कोलकाता, तीन अगस्त पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर नयी शिक्षा नीति का अध्ययन कर अपनी राय देने के लिए छह सदस्यीय समिति गठित की है।
राज्य सरकार ने यह कदम प्रदेश के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी द्वारा नयी शिक्षा नीति-202 को पश्चिम देशों की प्रणाली की नकल बताए जाने के दो दिन बाद उठाया है।
समिति में यादवपुर विश्वविद्यालय के कुलपति सुरंजन दास, सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय, शिक्षाविद प्रतिभा सरकार शामिल हैं।
पार्थ चटर्जी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि समिति नयी शिक्षा नीति में उल्लेखित बिंदुओं की समीक्षा करेगी और 15 अगस्त तक राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
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उन्होंने कहा, ‘‘हम इस मामले में स्कूलों के शिक्षकों और विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों की राय भी लेंगे। एक बार समिति नीति का ध्यानपूर्वक अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट दे देगी तब हम नयी नीति पर अपनी राय से केंद्र को अवगत करा देंगे।’’
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 29 जुलाई को नयी शिक्षा नीति-2020 को मंजूरी दी थी जो 34 साल पुरानी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-1986 का स्थान लेगी।
नयी शिक्षा नीति के मसौदे के मुताबिक छात्रों को तीसरी, पांचवी और आठवीं कक्षा में परीक्षा देनी होगी जिसका आयोजन उचित प्राधिकार करेगा। वहीं 10 और 12 वीं की बोर्ड परीक्षा को भी नये सिरे से निर्धारित किया जाएगा।
चटर्जी ने शनिवार को कथित रूप से राज्यों को और संसद को भरोसे में लिए बिना नयी शिक्षा नीति बनाने पर केंद्र की आलोचना की थी।
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