देश की खबरें | तपेदिक के इलाज के लिये आईसीएमआर समेत तीन अनुसंधान संस्थानों की जांच को डब्ल्यूएचओ का समर्थन

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. रिफेम्पिसिन, एक मानक दवाई है जिसका इस्तेमाल तपेदिक के इलाज में किया जाता है ।

रिफेम्पिसिन, एक मानक दवाई है जिसका इस्तेमाल तपेदिक के इलाज में किया जाता है ।

फाउंडेशन फॉर इनोवेटिव न्यू डाइग्नोस्टिक (एफआईएनडी), लबियो डाइग्नोस्टिक्स एवं भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने संयुक्त बयान में कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अब टीबी के प्रारंभिक निदान और वयस्कों एवं बच्चों में रिफैम्पिसिन प्रतिरोध का पता लगाने के लिए तेजी से आणविक ट्रूनेट टीएम परीक्षण का समर्थन किया है।

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बयान में कहा गया है, 'ट्रूनेट एमटीबी और ट्रूनेट एमटीबी प्लस दोनों ही तपेदिक के निदान के लिये माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया का पता लगाते हैं, जबकि ट्रूनेट एमटीबी आरआईएफ डीएक्स, रिफेम्पिसिन के प्रतिरोध की पहचान करता है, जो सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली दवा है।'

इसमें कहा गया है,'सभी तीन परीक्षण पोर्टेबल, बैटरी चालित ट्रूनेट डिवाइस पर चलाए जाते हैं और एक घंटे से भी कम समय में परिणाम प्रदान करते हैं।'

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बयान के अनुसार, दुनिया भर में संक्रामक बीमारी से होने वाली मौत में तपेदिक एक प्रमुख कारण है । वर्ष 2018 में एक करोड़ तपेदिक के मामले थे एवं 15 लाख लोगों की इससे मौत हो गयी थी ।इसमें कहा गया है कि दवा विरोधी तपेदिक एक विशेष चुनौती पेश करती है, इसमें रिफेम्पिसिन और अन्य दवाओं के लिए प्रतिरोध बढ़ रहा है जो इस बीमारी का इलाज करते हैं ।

बयान में कहा गया है '2018 में रिफेम्पिसिन प्रतिरोधी तपेदिक के करीब पांच लाख नये मामलों का निदान किया गया था । 2030 तक तपेदिक को समाप्त करने के विश्व स्वास्थ्य संगठन के लक्ष्य को पूरा करने के लिये तपेदिक के निदान एवं इलाज के बीच के अंतर को पाटने के लिये तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है, खास तौर से जहां कम संसाधन है ।

दूसरी ओर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के महानिदेशक बलराम भागर्व ने कहा कि यह परिषद के लिये गौरव का विषय है ।

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