतिबंध लगाने के इच्छुक नहीं हैं.

व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने इस हफ्ते कहा, "हमारा लक्ष्य चीनी स्वामित्व को खत्म करना है, ऐप पर प्रतिबंध लगाना नहीं. सवाल यह है कि हम टिकटॉक पर अमेरिकी कंपनी का मालिकाना हक चाहते हैं या चीन का? इसका सीधा संबंध हमारे डेटा की सुरक्षा से है. सवाल यह भी है कि टिकटॉक पर मौजूद हर तरह का डेटा अमेरिका में ही रहे या चीन जाए?”

वहीं, अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (एसीएलयू) ने बयान जारी कर चेतावनी दी है कि यह प्रतिबंध "अमेरिका के उन करोड़ों लोगों के प्रथम संशोधन अधिकारों (फर्स्ट अमेंडमेंट राइट्स) का उल्लंघन होगा जो हर दिन आपस में बातचीत करने और अपने विचारों को जाहिर करने के लिए इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं.”

एसीएलयू में वरिष्ठ नीति सलाहकार जेना लेवेंटॉफ ने कहा, "हम इस बात से बहुत निराश हैं कि हमारे नेता एक बार फिर चुनावी वर्ष के दौरान सस्ते राजनीतिक लाभ के लिए हमारे फर्स्ट अमेंडमेंट राइट्स को दांव पर लगाने की कोशिश कर रहे हैं.”

टिकटॉक के उपयोगकर्ताओं को ऐप के माध्यम से सूचनाएं मिलीं, जिनमें उनसे अपने स्थानीय प्रतिनिधियों से संपर्क करने और संभावित प्रतिबंध के विरोध में प्रदर्शन करने का आग्रह किया गया. इस कदम की वजह से शिकायतों की झड़ी लग गई है.

कुछ तकनीकी विश्लेषकों ने इस बिल के तहत दी गई नई शक्तियों को ‘ट्रोजन हॉर्स' के तौर पर बताया है. ऐसा इसलिए है क्योंकि यह बिल सांसदों को विदेशी वेबसाइटों के साथ-साथ ऐप्स पर भी प्रतिबंध लगाने का अधिकार देगा.

कई अन्य लोगों का मानना है कि इस कदम से टिकटॉक का इस्तेमाल करने वाले अमेरिका के युवा मतदाता नाराज हो सकते हैं. साथ ही, यह रास्ता और भी जटिल हो गया है, क्योंकि डॉनल्ड ट्रंप अब टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं हैं. जबकि, वह अब भी मानते हैं कि टिकटॉक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि प्रतिबंध से प्रतिद्वंद्वी फेसबुक को फायदा होगा. वे 2020 के चुनाव में अपनी हार के लिए फेसबुक को भी आंशिक तौर पर जिम्मेदार मानते हैं.

चीन और बाइटडांस ने क्या प्रतिक्रिया दी?

ब्लूमबर्ग न्यूज ने बीते बुधवार को बताया कि अगर बिल पारित हो जाता है, तो बाइटडांस ने ऐप बेचने पर विचार करने से पहले सभी कानूनी चुनौतियों का सामना करने की कसम खाई है. ब्लूमबर्ग ने इस मामले से जुड़े लोगों के हवाले से बताया कि बाइटडांस सबसे अंतिम विकल्प के तौर पर ऐप को बेचने का रास्ता चुनेगा.

टिकटॉक कंपनी में पब्लिक पॉलिसी के उपाध्यक्ष माइकल बेकरमैन ने बिल का समर्थन करने वाले सांसदों को पत्र लिखा. इसमें उन्होंने कहा, "यह नया बिल, काफी तेजी से पारित किया जा रहा है. किसी तरह की सार्वजनिक सुनवाई का मौका नहीं दिया जा रहा है. यह गंभीर संवैधानिक चिंताएं पैदा करता है.”

चीन की सरकार ने ज्यादा जानकारी दिए बिना बुधवार को चेतावनी दी कि इस प्रतिबंध की वजह से अमेरिका को परेशानी का सामना करना पड़ेगा. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा, "अमेरिका को कभी भी इस बात का सबूत नहीं मिला है कि टिकटॉक से उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है, लेकिन उसने टिकटॉक पर दबाव बनाना बंद नहीं किया.”

उन्होंने आगे कहा, "प्रतिस्पर्धा में निष्पक्ष रूप से जीत हासिल न कर पाने वाले इस प्रकार के दबाव पूर्ण व्यवहार से कंपनियों की सामान्य कारोबारी गतिविधियां बाधित होती हैं, अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों का विश्वास कमजोर होता है और यह अंतर्राष्ट्रीय, आर्थिक एवं व्यापार व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाता है.”

अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध के दौरान, चीन ने अक्सर अमेरिकी प्रतिबंधों का जवाब ‘जैसे को तैसा' कर के दिया है. इस बार भी कई लोगों की निगाहें इस बात पर हैं कि चीन इस मामले की प्रतिक्रिया में क्या कदम उठाता है.

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