देश की खबरें | डब्ल्यूएफआई ने ट्रायल से पहले पहलवानों से निजी प्रायोजकों से अनुबंध को लेकर शपथ पत्र मांगा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. विश्व चैंपियनशिप के लिए ट्रायल की शुरुआत भ्रम, नाराजगी और झिझक की स्थिति के साथ हुई जब भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने घोषणा की कि केवल उन्हीं पहलवानों को प्रतिस्पर्धा पेश करने की स्वीकृति दी जाएगी जो निजी प्रायोजकों के साथ अपने अनुबंधों की लिखित जानकारी सौंपेंगे।

मस्कट, 31 अगस्त विश्व चैंपियनशिप के लिए ट्रायल की शुरुआत भ्रम, नाराजगी और झिझक की स्थिति के साथ हुई जब भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने घोषणा की कि केवल उन्हीं पहलवानों को प्रतिस्पर्धा पेश करने की स्वीकृति दी जाएगी जो निजी प्रायोजकों के साथ अपने अनुबंधों की लिखित जानकारी सौंपेंगे।

डब्ल्यूएफआई ने दावा किया कि ओजीक्यू (ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट) और जेएसडब्ल्यू जैसे एनजीओ उनके खिलाड़ियों को खराब कर रहे हैं और वे उन्हें एलीट पहलवानों के मामले में हस्तक्षेप की स्वीकृति नहीं देंगे।

बृजभूषण ने कहा कि एनजीओ अगर खेल और खिलाड़ियों की मदद करना चाहती हैं तो उनका स्वागत है लेकिन ‘गोपनीय अनुबंध’ की स्वीकृति नहीं दी जाएगी।

डब्ल्यूएफआई ने कहा कि मुख्य प्रायोजक टाटा मोटर्स की ओर से उन्हें पर्याप्त कोष मिल रहा है जिससे कि प्रतिभावान पहलवानों को बेहतर अनुबंध की पेशकश की जा सके।

बृजभूषण ने ट्रायल की मेजबानी कर रहे आईजी स्टेडियम के केडी जाधव कुश्ती स्टेडियम में जुटे लोगों से कहा, ‘‘किसी को भी प्रतिस्पर्धा पेश करने की स्वीकृति नहीं दी जाएगी अगर वे निजी प्रायोजकों के साथ अपने अनुबंध की जानकारी नहीं देते हैं तो।’’

इससे अफरातफरी की स्थिति पैदा हो गई क्योंकि ‘वार्म अप’ कर रहे पहलवान रुक गए और उन्होंने चर्चा शुरू कर दी कि उन्हें अब क्या करना है।

ट्रायल के लिए जुटे सभी पहलवानों के पास प्रायोजक नहीं हैं लेकिन इससे उन पहलवानों में नाराजगी है जिन्हें वित्तीय समर्थन मिल रहा था और वे इसकी जानकारी का खुलासा नहीं करना चाहते। कोई भी पहलवान अपने अनुबंधों की प्रति नहीं लाया था।

इसके बाद घोषणा की गई कि जिन पहलवानों के पास अनुबंधों की प्रति नहीं है वे शपथ पत्र दे सकते हैं कि वे बाद में इसे सौंप देंगे।

शपथ पत्र में जिक्र किया गया है कि अगर शपथ पत्र या घोषणा पत्र में गलत जानकारी दी जाती है तो डब्ल्यूएफआई उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है।

एक पहलवान ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा, ‘‘यह तानाशाही रवैया है। ऐसा नहीं होना चाहिए। क्या मदद लेना अपराध है।’’

हालांकि पहलवानों के पास शपथ पत्र सौंपने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

बृजभूषण ने हालांकि कहा कि वे पहलवानों में डर पैदा नहीं करना चाहते और ना ही उनके हितों को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें सभी को सूचित किया था जब ट्रायल की तिथि की घोषणा की गई कि सभी को अपने निजी प्रायोजन की जानकारी हमें देनी होगी, ऐसा नहीं है कि हमने आज सुबह उनसे यह कहा। हमें सिर्फ यह देखना चाहते हैं कि उन्हें बेहतर अनुबंध कैसे दे सकते हैं इसलिए हमें पता होना चाहिए कि उन्हें अभी क्या मिल रहा है। ’’

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