देश की खबरें | पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने चंद्रयान-3 को भारत के लिये महत्वपूर्ण यात्रा बताया

कोलकाता, 23 अगस्त भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के चंद्रयान-3 अभियान को देश के लिये महत्वपूर्ण यात्रा बताते हुये पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सी. वी. आनंद बोस ने बुधवार को कहा कि भारत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दुनिया में शीर्ष स्थान हासिल करने जा रहा है।

बोस ने मिशन को संभव बनाने के लिए इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी।

राज्यपाल ने राजभवन में एक समारोह को संबोधित करते हुये कहा, ‘‘यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण यात्रा है। वे कहते हैं कि आकाश ही सीमा है, हम उससे आगे निकल गए हैं। अब हम अंतरिक्ष में हैं। भारत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दुनिया में शीर्ष स्थान पर जा रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं इसरो के वैज्ञानिकों को धन्यवाद देना चाहता हूं। मैंने इसके प्रमुख से बात की है । मैं उन्हें बधाई देना चाहता हूं जिन्होंने इसे संभव बनाया ।’’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा था कि इसरो की कड़ी मेहनत देश की प्रगति का प्रमाण है, उन्होंने सभी से एक साथ खड़े होने और इसकी सफल सॉफ्ट लैंडिंग के लिये उत्साह बढ़ाने का आग्रह किया था।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, ‘‘चंद्रयान-3 मिशन पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। इसरो का दल भारतीय है। उनकी कड़ी मेहनत देश की प्रगति का प्रमाण है जो लोगों, वैज्ञानिकों तथा अर्थशास्त्रियों ने हासिल की है न कि किसी राजनीतिक संस्था ने।’’

ममता ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल समेत देशभर के वैज्ञानिकों ने इस मिशन में बड़ा योगदान दिया है। मैं उन सभी के प्रयासों की सराहना करती हूं जिन्होंने भारत के चंद्र अन्वेषण को नयी ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए कड़ी मेहनत की है।’’

यदि चंद्रयान-3 मिशन चांद पर रोवर को उतारने में सफल हो जाता है, तो अमेरिका, चीन और तत्कालीन सोवियत संघ के बाद चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग की तकनीक में महारत हासिल करने वाला भारत चौथा देश बन जाएगा। पिछले चार साल में इसरो का यह दूसरा अभियान है ।

चंद्रयान-3, चंद्रयान-2 के बाद का अभियान है जिसका उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित और सॉफ्ट-लैंडिंग करना, चंद्रमा पर घूमना और वैज्ञानिक प्रयोगों का संचालन करना है।

चंद्रयान-3 अभियान को 14 जुलाई को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पर उतारने के लिये लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (एलवीएम-3) रॉकेट के माध्यम से चांद की ओर भेजा गया था । चंद्रयान परियोजना पर 600 करोड़ रुपये का खर्चा आया है।

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