विदेश की खबरें | अपने दर्द को 10 में से अंक देना क्यों मुश्किल है?
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सिडनी, छह मार्च (द कन्वरसेशन) मेरी पांच वर्ष की बेटी (जोश) के हाथ की हड्डी टूट गई और वह कराहते हए अस्पताल के आपात विभाग में पहुंची।
नर्स ने उससे पूछा कि शून्य से 10 के स्केल में वह अपने दर्द को किस अंक पर रखेगी? इस पर दर्द से कराह रही मेरी बच्ची को कुछ समझ नहीं आया।
उसने पूछा कि ‘‘10 का क्या मतलब है?’’
नर्स ने कहा ‘‘10 सबसे भयानक दर्द है जिसकी आप कल्पना कर सकते हैं।’’ इस पर बच्ची और भी हैरान दिखी।
अभिभावक और एक दर्द वैज्ञानिक दोनों होने के तौर पर मैंने खुद देखा कि कैसे हमारी सरल, अच्छी मंशा वाली दर्द रेटिंग प्रणाली विफल हो सकती है।
दर्द के पैमाने किसलिए हैं?
सबसे सामान्य पैमाना 50 सालों से है। यह लोगों से उनके दर्द को शून्य (कोई दर्द नहीं) से लेकर दस (आमतौर पर "सबसे तेज दर्द जिसकी कल्पना की जा सकती है") तक रेट करने के लिए कहता है।
यह दर्द के सिर्फ एक पहलू -इसकी तीव्रता- पर ध्यान केंद्रित करता है ताकि मरीज की हालत क्या है इसे तेजी से समझा जा सके।
यह कितना दर्दनाक है? क्या यह बदतर हो रहा है? क्या उपचार से यह ठीक हो रहा है?
रेटिंग स्केल समय के साथ दर्द की तीव्रता का पता लगाने के लिए उपयोगी हो सकते हैं। अगर दर्द के अंक आठ से चार हो जाते हैं, तो इसका मतलब है कि आप बेहतर महसूस कर रहे हैं - यह भी हो सकता है कि आपका चार अंक किसी अन्य व्यक्ति के चार अंक से अलग हो।
शोध से पता चलता है कि क्रोनिक (पुराने) दर्द की गंभीरता में दो अंक (या 30) की कमी आमतौर पर एक ऐसे परिवर्तन को दर्शाती है जो दैनिक जीवन में अंतर लाता है।
पेचीदा अनुभव पता करने के लिए बेहद संकुचित माध्यम
मेरी बेटी की दुविधा पर विचार करें। कोई व्यक्ति सबसे भयानक दर्द की कल्पना कैसे कर सकता है? क्या हर कोई एक सी ही कल्पना कर सकता है? शोध से पता चलता है कि हर कोई एक जैसा नहीं सोचता। इसी तरह बच्चे भी ‘‘दर्द’’ के बारे में बहुत अलग तरह से सोचते हैं।
लोग आमतौर पर अपने दर्द का आकलन अपने जीवन के अनुभवों से करते हैं।
हम कौन हैं, यह भाव हमारे दर्द को प्रभावित करता है
वास्तव में, दर्द की रेटिंग इस बात से प्रभावित होती है कि दर्द किसी व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों में कितना हस्तक्षेप करता है, वे इससे कितना परेशान होते हैं, उनका मूड, थकान और यह उनके सामान्य दर्द की तुलना में कैसा है।
अन्य कारक भी भूमिका निभाते हैं, जिनमें रोगी की आयु, लैंगिक पहचान, सांस्कृतिक और ई पृष्ठभूमि, साक्षरता और अंकगणित कौशल तथा तंत्रिकाविवर्तन शामिल हैं।
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